बांग्लादेश नहीं है इस्लामिक गणराज्य, पाकिस्तानी पिट्ठू कराना चाहते हैं फसाद, जमकर बरसे बांग्लादेशी मंत्री
बांग्लादेश के सूचना मंत्री ने कहा कि, बांग्लादेश इस्लामिक देश नहीं है और पाकिस्तानी पिट्ठू देश में सांप्रदायिक तनाव पैदा कर रहे हैं।
कोलकाता, अक्टूबर 29: बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के दौरान जमकर फसाद हुआ है और देश के कम से कम 22 जिलों में दर्जनों मंदिरों को तोड़ दिया गया, जबकि दर्जन भर से ज्यादा हिंदुओं की अलग अलग जगहों पर हत्या कर दी गई। जिसमें अब तक 500 से ज्यादा लोगों को बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार ने गिरफ्तार किया है। वहीं, अब बांग्लादेश के केन्द्रीय मंत्री ने कहा है कि, बांग्लादेश में पाकिस्तानी पिट्ठू फसाद करना चाहते हैं और देश की शांति को बर्बाद करना चाहते हैं।

पाकिस्तानी पिट्ठुओं पर बरसे मंत्री
बांग्लादेश के सूचना और प्रसारण मंत्री एम हसन महमूद ने 'धर्मनिरपेक्षता बांग्लादेश की आत्मा है' पर जोर देते हुए गुरुवार को कहा कि 'हम बांग्लादेश गणराज्य हैं न कि इस्लामिक गणराज्य बांग्लादेश।' हसन महमूद कोलकाता प्रेस क्लब में 'बंगबंधु संगबाद केंद्र' (मीडिया सेंटर) के उद्घाटन के दौरान बोल रहे थे। बांग्लादेशी मंत्री हसन महमूद ने इस दौरान कहा कि, पाकिस्तान के करीबी तत्व जिन्होंने 1971 के 'मुक्ति संग्राम' का विरोध किया था, वे बांग्लादेश में सांप्रदायिक फसाद पैदा करना चाहते हैं, और हाल ही में बांग्लादेश को हिलाकर रख देने वाली सांप्रदायिक हिंसा के अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्षता "राष्ट्र और उसके संविधान" की मार्गदर्शक भावना बनी हुई है।

हिंदुओं पर हिंसा पर बोले मंत्री
बांग्लादेश में हाल के सांप्रदायिक दंगों के बारे में बोलते हुए बांग्लादेश के सूचना प्रसारण मंत्री ने कहा कि, "कुछ पार्टियां सांप्रदायिक हिंसा को भुनाती हैं। बीएनपी, जमात सांप्रदायिकता में विश्वास करते हैं। कोई भी हिंदू, कुरान को पूजा मंडप में नहीं डाल सकता है। ये बांग्लादेश को अस्थिर करने के लिए राजनीतिक चालें थीं। इकबाल हुसैन ने कुरान को पूजा मंडप में रखा। हमारी सरकार ने सख्त कार्रवाई की है।" आपको बता दें कि, बांग्लादेश की राजधानी ढाका से करीब 100 किलोमीटर दूर कुमिला में एक दुर्गा पूजा मंडप में कथित ईशनिंदा की घटना को लेकर बांग्लादेश के कम से कम 22 जिलों में हिंसा भड़क गई थी, जिसके बाद कई प्रभावित क्षेत्रों में अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया था। मीडिया में हिंदू मंदिरों और दुर्गा पूजा स्थलों में तोड़फोड़ की खबर आने पर पुलिस और कट्टरपंथियों के बीच छिटपुट झड़पें हुईं थीं।

इकबाल ने रखा था पंडाल में कुरान
बांग्लादेश में हिंसा के बाद पुलिस ने जब सीसीटीवी फूटेज को खंगालना शुरू किया, तो पता चला कि, कुमिला के ही रहने वाले 30 साल के इकबाल हुसैन ने दुर्गा पूजा पंडाल में मूर्ति के पैरों पर कुरान को रखा था और पंडाल में मूर्ति के पैरों के पास कुरान रखे जाने का वीडियो बनाकर वायरल किया गया था। वीडियो वायरल होने के बाद बांग्लादेश की घोर दक्षिणपंथी पार्टी बीएनपी ने कई जगहों पर मंदिरों पर हमला किया था, जिसमें कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई थी। जिसपर बोलते हुए बांग्लादेश के मंत्री ने कहा कि, "हमने हिंसा में शामिल दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। हम बांग्लादेश में हिंदू या मुस्लिम में विश्वास नहीं करते हैं। सबसे पहले हम बंगाली हैं और उसके बाद ही हम अपने धर्म से जाने जाते हैं। जो अपराधी घटना में शामिल हैं, देश में अराजकता पैदा करना चाहता था। उन हमलों में बीएनपी-जमात के कार्यकर्ता शामिल थे।"

दुर्गापूजा पर बोले बांग्लादेशी मंत्री
बांग्लादेश के सूचना प्रसारण मंत्री ने कहा कि, इस साल बांग्लादेश में करीब 32,000 दुर्गा पूजा पंडालों का निर्माण किया गया था, जिनमें कुछ जगहों पर हमला किया गया। इस घटना के बाद 1,200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है और देश में तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ सौ से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। मत्री एम हसन महमूद ने कहा कि, "सरकार ने हिंसा से प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान की है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों को हिंसा के दौरान नष्ट हुए घरों के पुनर्निर्माण का आश्वासन दिया है।" उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य सांप्रदायिकता में विश्वास करने वाले लोगों को उखाड़ फेंकना है।

सांप्रदायिक नहीं, धर्म निरपेक्ष है बांग्लादेश
हसन महमूद ने धर्म को संविधान में लाने के लिए पूर्व राष्ट्रपति जनरल हुसैन मुहम्मद इरशाद को दोषी ठहराया और कहा कि, बांग्लादेश शुरू में धर्मनिरपेक्ष चरित्र का था। उन्होंने कहा कि, बांग्लादेश ने 1972 में खुद को संवैधानिक रूप से धर्मनिरपेक्ष घोषित किया। 1988 में बांग्लादेश की संसद ने जनरल हुसैन मुहम्मद इरशाद की अध्यक्षता के दौरान इस्लाम को राज्य का धर्म घोषित किया था। बांग्लादेश के मंत्री ने कहा कि, "बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान ने 1972 में जो संविधान बनाया था, उसकी आत्मा में धर्मनिरपेक्षता थी, और यही हमारी आत्मा है। यह जनरल इरशाद थे जिन्होंने धर्म को संविधान में लाया और हमारे देश की अंतरात्मा को चोट पहुंचाई।" उन्होंने पत्रकारों से कहा, "जिन लोगों ने हमारी स्वतंत्रता, मुक्ति संग्राम का विरोध किया और पाकिस्तान के करीबी हैं, वे हमारे देश की शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना चाहते हैं।"












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