Quetta Blast: क्वेटा धमाके के बाद कांप उठा इस्लामाबाद! आतंकियों से निपटने के लिए बनाई जा रही है 'सीक्रेट' फौज

Quetta Blast: बलूचिस्तान की राजधानी Quetta में हुए बड़े आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान की Shehbaz Sharif सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। चीनी इंजीनियरों और बड़े बांध-विद्युत प्रोजेक्ट्स पर लगातार बढ़ते हमलों ने इस्लामाबाद की चिंता बढ़ा दी है।

अब पाकिस्तान सरकार ने "वापदा सुरक्षा बल" नाम से एक नई स्पेशल फोर्स बनाने का फैसला लिया है, जिसका मकसद पानी और बिजली से जुड़े अहम प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा करना होगा। खास बात ये है कि चीन की तरफ से लगातार दबाव और चेतावनी के बाद इस फैसले को तेजी से आगे बढ़ाया गया है।

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क्वेटा हमले ने पाकिस्तान को हिला दिया

Baloch Liberation Army ने क्वेटा में रेलवे फाटक के पास सैनिकों को ले जा रही ट्रेन को निशाना बनाया। विस्फोटकों से भरी कार ट्रेन से टकराई और जोरदार धमाका हुआ। पाकिस्तान के मुताबिक करीब 30 सैनिक और उनके परिवार वाले मारे गए, जबकि बीएलए ने इससे कहीं ज्यादा मौतों का दावा किया है। इस हमले के बाद पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल उठने लगे हैं। खासकर बलूचिस्तान में हालात लगातार बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं।

चीन के दबाव में बना नया सुरक्षा प्लान

China लंबे समय से पाकिस्तान पर अपने नागरिकों की सुरक्षा बढ़ाने का दबाव डाल रहा है। दासू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर पहले हुए आतंकी हमलों में कई चीनी इंजीनियर मारे गए थे। इसके बाद चीन ने साफ कहा था कि अगर सुरक्षा नहीं मिली तो फंडिंग और निवेश पर असर पड़ सकता है। अब पाकिस्तान ने "वापदा सुरक्षा बल अधिनियम 2026" लाकर अलग सुरक्षा फोर्स बनाने का फैसला किया है ताकि चीन का भरोसा दोबारा जीता जा सके।

CPEC प्रोजेक्ट्स पर पहले से सेना की तैनाती

China-Pakistan Economic Corridor की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान सेना की स्पेशल सिक्योरिटी डिवीजनों को पहले से लगाया गया है। ये फोर्स बलूचिस्तान से लेकर गिलगित-बाल्टिस्तान तक चीनी प्रोजेक्ट्स की निगरानी करती है। लेकिन Wapda के कई प्रोजेक्ट्स इस सुरक्षा दायरे में नहीं आते थे। दासू हमले के बाद पाकिस्तान को एहसास हुआ कि सिर्फ सेना की मौजूदा व्यवस्था काफी नहीं है। इसी वजह से अब अलग सुरक्षा बल तैयार किया जा रहा है।

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हमलों से बढ़ी लागत और रुके प्रोजेक्ट्स

दासू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर हमलों के बाद चीन ने करीब एक साल तक काम रोक दिया था। सुरक्षा और मुआवजे को लेकर लंबी बातचीत चली, तब जाकर काम दोबारा शुरू हो पाया। इस देरी की वजह से प्रोजेक्ट की लागत भी काफी बढ़ गई। पाकिस्तान सरकार को डर है कि अगर ऐसे हमले जारी रहे तो विदेशी निवेशक और कंपनियां देश छोड़ सकती हैं। इसलिए अब हर बड़े प्रोजेक्ट पर अतिरिक्त सुरक्षा देने की तैयारी हो रही है।

निवेश के लिए खतरे की घंटी बना पाकिस्तान

लगातार आतंकी हमलों ने पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा और चीनी कर्मचारियों पर हमलों ने दुनिया को संदेश दिया है कि वहां बड़े निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। चीन फिलहाल पाकिस्तान का सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार बना हुआ है, लेकिन सुरक्षा हालात खराब होने से दोनों देशों के रिश्तों पर भी असर पड़ सकता है। क्वेटा हमला पाकिस्तान के लिए सिर्फ सुरक्षा नहीं बल्कि आर्थिक संकट की चेतावनी भी माना जा रहा है।

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