महिला ने इस बीमारी का इलाज कराने से किया इनकार, कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने किया अरेस्ट
अमेरिका में महिला ने जब संक्रमण फैलाने वाली बीमारी का इलाज कराने से इनकार किया तो कोर्ट ने उसे गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया। महिला को गिरफ्तार करके आइसोलेट कर दिया गया है।

अमेरिका के वॉशिंगटन में महिला को ट्यूबरकुलोसिस का इलाज कराने से इनकार करने की वजह से गिरफ्तार कर लिया गया है। दरअसल कोर्ट ने आदेश दिया था कि संक्रमित बीमारी से ग्रसित महिला या तो खुद को आइसोलेट करे या फिर इलाज कराए। लेकिन कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने की वजह से महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है।
महिला के नाम को स्वास्थ्य अधिकारियों ने सार्वजनिक नहीं किया है और कोर्ट में महिला को उसके नाम से संबोधित नहीं किया गया।
बयान जारी करके टैकोमा पिएयर काउंटी हेल्थ डिपार्टमेंट की ओर से कहा गया है कि महिला को पियर्स काउंटी जेल ले जाया गया है, जहां वह एक कमरे में रहेंगी। यह कमरा खासकर आइसोलेशन, टेस्टिंग और इलाज के लिए तैयार किया गया है। हमे उम्मीद है कि महिला जीवन रक्षा के लिए इलाज कराएगी।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जनवरी 2022 में महिला को खुद को आइसोलेट करने के लिए गया था। अधिकारी महिला और उसके परिवार के साथ करीब से काम कर रहे थे, पिछले एक साल से महिला को समझाने की कोशिश कर रहे थे कि वह अपना इलाज करा लें,लेकिन महिला इससे इनकार कर रही थी।
मार्च 2023 में काउंटी को इजाजत दी गई कि वह महिला को जबरन हिरासत में लें। पिछले 20 साल के इतिहास में यह ऐसा तीसरा मामला है जब कोर्ट ने किसी संक्रमित बीमारी से ग्रसित व्यक्ति, जिसने इलाज कराने से इनकार कर दिया, उसे जबरन हिरासत में लेने का आदेश दिया है।
हालांकि अभी यह साफ नहीं हो सका है कि आखिर क्यों महिला इलाज कराने या खुद को आइसोलेट करने से इनकार कर रही थी। लेकिन महिला की वकील सारा टॉफ्लेमायर ने दावा किया है कि महिला इसलिए इनकार कर रही है क्योंकि उसे समझ नहीं आ रहा है कि उसे क्या हो रहा है।
अमेरिकी कानून के अनुसार स्वास्थ्य विभाग को ऐसे मरीजों का इलाज करने की जरूरत होती है, ताकि एक्टिव मरीजों का इलाज हो सके और इसकी जानकारी देनी होती है।
ट्यूबरकुलोसिस बीमारी की बात करें तो यह एक संक्रमण फैलाने वाली बीमारी है, यह किसी भी व्यक्ति को हो सकती है जो बीमार व्यक्ति केसंपर्क में आता है। परिवार के सदस्य, दोस्त किसी के भी बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने से उसे यह बीमारी हो सकती है। यह बीमारी जानलेवा होती है। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल के अनुसार इस बीमारी का इलाज तकरीबन 9 महीने तक चलता है।












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