स्वीडन में कुरान जलाने की घटना के बीच पड़ोसी मुल्क पोलैंड में मुसलमानों से जुड़ी हकीकत जानिए

नई दिल्ली- स्वीडन के दक्षिण-पूर्वी शहर मालमो में फार-राइट ऐक्टिवस्ट की ओर से कुरान जलाने की घटना के बाद भड़के दंगों के बीच मुस्लिमों के प्रति रवैए को लेकर पड़ोसी मुल्क पोलैंड फिर से चर्चा में है। पोलैंड में पिछले साल लॉ एंड जस्टिस पार्टी मुस्लिम शरणार्थी विरोधी एजेंडे की बदौलत ही सत्ता में आई थी। उसके एक सांसद ने एकबार फिर ताल ठोककर कहा है कि उनके देश में एक भी मुस्लिम शरणार्थियों को एंट्री नहीं मिलेगी, चाहे दुनिया कुछ भी कहती रह जाए। गौरलतब है कि स्वीडन में एक वाक्ये के बाद शुक्रवार को दंगा भड़क गया था, जिसमें कई पुलिस वालों को चोटे आई हैं। जिस जगह यह घटना घटी वहां अप्रवासियों की अच्छी-खासी तादाद है।

पोलैंड में मस्जिद निर्माण पर पाबंदी को लेकर दावे

पोलैंड में मस्जिद निर्माण पर पाबंदी को लेकर दावे

ऐसा दावा किया जाता रहा है कि पोलैंड ने अपने मुल्क में तब तक किसी मस्जिद के निर्माण पर रोक लगा रखी है, जब तक कि मुस्लिम देश सऊदी अरब में चर्च बनाने की इजाजत नहीं मिलती। दरअसल, सऊदी अरब में गैर-मुस्लिमों के सार्वजनिक पूजा घरों और सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक आयोजनों से जुड़ी पाबंदियों के दावे को लेकर पोलैंड के सोशल मीडिया में यह बातें जंगल की आग की तरह फैलती रही हैं कि जब तक सऊदी अरब में बाइबल और चर्चों को इजाजत नहीं दी जाती, ना तो पौलैंड में मुस्लिम स्वीकार किए जाएंगे और ना ही मस्जिद का निर्माण ही। दावा यहां तक कर दिया जाता है कि असल में पौलैंड में इस तरह का कानून बन चुका है कि वहां सऊदी अरब में चर्च बनने तक मस्जिद बनाने पर रोक लगी हुई है।

पोलैंड में मस्जिद निर्माण पर पाबंदी की हकीकत

पोलैंड में मस्जिद निर्माण पर पाबंदी की हकीकत

दरअसल, ये सच्चाई है कि कैथोलिक-ईसाई बहुल पोलैंड में बीते कई वर्षों से मस्जिद निर्माण का भारी विरोध होता रहा है। बता दें कि पोलैंड में मुस्लिमों की आबादी 15,000 से 30,000 के बीच है, जिनमें से कई चेचन्या से आए अप्रवासी हैं। जबकि, करीब 3.80 करोड़ की आबादी वाले पोलैंड के 90 फीसदी से ज्यादा लोगों ने खुद को कैथोलिक क्रिश्चियन घोषित कर रखा है। वैसे तथ्य ये है कि पोलैंड में भी मस्जिदें हैं, लेकिन जहां तक सवाल है कि वहां मस्जिद नहीं बनाए जाने जैसा कोई कानून है तो रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसी कोई तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

मुसलमानों को लेकर सत्ताधारी दल का नजरिया

मुसलमानों को लेकर सत्ताधारी दल का नजरिया

जानकारी के मुताबिक पोलैंड की सोशल मीडिया पर मुस्लिम विरोधी अफवाहों को हवा वहां की कथित'अतिरुढ़ीवादी' लॉ एंड जस्टिस पार्टी के सांसद डोमिनिक टार्जीस्की के नजरियों से मिलता रहा है। टार्जीस्की गैर-ईसाई शर्णार्थियों के पोलैंड में घुसने देने के मुखर-विरोधी होने के चलते सुर्खियों में रहते हैं। एकबार उन्होंने कहा था, 'हम नहीं चाहते कि पोलैंड पर मुस्लिम,बौद्ध या कोई कब्जा कर ले......और कोई हमें मुसलमान, बौद्ध, ज्यादा संख्या में नास्तिकों को लेने के लिए जोर भी नहीं दे सकता....मेरे लिए बहुसांस्कृतिक समाज का ना तो कोई मोल है और ना ही कोई खूबी। ईसाई संस्कृति, रोमन लॉ, यूनानी दार्शनिक, हमारे लिए यही खूबियां हैं।'

इसीलिए आंतकी हमलों से सुरक्षित है पोलैंड- डोमिनिक टार्जीस्की

इसीलिए आंतकी हमलों से सुरक्षित है पोलैंड- डोमिनिक टार्जीस्की

स्वीडन में भड़के दंगों के बीच एक टीवी चैनल को दिया गया डोमिनिक टार्जीस्की का इंटरव्यू फिर से चर्चा में है। उन्होंने दो टूक कह दिया कि दुनियाभर के मुस्लिम राष्ट्र पोलैंड पर इस्लामोफोबिया का आरोप मढ़ते हैं, लेकिन यह देश आज इसलिए सुरक्षित है क्योंकि, वहां मुस्लिम शरणार्थियों का प्रवेश निषेध है। वायरल हो रहे इस टीवी चैट में जब ऐंकर ने उनसे सवाल किया कि पोलैंड में कितने शरणार्थियों को जगह दी गई है तो उन्होंने कहा कि अगर आप अवैध मुस्लिम प्रवासियों के बारे में सवाल कर रही हैं तो 'शून्य'। उनका कहना है कि उनकी सरकार को दुनिया की परवाह नहीं है और हमने मुसलमानों को कबूल नहीं किया, जैसा कि जनता से वादा किया था, इसीलिए आज पोलैंड सुरक्षित है और वहां एक भी आतंकी हमले नहीं हुए। उन्होंने कहा कि हमें कुछ भी कहा जाए लेकिन हमें अपने मुल्कि और परिवार की चिंता है।

स्वीडन में कुरान जलाने पर भड़के दंगे

स्वीडन में कुरान जलाने पर भड़के दंगे

गौरतलब है कि पोलैंड के पड़ोसी देश स्वीडन में कुरान जलाने की घटना को लेकर भड़के दंगे के चलते हालात तनावपूर्ण हैं। शुक्रवार की रात दंगाइयों ने पुलिस और राहतकर्मियों पर टायर और दूसरी जलती हुई चीजें फेंकीं, जिसमें कई पुलिस अधिकारी जख्मी हो गए। पुलिस ने करीब 15 दंगाइयों को पकड़ा है। बवाल तब शुरू हुआ जब एक दक्षिणपंथी नेता की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने अप्रवासियों के इलाके के पास कुरान को जला दिया। इसी के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए और पुलिस पर पत्थरों से हमले शुरू कर दिए और आगजनी की। दंगाइयों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े।(कुछ तस्वीरें प्रतीकात्मक)

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