Rohingya Crisis: रोहिंग्या ने म्यांमार में हमले कराए- आंग सान सू की
नाएप्यीडॉ। म्यांमार एक जटिल राष्ट्र है लोग अपेक्षा करते हैं कि हम कम से कम समय में सभी चुनौतियों का सामना कर सकें। यह बात म्यांमार की स्टेट कांउसलर आंग सान सू ने आज मंगलवार को राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि रोहिंग्या ने देश में हमले कराए हैं। इन्होंने देश के आम लोगों पर हमला किया। हमने शांति की हर संभ कोशिश की। 25 अगस्त को इन्होंने 30 पुलिस चौकियों पर हमला किया।

सू ने कहा कि हम सभी मानवाधिकारों के उल्लंघन की निंदा करते हैं, हम शांति और कानून के शासन के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि म्यांमार को अंतरराष्ट्रीय जांच का जर नहीं है। हम रखीन राज्य में स्थायी समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
Rohingya Crisis पर कहा कि...
सू ने कहा कि आंतरिक संघर्ष के लगभग 70 वर्ष बाद शांति और स्थिरता हमें हासिल करना था। बांग्लादेश की ओर भाग रहे मुसलमानों के बारे में सुनना हमारे लिए पीड़ादायक है। रखीन राज्य में सभी पीड़ित लोगों के लिए हमारी संवेदनाएं हैं। उन्होंने Rohingya Crisis पर कहा कि हम यह पता लगाना चाहते हैं कि यह पलायन क्यों हो रहा है, जो लोग भाग गए हैं उनसे बात करना पसंद करेंगे।
सू ने कहा किसरकार शांति और स्थिरता को बहाल करने और रखीन समुदायों में सामंजस्य लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कई मुस्लिम ग्रामीणों बचे हुए हैं, सभी नहीं गए हैं। मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यहां दौरा करने के लिए आमंत्रित करती हूं।
बनाई है केंद्रीय समिति
उन्होंने कहा कि हमने रखीन में कानून और विकास के नियमों को लागू करने के लिए एक केंद्रीय समिति बनाई है। सू ने हमने डॉ कोफी अन्नान को एक आयोग का नेतृत्व करने के लिए आमंत्रित किया है जो कि रखीन में लंबे समय से चलने वाली समस्याओं को सुलझाने में हमारी सहायता करेगा।
सू ने कि धर्म और नस्ल को दरिकनार कर सभी दोषियों को दंडित किया जाएगा। सूने कहा कि बीते साल तक हमने विकास और शांति की स्थापना के कार्यक्रम को एक साथ जारी रखा। उन्होंने विश्व समुदाय से अपील की कि सिर्फ एक पीड़ित हिस्से को ना देखकर पूरे देश को देखा जाए। वापसी करने वालों के लिए म्यांमार एक शरणार्थी सत्यापन प्रक्रिया शुरू करने के लिए तैयार है।
सू ने कहा कि हम नहीं चाहते कि म्यांमार धार्मिक जातियों या जातियों द्वारा विभाजित एक राष्ट्र बनें। उन्होंने कहा कि डर और घृणा एक गंभीर संकट है।












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