यूक्रेन युद्ध के बीच पुतिन ने प्रिंस सलमान को दी चेतावनी, जानिए क्यों सऊदी अरब से गुस्साए रूसी राष्ट्रपति?

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की चेतावनी से इतर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने रूस को मध्यस्थता का ऑफर दिया है।

मॉस्को/रियाद, मार्च 04: यूक्रेन में जंग का ऐलान कर चौतरफा फंसे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अब सऊदी अरब को जमकर धमकाया है और सऊदी अरब क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को गंभीर चेतावनी जारी की है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को वैश्विक ऊर्जा मुद्दों का राजनीतिकरण करने के खिलाफ चेतावनी दी है। जिसके बाद सऊदी अरब और रूस के बीच संबंध खराब होने के कयास लगाए जा रहे हैं।

रूस ने सऊदी अरब को दी चेतावनी

रूस ने सऊदी अरब को दी चेतावनी

पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन 'के वास्तविक' नेता सऊदी अरब ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को कम करने में मदद करने के लिए और अधिक तेल उत्पादन करने के अमेरिकी अनुरोध को खारिज कर दिया है। यूक्रेन युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 116 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया है कि, सउदी अरब और अन्य लोगों के साथ उच्च स्तरीय वार्ता का उद्देश्य एक-दूसरे के कार्यों में समन्वय करना और समझना था और रूस ने कहा है कि, सऊदी अरब वैश्विक ऊर्जा के मुद्दों का राजनीतिकरण कर रहा है।

पुतिन-प्रिंस सलमान में बातचीत

पुतिन-प्रिंस सलमान में बातचीत

रूसी समाचार एजेंसी TASS ने रूसी राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन के हवाले से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें क्रेमलिन की तरफ से कहा गया है कि, "कई पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए रूस-विरोधी प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए, व्लादिमीर पुतिन ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दों का राजनीतिकरण नहीं करने को कहा है।" आपको बता दें कि, कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए ओपेक प्लस नाम का एक संगठन है, जिसमें सऊदी अरब और रूस प्रमुख देश हैं, हालांकि, ओपेक के फैसलों पर सऊदी अरब का प्रभाव काफी ज्यादा रहता है।

क्या चाहता है सऊदी अरब?

क्या चाहता है सऊदी अरब?

कोरोना वायरस की पहली लहर के समय से ही सऊदी अरब कच्चे तेल का उत्पादन कम कर रहा है और इस वजह से उसका अपने ही पड़ोसी देश संयुक्त अरब अमीरात के साथ ही लंबे वक्त तक के लिए विवाद रहा। यूएई चाहता था कि, ओपेक की तरफ से उसे ज्यादा मात्रा में तेल उत्पादन की इजाजत मिले, ताकि वो अपने देश की बढ़ती जरूरतों को पूरा कर सके, लेकिन सऊदी अरब इसकी इजाजत नहीं दे रहा था, लेकिन बाद में जब दोनों देशों के बीच संबंध काफी खराब होने लगे, तब सऊदी अरब ने ज्यादा तेल उत्पादन की इजाजत दे दी थी। वहीं, मौजूदा हालात में सऊदी राज्य समाचार एजेंसी एसपीए ने कहा कि, क्राउन प्रिंस ने तेल बाजारों की स्थिरता बनाए रखने के लिए रूसी राष्ट्रपति के सामने सऊदी अरब की इच्छा को दोहराया और सऊदी के नेतृत्व वाले ओपेक और उसके रूस के नेतृत्व वाले सहयोगियों के बीच एक समझौते को बनाए रखने के महत्व पर ध्यान देने की बात कही है। वहीं, रूस को डर है, कि अगर अमेरिका के कहने पर सऊदी अरब प्रोडक्शन बढ़ाता है, तो फिर उसे काफी नुकसान होगा, लिहाजा रूस की तरफ से सऊदी अरब को राजनीति से बचने की सलाह दी गई है।

ऊर्जा संकट पर वैश्विक राजनीति

ऊर्जा संकट पर वैश्विक राजनीति

अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने रूस के खिलाफ कई अत्यंत सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। राष्ट्रपति पुतिन के साथ साथ रूस के कई अधिकारियों के खिलाफ भी प्रतिबंध लगा एगये हैं और जर्मनी ने रूस के साथ नॉर्ड स्ट्रीम 2 प्राकृतिक गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट को भी रद्द कर दिया है, जो रूस के लिए बहुत बड़ा झटका है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, अमेरिका कई महीनों से जर्मनी पर इस प्रोजेक्ट को रद्द करने के लिए प्रेशर बना रहा था और अब जाकर जर्मनी को या तो बहाना मिल गया है, या फिर अमेरिकी दबाव से बचने का सही अवसर...।

सऊदी से क्यों खफा हुए पुतिन ?

सऊदी से क्यों खफा हुए पुतिन ?

दरअसल, इस वक्त जब रूस को आर्थिक प्रतिबंधों में जकड़ लिया गया है, उस वक्त पुतिन को पता है कि, वो तेल और गैस का निर्यात करके ही संकट से कुछ हद तक बच सकते हैं। लेकिन, अगर सऊदी अरब के नेतृत्व में ओपेक संगठन तेल उत्पादन बढ़ा देता है, तो फिर ये रूस के लिए बड़ा झटका होगा। वहीं, खाड़ी देशों पर पुतिन का क्या प्रभाव है, इसका अंदाजा यूक्रेन युद्ध के वक्त ही अमेरिका को पता चल गया, जब संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल ने भी यूनाइटेड नेशंस में वोटिंग के दौरान गैर हाजिर रहना ज्यादा जरूरी समझा और अमेरिका के इतने करीबी होकर भी इजरायल ने रूस की आलोचना नहीं की है।

सऊदी अरब ने दिया ऑफर

सऊदी अरब ने दिया ऑफर

वहीं, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की चेतावनी से इतर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने रूस को मध्यस्थता का ऑफर दिया है। प्रिंस सलमान ने टेलीफोन पर रूसी राष्ट्रपति से बातचीत के दौरान यूक्रेन संकट पर सऊदी अरब का रूख रखा है और उन्हें बताया कि, सऊदी अरब उन प्रयासों का समर्थन करता है, जिनसे रूस और यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई का अंत हो सके। वहीं, पुतिन की चेतावनी के बीच सऊदी अरब की सरकारी न्यूज एजेंसी ने कहा कि, पुतिन से बातचीत के दौरान प्रिंस सलमान ने उन्हें 'यूक्रेन संकट के दौरान ऊर्जा बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव के दौरान तेल बाजार का संतुलन बनाए रखने के लिए सऊदी अरब के समर्थन को दोहराया है'। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, सऊदी अरब के लिए पुतिन की चेतावनी को दरकिनार करना काफी मुश्किल है, क्योंकि पुतिन के एक इशारे पर ईरान समर्थन हूती विद्रोही सऊदी अरब को काफी परेशान कर सकते हैं। वहीं, इजरायल भी हिजबुल्लाह से डरता है, लिहाजा खाड़ी देशों ने यूक्रेन संकट पर भारत के जैसे ही 'बीच का रास्ता' अपनाया है।

कूटनीतिक समधान पर जोर

कूटनीतिक समधान पर जोर

वहीं, सऊदी क्राउन प्रिंस ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी टेलीफोन पर बात की है और इस दौरान दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव को कम करने की अपील की है। सऊदी क्राउन प्रिंस ने यूक्रेनी राष्ट्रपति से भी मध्यस्थता करने की बात कही, ताकि दोनों देशों के बीच युद्धविराम की स्थिति जल्दी आ जाए। वहीं, सऊदी अरब क्राउन प्रिंस ने मानवीयता के नाते सऊदी अरब में आए यूक्रेनी पर्यटकों की वीजा अवधि बढ़ाने का फैसला किया है। आपको बता दें कि, 23 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र में बैठक के दौरान सऊदी अरब ने रूस की निंदा किए बगैर यूक्रेन संकट का शांतिपूर्वक समाधान करने की अपील की थी।

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