ताइवान पर कब्जा जमाने की फिराक में चीन, पार्टी के 100वें बर्थडे पर जिनपिंग ने दिया संदेश

बीजिंग, 1 जुलाई। चीन में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के 100 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम को राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी ताकत दिखाने और लोकप्रियता को बढ़ाने का जरिया बना लिया है। शी जिनपिंग ने कार्यक्रम के दौरान स्वशासित ताइवार को मुख्य भूमि से मिलाने का संकल्प लिया और द्वीप के आजादी हासिल करने के किसी भी प्रयास को तोड़ देने की कसम खाई।

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    ताइवान का अपना हिस्सा मानता है चीन

    ताइवान का अपना हिस्सा मानता है चीन

    लोकतांत्रित रूप से शासत कर रहे ताइवान को चीन अपना क्षेत्र मानता है और दावा करता है कि एक दिन वह इसे पूर्ण रूप से मिला लेगा। चीन नियमित रूप से ताइवान जलडमरूमध्य में लड़ाकू जेट और बमवर्षक विमान भेजता रहता है। पिछले साल के आखिर से ताइवान भी चीन को आंख दिखाने लगा है और उसने कई बार चीनी फाइटर जेट के पीछे अपने विमान भेजने लगा है।

    जिनपिंग ने तियानमेन चौक पर आयोजित कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा "ताइवान के मसले को हल करना और मातृभूमि के पूर्ण एकीकरण को साकार करना चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का प्रमुख एजेंडा और सभी चीनी लोगों की आम आकांक्षा है।"

    ताइवान की आजादी को लेकर दी धमकी

    ताइवान की आजादी को लेकर दी धमकी

    जिनपिंग ने शांतिपूर्ण पुनर्मिलन की प्रक्रिया का आह्वान करते हुए कहा ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों किनारों पर हमवतन चीन के सभी बेटे और बेटियों को एक साथ काम करते हुए एकजुटता के साथ आगे बढ़ना चाहिए और 'फ्री ताइवान' की किसी भी साजिश को दृढ़ता से तोड़ना चाहिए।"

    अपने शांतिपूर्ण प्रयास की हवा जिनपिंग ने तब निकाल दी जब उन्होंने लगभग धमकी देने वाले अंदाज में कहा कि "चीनी लोगों के दृढ़ संकल्प, दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने की दुर्जेय क्षमता को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए।"

    जिनपिंग के बयान के बाद ताइवान की तरफ से जवाबी बयान आने की उम्मीद की जा रही है। रॉयटर्स की खबर के मुताबिक ताइवान जवाब देने की तैयारी कर रहा है।

    क्या है चीन-ताइवान विवाद?

    क्या है चीन-ताइवान विवाद?

    चीन पर कम्युनिस्ट पार्टी के शासन से पहले ताइवान चीन का ही हिस्सा हुआ करता है। जब 1949 के गृह युद्ध में माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी ने जीत हासिल कर ली तो पराजित सरकार ताइवान भाग गई और वहां पर शासन करने लगी। बाद में कम्युनिस्ट पार्टी के शासन वाले मुख्य भूमि को पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली वहीं रिपब्लिक ऑफ चाइना के रूप में ताइवान में अलग शासन चलता रहा। धीरे-धीरे चीन के दबाव में सभी देशों ने औपचारिक संबंध तोड़ लिए। वर्तमान में ताइवान को आधिकारिक देश के रूप में मान्यता नहीं प्राप्त है। हालांकि अमेरिका समेत कई देशों ने अपने वाणिज्यिक कार्यालय खोल रखे हैं जिसके जरिए रिश्ते बहाल रखे गए हैं।

    चीन लंबे समय से ताइवान को पूर्ण रूप से मिलाने की कोशिश करता रहा है लेकिन अधिकांश ताइवानियों ने चीन के शासन में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। ताइवान की सरकार का कहना है कि केवल ताइवान के लोग ही अपना भविष्य तय कर सकते हैं। साई इंग-वेन के ताइवान का राष्ट्रपति बनने के बाद द्वीप पर आजादी की मांग तेज हुई है। चीन का मानना ​​है कि ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन स्वतंत्रता की घोषणा करने पर तुले अलगाववादी हैं।

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