Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Republic Day 2026: पहली बार सेना ने पहली बार दिखाए ‘शक्तिबाण’ और ‘दिव्यास्त्र’ ड्रोन, जानें खासियत

Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में भारतीय सेना ने अपने उन्नत युद्ध सहायक सिस्टम 'शक्तिबाण' और 'दिव्यास्त्र' को पहली बार सार्वजनिक रूप से पेश किया। यह कदम सेना की उस नई रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत युद्ध रणनीति में लेटेस्ट टेक्नोलॉजी को अपनाया जा रहा है। इसका मकसद 50 से 500 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद टारगेट को हिट की क्षमता में अब तक रहे अंतर को खत्म करना है।

तोपखाना शाखा की तेज़ तकनीकी छलांग

भारतीय सेना की सबसे तेज़ी से विकसित हो रही तोपखाना शाखा ने 'शक्तिबाण' और 'दिव्यास्त्र' के ज़रिए अगली पीढ़ी के ऑटोनोमस वॉर वेपन्स का प्रदर्शन किया। ये सिस्टम हाई मोबिलिटी व्हीकल (HMV 6x6) पर लगाए गए हैं और पूरी तरह स्वदेशी सोच को दर्शाते हैं। इनमें उन्नत इंटीग्रेटेड सर्विलांस और टार्गेटिंग सिस्टम लगे हैं, जो टेक्नोलॉजी-ड्रिवन युद्ध संचालन की दिशा में बड़ा कदम हैं।

Republic Day 2026

ड्रोन टेक्नोलॉजी से बदलेगा युद्ध का तरीका

इन प्लेटफॉर्म्स में स्वार्म ड्रोन, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी हाइब्रिड UAV 'जोल्ट (ZOLT)' को शामिल किया गया है। 'जोल्ट' का इस्तेमाल सामरिक टोही मिशन (रैकी करने और जासूसी करने वाले मिशन) और तोपखाने की फायरिंग को बेहद सटीक बनाने के लिए किया जाता है। यह ड्रोन युद्धक्षेत्र की रियल-टाइम पिक्चर देने में अहम भूमिका निभाता है।

लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता

इन सिस्टम्स की स्ट्राइक ताकत को 'हारोप', 'मिनी हार्पी', 'पीसकीपर', 'ATS' (मीडियम और एक्सटेंडेड रेंज) और 'स्काई स्ट्राइकर' जैसे लोटेरिंग म्यूनिशन्स और मज़बूत बनाते हैं। ये सिस्टम 1,000 किलोमीटर तक की दूरी पर ड्रोन लॉन्च कर गहरे युद्धक्षेत्र में "सी-एंड-स्ट्राइक" मिशन को अंजाम देने में सक्षम हैं।

किसने किया 'शक्तिबाण' और 'दिव्यास्त्र' का नेतृत्व

'शक्तिबाण' वाहन का नेतृत्व 161 मीडियम रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट रमन मिश्रा ने किया, जबकि 'दिव्यास्त्र' वाहन की कमान उसी रेजिमेंट के सूबेदार किरण मेदार के पास थी। यह रेजिमेंट 'बसंथर रिवर' के नाम से जानी जाती है और इसका युद्धघोष है - "सेकंड टू नन"।

कर्तव्य पथ पर दिखी ड्रोन शक्ति

गणतंत्र दिवस परेड के दौरान भारतीय सेना ने स्वदेशी मानवरहित सिस्टम, मिसाइल प्लेटफॉर्म और आधुनिक तोपों की एक पूरी श्रृंखला पेश की। 'ड्रोन शक्ति' सेगमेंट में कैप्टन दिब्योजीत मुखर्जी के नेतृत्व में एक लॉरी शामिल थी, जिसने सेना की ऑटोनॉमस और अनमैन्ड क्षमताओं को दर्शाया।

आत्मनिर्भरता की दिशा में EME का योगदान

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (EME) कोर द्वारा विकसित 'ड्रोन शक्ति' सेना नेतृत्व की आत्मनिर्भर भारत की सोच को दर्शाती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के ज़रिए यह सिस्टम युद्धक्षेत्र की परिभाषा बदल रहा है।

स्वदेशी ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम

'ड्रोन शक्ति' में सेना की अलग-अलग कमानों द्वारा विकसित स्वदेशी प्लेटफॉर्म दिखाए गए, जिनमें खड्ग चक्र, शक्ति प्रहार, नवास्त्र, बाज़, सुदर्शन, ध्रुव प्रहार और अदृश्यम शामिल थे। इसके साथ 'प्रबल' नाम की काउंटर-ड्रोन प्रणाली भी दिखाई गई, जो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को दर्शाती है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+