रिपोर्टर ने तालिबान के लड़ाकों से महिलाओं को लेकर पूछा ये सवाल, वायरल VIDEO में देखें क्या मिला जवाब
काबुल, 18 अगस्त। तालिबान ने बंदूक के दम पर अफगानिस्तान पर अधिग्रहण करते हुए रविवार को कब्जा जमा दिया है। अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान आतंक से बचाने के लिए वहां के लोग देश छोड़ कर भागने के प्रयास में जुटे हुए हैं। तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान की लड़कियां और महिलाएं सबसे अधिक असुरक्षित हैं।अफगानिस्तान में तालिबान के आतंकियों के खौफ के साए के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें एक महिला रिपोर्टर ने तालिबान के लड़ाकों से अफगानिस्तान की महिलाओं के बारे में एक सवाल पूछा जिसे सुनकर उन्होंने ऐसा रिएक्शन दिया कि उनकी फितरत का अंदाजा आप भी लगा सकते हैं।

इस वीडियो में बुर्के में पूरी ढकी हुई महिला रिपोर्टर ने महिलाओं को राजनीति में आने और उन्हें वोट करने के सवाल किया जिसे सुनकर तालिबान के ये लड़ाके माखौल उड़ाते हुए जोर से हंसते हुए नजर आ रहे हैं। हालांकि ये जो वीडियो सामने आया है वो अभी का नहीं है खबरों के अनुसार ये पुराना वीडियो है। रिपोर्ट के अनुसार ये वीडियो उस समय का है जब तालिबानियों ने 1996 और 2001 के बीच अफगानिस्तान में शासन किया।
महिला रिपोर्टर ने तालिबान के लड़कों से पूछा ये सवाल
क्या महिला नेताओं को अफगानी वोट कर सकेंगे? क्या उन्हें भी चुनाव लड़ने की आजादी मिलेगी? इस पर वह हंस पड़े और कहा कि कैमरा हमारे सामने से हटाओ।
बताया जा रहा है कि ये डॉक्यूमेंट्री के एपिसोड की एक छोटी सी क्लिप है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और लोग समझ रहे हैं कि ये अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद की है।
Taliban collapses with laughter as journalist asks if they would be willing to accept democratic governance that voted in female politicians - and then tells camera to stop filming. “It made me laugh” he says.pic.twitter.com/km0s1Lkzx5
— David Patrikarakos (@dpatrikarakos) August 17, 2021
बता दे बंदूक के दम पर कई दिनों तक ताबड़तोड़ गोलियां चलाते हुए तालिबान ने अफगानिस्तान पर 15 अगस्त को अपना पूरा कब्जा जमा लिया था, जिस दिन तालिबानियों ने काबुल पर कब्जा जमाया और पूरे अफगास्तिान पर अधिग्रहण कर लिया।
हालांकि मंगलवार को मीडिया में दिए बयान में तालिबान नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि तालिबान पिछले 20 वर्षों में बदल गया है। उन्होंने कहा महिलाओं को इस्लामी कानून के तहत स्वतंत्रता होगी, यह संकेत दिया गया है कि समूह बुर्का को देश में अनिवार्य नहीं करेगा, लेकिन हिजाब पहनना पड़ेगा।
गौरतलब है कि 1996-2001 के शासनकाल के दौरान लड़कियों की पढ़ाई लिखाई बंद कर दी गई थी और महिलाओं के घर से बाहर निकल कर काम करने और अकेले यात्रा करने पर रोक लगा दी थी। वे किसी पुरुष के साथ के बिना अकेले बाहर कहीं आ जा नहीं सकती थीं। खुले स्थानों पर सिर से लेकर पैर तक उन्हें बुर्का पहलकर ही आना-जाना पढ़ता था।












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