Aircraft Carrier, Rafale M, लड़ाकू विमान.. नई सरकार बनाएगी दुश्मनों के लिए विनाशक हथियार, इन डीलों को मंजूरी!
Defence News: भारत में लोकसभा चुनाव एक जून को खत्म हो जाएंगे और चुनाव परिणाम 4 जून को घोषित किए जाएंगे। जो भी नई सरकार बनेगी, उसके लिए डिफेंस सेक्टर के लिए कई अहम समझौतों को मंजूरी देना काफी अहम होगा, क्योंकि भारत के दुश्मन पूरी ताकत के साथ तैयारी कर रहे हैं।
भारत सरकार के आगे जो डिफेंस सौदे हैं, उस लिस्ट में सबसे ऊपर राफेल मरीन फाइटर जेट खरीदने का मल्टी-बिलियन डॉलर का सौदा है, जिसके तहत भारत ने फ्रांस से 26 राफेल मरीन खरीदने का फैसला किया है।

फ्रांस के साथ राफेल मरीन सौदा
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, फ्रांस डिफेंस मिनिस्ट्री के के कई उच्चाधिकारियों की टीम, राफेल बनाने वाली डसॉल्ट एविएशन के उच्चाधिकारी और थेल्स के अधिकारियों वाली एक उच्च-स्तरीय फ्रांसीसी टीम, भारतीय रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों, रक्षा अधिग्रहण विंग के सदस्यों और भारतीय नौसेना के अधिकारियों के साथ मिलकर एयरक्राफ्ट कैरियर से संचालित होने वाले राफेल लड़ाकू जेट के अनुबंध पर बातचीत करेगी।
माना जा रहा है, भारत और फ्रांसीसी अधिकारियों के बीच यह बातचीत 30 मई को शुरू होगी।
डसॉल्ट एविएशन के राफेल-एम (मरीन) ने भारतीय वायु सेना के बेड़े के साथ अंतर-संचालन के आधार पर बोइंग के एफ/ए-18 ई/एफ सुपर हॉर्नेट्स को इस सौदे में पीछे छोड़ दिया है। भारतीय वायुसेना के लिए सरकार ने पहले ही राफेल फाइटर जेट खरीद लिए हैं, लिहाजा राफेल-एम, भारतीय नौसेना के लिए एक बेहतरीन लड़ाकू विमान साबित हो सकता है।
माना जा रहा है, कि भारत और फ्रांस के बीच ये डील 4 अरब यूरो की सरकार-से-सरकार सौदे के माध्यम से होगी। इस सौदे पर बातचीत काफी तेजी से चल रही थी, लेकिन चुनाव की वजह से बातचीत धीमी पड़ गई है और नई सरकार के गठन के बाद ये बातचीत फिर से रफ्तार पकड़ लेगी।
ऐसे संकेत मिले हैं, कि भारतीय नौसेना राफेल-एम से रूसी मिग-29Ks को बदलने वाली है, जिसे 2010 में नौसेना में शामिल किया गया था। राफेल एम, भारत के दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य से संचालित होगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर सौदा तय हो जाता है, तो इस साल के अंत तक भारत सरकार इस डील के लिए बजट जारी कर देगी। दिसंबर 2023 में, फ्रांस ने भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर्स के लिए 26 राफेल मरीन जेट खरीदने के लिए भारत की निविदा पर अपना जवाब प्रस्तुत किया था। भारतीय पक्ष ने फ्रांसीसी वाणिज्यिक बोली का बहुत विस्तार से अध्ययन किया है और अब अनुबंध के लिए बेहतर शर्तों पर बातचीत शुरू की जाएगी।
राफेल एम को नौसेना के लिए चुना जाना, मोदी सरकार की राजनीतिक और रणनीतिक फैसला है। भारतीय नौसेना के लिए राफेल एम का सबसे बड़ा नुकसान यह है, कि इसमें ट्विन-सीटर वैरिएंट नहीं है।
यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है, कि "इंडियन एयरफोर्स पहले से ही ट्विन-सीटर वैरिएंट उड़ा रहा है। इसलिए, नौसेना के एविएटर के लिए सिंगल सीटर विमान को चुना गया है और नौसेना के पायलट, IAF ट्विन-सीटर राफेल के साथ ट्रेनिंग ले सकते हैं।"
फ्रांसीसी नौसेना भी अपने पायलटों के लिए इसी तरह की ट्रेनिंग का पालन करती है। और भारत में भी अभी तक यही प्रथा रही है, कि भारतीय नौसेना के पायलट शुरुआत में भारतीय वायुसेना के साथ ट्रेनिंग लेते हैं।
भारतीय अधिकारी ने कहा, "भारत लागत और रखरखाव रसद के मामले में बेहतर सौदे पर बातचीत कर सकता है।" फ्रांसीसी मिराज के रखरखाव के मामले में भारत का अनुभव शानदार रहा है। भारतीय नौसेना को कम से कम 57 लड़ाकू विमानों की जरूरत है, लिहाजा राफेल के साथ होने वाले एक बेहतरीन सौदा, आगे के रास्ते को खोल सकता है।

स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने की तैयारी
राफेल-एम नई सरकार के लिए सेना के आधुनिकीकरण के मुख्य एजेंडा प्वाइंट्स में से एक होगा। लेकिन, हाल ही में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दूसरे स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर के निर्माण के लिए सरकार की मंजूरी देने की इच्छा की घोषणा की है।
भारत के पास फिलहाल दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जिनमें से INS विक्रांत को भारत में स्वदेशी टेक्नोलॉजी से बनाया गया है और लंबे वक्त से तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर को बनाने की मांग उठ रही थी।
हालांकि, पहले स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत के चालू होने के बाद से मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स बंद पड़ी हैं। और अभी भी माना जाता है, कि सरकार इस मुद्दे पर अपने पैर खींच रही है, लेकिन राजनाथ सिंह की घोषणा से एक उम्मीद बनी है। वहीं, भले ही नई सरकार दूसरे स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए अपनी मंजूरी दे दे, लेकिन यह पुराने हो चुके आईएनएस विक्रमादित्य उर्फ एडमिरल गोर्शकोव की जगह लेने के लिए ठीक समय पर तैयार हो जाएगा।
यूरेशियन टाइम्स ने एक रिटायर्ड नौसेना अधिकारी के हवाले से लिखा है, कि "अगर तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण शुरू नहीं होगा, तो भारत अपनी क्षमता को खो सकता है। एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण एक विशिष्ट तकनीक है, और हमें इसका लाभ उठाने की आवश्यकता है।"
यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, विभिन्न मौकों पर पूर्व भारतीय नौसेना प्रमुखों ने बड़े और परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोतों की मांग की है।
Medium-Role Fighter Aircraft की मांग
नई सरकार के लिए एक और बड़ा एजेंडा, भारतीय वायुसेना के लिए मीडियम-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) भूमिका वाले लड़ाकू विमान का अधिग्रहण और लड़ाकू स्क्वाड्रनों की लगातार घटती संख्या को रोकना है।
साल 2023 में, भारतीय वायुसेना में सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAMs) इकाइयों की संख्या, इसके बेड़े में लड़ाकू जेट स्क्वाड्रनों की संख्या से ज्यादा हो जाएगी, हालांकि यह डिजाइन के अनुसार नहीं है।
एयरफोर्स के घटते लड़ाकू जेट स्क्वाड्रन को लेकर डिफेंस एक्सपर्ट्स लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं। 2023 में, भारतीय वायुसेना के एक प्रतिनिधि ने रक्षा पर संसदीय स्थायी समिति को बताया था, कि एयरफोर्स के पास 42 स्क्वाड्रन होने चाहिए, लेकिन भारतीय वायुसेना के पास अभी सिर्फ 31 लड़ाकू जेट स्क्वाड्रन ही हैं।
नए लड़ाकू जेट खरीदने का भारतीय वायुसेना का प्रस्ताव लंबे समय से सरकारी टेबल पर पड़ा है। वर्षों तक इंतजार करने के बावजूद, नये लड़ाकू विमानों के लिए सरकार की मंजूरी अभी तक नहीं मिली है।
भारतीय वायुसेना एक रिटायर्ड अधिकारी ने यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा है, कि "भारतीय वायुसेना के लिए मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट नई सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि लड़ाकू स्क्वाड्रनों की घटती संख्या को तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।"
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि "थियेटरीकरण और वायु रक्षा कमान की स्थापना" कुछ प्रमुख सुधार हैं जिन्हें जल्द से जल्द फाइनल करने की जरूरत है।












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