पाकिस्तान में चीन के खिलाफ फूटा गुस्सा, जानिए ड्रैगन का विरोध करने सड़क पर क्यों हजारों पाकिस्तानी?

बंदरगाह के निर्माण के साथ-साथ ग्वादर में चायनीज सिटी का भी निर्माण किया जा रहा है, जहां पर सिर्फ चीन के लोग रहेंगे और उस क्षेत्र में पाकिस्तान के लोगों का जाना निषेध है।

कराची, नवंबर 22: पाकिस्तान का शासन भले ही चीन को अपना 'सरकार' माने, लेकिन पाकिस्तान की जनता में चीन को लेकर भारी आक्रोश फैल चुका है। पाकिस्तान की सरकार भले ही इस बात से इनकार करे, लेकिन पाकिस्तान की जनता बहुत अच्छे से चीन के खतरनाक मंसूबों को जानती है, लिहाजा पाकिस्तान में चीन के खिलाफ भारी आक्रोश फूट पड़ा है और ड्रैगन के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर चुके हैं और भारी प्रदर्शन किए जा रहे हैं। पाकिस्तान के लोग चीन की तानाशाही से तंग आने लगे हैं।

चीन से परेशान हुए पाकिस्तानी

चीन से परेशान हुए पाकिस्तानी

पाकिस्तान के बंदरगाह वाले शहर ग्वादर में चीन के खिलाफ लोगों में भयानक गुस्सा फूट पड़ा है और लोग चीन के खिलाफ सड़कों पर भीषण प्रदर्शन कर रहे हैं। दरअसल, ग्वादर शहर में चीन की वजह से पाकिस्तान के लोगों को रोजमर्रा की जरूरी चीजों, जैसे पानी और बिजली के लिए भी तरसना पड़ता है। जो भी बिजली का उत्पादन होता है, वो चीन के लोगों और चीन की कंपनियों को दे दी जाती है। इसके अलावा पानी भी अपने नागरिकों को नहीं देकर पाकिस्तान का प्रशासन चीन के लोगों को दे देता है, जिससे लोग काफी तंग आ चुके हैं। दूसरी तरफ चीन के कामगारों की सुरक्षा के लिए ग्वादर में हर दूसरे कदम पर पुलिस चौकियों का निर्माण किया गया है और ग्वादर के लोगों की हर पुलिस चौकी पर काफी सख्ती के साथ जांच की जाती है, जिसने पाकिस्तान के लोगों को गुस्से में भर दिया है और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।

चीन ने कर रखा है नाक में दम

चीन ने कर रखा है नाक में दम

रिपोर्ट के मुताबिक, बंदरगाह के निर्माण के साथ-साथ ग्वादर में चायनीज सिटी का भी निर्माण किया जा रहा है, जहां पर सिर्फ चीन के लोग रहेंगे और उस क्षेत्र में पाकिस्तान के लोगों का जाना निषेध कर दिया गया है। जिसको लेकर पाकिस्तान के अशांत दक्षिण-पश्चिम बलूचिस्तान प्रांत के तटीय शहर ग्वादर में पोर्ट रोड पर वाई चौक के पास कई राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं, नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं, मछुआरों ने जमकर विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है और पिछले एक हफ्ते से ज्यादा वक्त से सैकड़ों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। पाकिस्तान के जंग अखबार ने रविवार को खबर दी है कि, प्रदर्शनकारी अनावश्यक सुरक्षा चौकियों को हटाने, पीने के पानी और बिजली की उपलब्धता, मकरान तट से मछली पकड़ने वाली बड़ी नौकाओं को हटाने और ईरान से लगी सीमा को पंजगुर से ग्वादर तक खोलने की मांग कर रहे हैं।

ग्वादर को अधिकार देने की मांग

ग्वादर को अधिकार देने की मांग

'ग्वादर को अधिकार दें' रैली के प्रमुख मौलाना हिदायत उर रहमान ने कहा कि, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती तब तक विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि, सरकार क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए गंभीर नहीं है। रहमान ने ग्वादर के लोगों की बुनियादी समस्याओं को हल करने में विफल रहने के लिए सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि, ''हम ग्वादर के अधिकारों की मांग कर रहे हैं, जिन्हें शासकों ने हड़प लिया है और लोग बुनियादी जरूरतों से भी महरूम हो गये हैं। मछुआरे अपनी आजीविका कमाने में सक्षम नहीं हैं क्योंकि मकरान तट पर मछली पकड़ने के लिए चीन के बड़े बड़े जहाज हैं और वहां मछुआरे जा नहीं सकते।''

लोगों में भारी बेरोजगारी

लोगों में भारी बेरोजगारी

रहमान ने कहा कि ग्वादर डीप सी पोर्ट बनने के बावजूद शहर के लोग अभी भी बेरोजगार हैं और सरकार ने इस बारे में कुछ नहीं किया है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने उन्हें यह कहते हुए उद्धृत किया है कि, "यह मिट्टी के बेटों के लिए अपमान है जब उन्हें चौकियों पर रोक दिया जाता है और उनके ठिकाने के बारे में पूछताछ की जाती है।" ग्वादर में चीन की उपस्थिति का भारी विरोध शुरू हो गया है। जो चीन के बीआरई प्रोजेक्ट के लिए खतरे की घंटी है, जिसकी वजह से पाकिस्तान चीन से अरबों डॉलर का कर्ज ले रखा है। आपको बता दें कि, बीआरई प्रोजेक्ट के सीपीईसी के तहत पाकिस्तान और चीन के बीच 60 अरब डॉलर का समझौता हो रखा है और ग्वादर बंदरगाह इस प्रोजेक्ट का काफी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भारत करता है सीपीईसी का विरोध

भारत करता है सीपीईसी का विरोध

आपको बता दें कि, सीपीईसी को लेकर भारत ने हमेशा से चीन का विरोध किया है, क्योंकि चीन का ये प्रोजेक्ट भारत की जमीन से होकर गुजरता है, जिसपर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। लिहाजा भारत सीपीईसी प्रोजेक्ट पर विरोध दर्ज कराता रहता है। चीन के ये मेगा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लान चीन के शिनजियांग प्रांत को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में ग्वादर बंदरगाह से जोड़ती है। ग्वादर बंदरगाह को लंबे समय से पाकिस्तान सीपीईसी प्रोजेक्ट के लिए ''ताज में गहना'' के रूप में चित्रित करता है, लेकिन इसने पाकिस्तान के लोगों को चीन का गुलाम बना दिया है। पाकिस्तान के अधिकारियों की प्राथमिकताएं बंदरगाह और उसके सहायक हितों को सुरक्षित करने के लिए तैयार की जाती हैं और ग्वादर के लोगों से पाकिस्तान की सरकार को कोई मतलब नहीं है। पाकिस्तानी अखबार 'द डॉन' ने शुक्रवार को बताया है कि, ग्वादर बंदरगाह से पाकिस्तान का विकास नहीं, बल्कि बर्बादी ही हो रही है।

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