कतर में इंडियन नेवी के पूर्व अधिकारियों पर सुनवाई आज, मृत्युदंड की आशंका, किस पनडुब्बी के लिए जासूसी का आरोप?
ये आठ भारतीय नागरिक नौसेना का पूर्व अधिकारी हैं, जो कतर के जाहिरा अल आलमी नाम की सुरक्षा कंपनी में काम कर रहे थे और कतर मीडिया ने कहा है, कि हाल ही में इन भारतीय नागरिकों को उनके परिजनों से मिलने की इजाजत दी गई थी।

Indian Navy Qatar: जासूसी के इल्जाम में पिछले साल सितंबर में कतर में गिरफ्तार किए गये इंडियन नेवी के आठ पूर्व अफसरों पर आज कतर में सुनवाई होने वाली है और मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, कि भारतीय नौसेना के इन पूर्व अधिकारियों को फांसी की सजा तक मिल सकती है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आठ भारतीय नागरिकों को, जिनका ताल्लुकात इंडियन नेवी से रहा है, उन्हें इजरायल की ओर से एक पनडुब्बी कार्यक्रम की जासूसी करने के आरोप में पिछले साल सितंबर महीने में कतर में गिरफ्तार किया गया था, जिनको लेकर आज सुनवाई होने वाली है।
कतर में गिरफ्तार नौसेना के पूर्व अधिकारियों के नाम कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर अमित नागपाल, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कमांडर सुगुनकर पाकला, कमांडर संजीव गुप्ता और नाविक रागेश हैं।
भारतीय, पाकिस्तानी, इजरायली और अरब मीडिया ऑउटलेट्स के मुताबिक, इन आठों भारतीयों को कतर में अकेले में रखा गया है और 3 मई यानि आज इनके खिलाफ कतर के एक अदालत में सुनवाई होने वाली है। वहीं, बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन कंपनी में ये आठों भारतीय काम करते थे, उनके परिजनों को उनसे मिलाने के लिए उनकी कंपनी ने टिकट, वीजा और ठहरने की व्यवस्था की थी।
क्या है पूरा मामला? समझिए
द ट्रिब्यून ने अपनी रिपोर्ट में बताया है, कि ये सभी आठों पूर्व अधिकारी, दाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टिंग सर्विसेज के वरिष्ठ कर्मचारी थे। ये कंपनी उच्च तकनीक वाली इतालवी निर्मित पनडुब्बियों को प्राप्त करने के उद्देश्य से एक कतरी कार्यक्रम पर सलाह देने वाली कंपनी थी। इस पनडुब्बी में रडार की पहचान से बचने की क्षमता है, लिहाजा कतर इस पनडुब्बी को खरीदने की प्लानिंग कर रहा था।
वहीं, पाकिस्तानी अखबार द न्यूज इंटरनेशनल ने पिछले हफ्ते खबर दी थी, कि अब इस कंपनी को कतर ने बंद करने का फैसला किया है। इस कंपनी में 75 भारतीय नागरिक काम कर रहे थे, जिनमें से ज्यादातर पूर्व नौसेना कर्मी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, कि सभी भारतीय कर्मचारियों को कहा गया है, कि उनका कामकाज 31 मई को खत्म हो रहा है।
नौसेना के इन पूर्व अधिकारियों पर आरोप है, कि इन्होंने कतर की पनडुब्बियों के निर्माण के संबंधित अहम और गोपनीय जानकारियां, इजरायल तक पहुंचाई। आधिकारिक भारतीय सूत्रों का हवाला देते हुए, एएनआई की रिपोर्ट है, कि "मामले को अब भारतीय एजेंसियों द्वारा उच्चतम संभव स्तर पर उठाया गया है, लेकिन कतरी सरकार ने इस मुद्दे पर भरोसा करने का कोई संकेत नहीं दिखाया है"।
सूत्रों ने समाचार एजेंसी को बताया, कि ऐसा शक है, कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों को "फंसाया" है।
इन आठ नौसेना के पूर्व अधिकारियों के अलावा, ओमान वायु सेना के पूर्व अधिकारी खमीस अल-अजमी सहित दो कतरियों के खिलाफ भी आरोप तय किए गए हैं, जो दाहरा ग्लोबल के सीईओ हैं। द ट्रिब्यून के अनुसार, कतर के अंतर्राष्ट्रीय सैन्य संचालन प्रमुख, मेजर जनरल तारिक खालिद अल ओबैदली, वो कतरी नागरिक हैं, उन पर भी जासूसी के आरोप लगाए गये हैं।
पनडुब्बी परियोजना क्या है?
कतर ने साल 2020 में इटली की एक जहाज निर्माण कंपनी Fincantieri SpA के साथ एक एमओयू साइन किया था। इस एमओयू के तहत इटली की कंपनी को कतर में पनडुब्बियों का निर्माण करना था। इस पनडुब्बी का नाम U212 है।
कतर अपने देश में एक विशालकाय नौसैनिक अड्डे के निर्माण कर रहा है और कतर ने इटली की कंपनी के साथ अपने सैन्य बेड़े के रखरखाव से जुड़ी एक बड़ी परियोजना के हिस्से के रूप में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया था। लेकिन, अब रिपोर्ट है कि कथित तौर पर समझौता ज्ञापन अभी तक लागू नहीं किया गया है।
कतर जिन पनडुब्बियों की मांग कर रहा है, वे कथित तौर पर U212 नियर फ्यूचर सबमरीन की एक स्मॉल वेरिएंच है, जो इटली में एक महत्वाकांक्षी पनडुब्बी परियोजना का हिस्सा है, जिसे एक जर्मन फर्म के सहयोग से बनाया गया है।
इज़राइल ने अभी तक इस मुद्दे पर आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन इजरायल की कोशिश हमेशा से मध्य पूर्व में सैन्य टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट को रोकने को लेकर रही है। क्योंकि इजरायल को डर रहता है, कि ऐसा होने पर उसे अमेरिकी सेना की मदद मिलती है, वो कम हो सकती है।
वहीं, अलजजीरा की रिपोर्ट में कहा गया है, कि भारत और पाकिस्तान भी इस पनडुब्बी में काफी गहरी दिलचस्पी रखते हैं, क्योंकि दोनों ही देश, एक दूसरे को सैन्य मामलों में बढ़त बनाने देना नहीं चाहते हैं।
पाकिस्तान पर क्यों है 'मुखबिरी' का शक?
पाकिस्तान की नौसेना पहले से ही इटली द्वारा निर्मित छोटी पनडुब्बियों का संचालन करती है और कतर के साथ पाकिस्तान के पहले से ही मजबूत संबंध रहे हैं। जबकि, भारत इस बात से चिंतित रहा है, कि पाकिस्तान संभावित रूप से नई पनडुब्बियों में इस्तेमाल किए गये स्टील्थ टेक्नोलॉजी को हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
स्टील्थ टेक्नोलॉजी ने आधुनिक हथियारों की दुनिया को ही बदल कर रख दिया है। अमेरिका, चीन और रूस स्टील्थ टेक्नोलॉजी को लेकर काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। वहीं फ्रांस और भारत भी स्टील्थ टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं। लिहाजा, पाकिस्तान नहीं चाहता, कि भारत पनडुब्बियों में स्टील्थ टेक्नोलॉजी को लेकर बढ़त बनाए।
भारत की प्रतिक्रिया क्या है?
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने इस मामले को काफी संवेदनशील माना है और भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने पिछले दिनों एक बयान में कहा था, कि 'हम कतरी अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। दोहा में हमारा दूतावास परिवारों के संपर्क में बना हुआ है। अगली सुनवाई मई की शुरुआत में है। हम यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि उस सुनवाई के संबंध में क्या किया जा सकता है।
कानूनी खर्चों के भुगतान के लिए भविष्य में कोई वेतन नहीं होने के कारण, विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह "इन भारतीयों की सहायता के लिए सभी प्रयास" कर रहा है।
बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है, कि अगर इन लोगों के खिलाफ कतर में जासूसी के आरोप तय किए जाते हैं, तो फिर इन कर्मचारियों को फांसी की सजा तक दी जा सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कतर सरकार ने अभी भी भारत सरकार से इन पूर्व नौसेना के अधिकारियों को लेकर ज्यादा जानकारियां साझा नहीं की है ना ही, कतर की तरफ से आधिकारिक तौर पर भारत को बताया गया है, कि नौसेना के इन पूर्व अधिकारियों पर क्या आरोप लगाए गये हैं।
बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है, कि इस बात की उम्मीद है, कि 3 मई को होने वाले सुनवाई से पहले, कतर नौसेना के पूर्व अधिकारियों को लेकर उनके परिजनों को विस्तार से जानकारी दे। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि इन पूर्व अधिकारियों पर कुछ सामान्य, तो कई बेहद गंभीर किस्म के आरोप लगाए गये हैं।












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