'मुझ पर अटैक कीजिए,मेरे दादा को बदनाम नहीं', राहुल को सपोर्ट करने वाले अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने क्यों कहा ऐसा

सूरत की एक अदालत ने राहुल गांधी को 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान की गई उनकी टिप्पणी के लिए दोषी ठहराया था। जिसके एक दिन बाद उन्हें एक सांसद के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

Ro Khanna News

Ro Khanna News: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसद की सदस्यता खत्म होने पर उनका समर्थन करने वाले अमेरिकी सांसद रो खन्ना फिर से अपने एक ट्वीट को लेकर सु्र्खियों में हैं। राहुल गांधी का समर्थन करने को लेकर रो खन्ना की सोशल मीडिया पर आलोचना हुई थी। सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के बाद रो खन्ना ने ट्वीट किया है। भारतीय-अमेरिकी राजनेता रो खन्ना ने अपने ट्वीट में लिखा है कि इन सब के बीच उनके स्वतंत्रता सेनानी दादा अमरनाथ विद्यालंकार का अपमान ना किया जाए। आइए जानें क्या है पूरा विवाद?

राहुल के सर्मथन में क्या कहा था रो खन्ना ने?

राहुल के सर्मथन में क्या कहा था रो खन्ना ने?

रो खन्ना ने 2019 के मानहानि मामले में राहुल गांधी को दोषी ठहराए जाने और लोकसभा से उनकी निलंबन की निंदा की थी। राहुल के सर्मथन में रो खन्ना ने पीएम नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए लिखा था, ''संसद से राहुल गांधी का निष्कासन गांधीवादी दर्शन और भारत के गहरे लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ गहरा विश्वासघात है। यह वह देश नहीं है, जिसके लिए मेरे दादाजी (अमरनाथ विद्यालंकार) ने जेल में सालों बिताए और अपनी कुर्बानी दी थी। नरेंद्र मोदीआपके पास भारतीय लोकतंत्र की खातिर इस फैसले को पलटने की ताकत है।''

राहुल का साथ देने के लिए ट्रोल हुए रो खन्ना

राहुल का साथ देने के लिए ट्रोल हुए रो खन्ना

राहुल गांधी का समर्थन करने पर कई लोगों ने रो खन्ना की आलोचना की। फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने रो खन्ना के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा, ''वैसे, क्या आपके दादाजी वह नहीं थे जिन्होंने आपातकाल पर इंदिरा गांधी का समर्थन किया था? हमेशा फासीवादी फैसलों के लिए खड़े रहे?''

रो खन्ना बोले, मेरे दादा जी को बदनाम मत कीजिए...

रो खन्ना बोले, मेरे दादा जी को बदनाम मत कीजिए...

आलोचनाओं को जवाब देते हुए 25 मार्च की रात ट्वीट करते हुए लिखा, ''लाला लाजपत राय के लिए काम करने वाले मेरे दादाजी को बदनाम करते हुए लोगों को देखकर दुख होता है,उन्हें 31-32 और 41-45 में जेल हुई थी। उन्होंने इंदिरा गांधी को आपातकाल का विरोध करते हुए संसद छोड़ने के बाद दो पत्र लिखे थे। मुझ पर अटैक कीजिए। भारत के स्वतंत्रता सेनानियों पर हमला मत कीजिए। फैक्ट हमेशा मायने रखते हैं।

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