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6 लाख करोड़ का इकोनॉमिक इंजेक्शन, चीन को सबक, पुतिन ने पांच घंटे में भारत के बड़े-बड़े काम कर दिए

कोरोना महामारी के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने सिर्फ दूसरी बार विदेश दौरा किया है। उन्होंने चीन का दौरा रद्द करते हुए भारत का दौरा किया है, जो उनके भारत के प्रति प्रेम और विश्वास को दिखाता है।

नई दिल्ली, दिसंबर 07: पिछले साल जब से कोरोना वायरस ने दुनिया भर में खौफ पसारना शुरू किया है, उसके बाद से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सिर्फ दूसरी बार देश से बाहर निकले हैं। उनका दूसरा दौरा भारत का था। इस दौरान उन्होंने तमाम बड़े बड़े वैश्विक कार्यक्रम, जैसे जी-20 कार्यक्राम, सीओपी-26 कार्यक्रम, अमेरिका दौरा...तमाम कार्यक्रम रद्द कर दिए। यानि, राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा फिर से साबित करता है, कि रूस और भारत की दोस्ती कितनी प्रगाढ़ है और रूस के दिल में भारत के लिए क्या स्थान है।

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    सिर्फ 5 घंटे का रहा भारत दौरा

    सिर्फ 5 घंटे का रहा भारत दौरा

    दिखने में पुतिन का दौरा सिर्फ 5 घंटे के लिए लग सकता है, लेकिन यूक्रेन के साथ जंग जैसे हालात में भी भारत का दौरा करना भारत के प्रति रूस की दोस्ती और प्यार को दर्शाता है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का ये दौरा भारत और रूस के रिश्तों की मजबूत नींव को दर्शाता है और विश्लेषकों का मानना है कि, रूस ने ग्लासको में हुए जी-20 सम्मेलन के ऊपर भी भारत को वरीयता दी है और यूक्रेन के साथ चरम पर पहुंचे तनाव के बीच भी पुतिन के भारत दौरे के लिए समय निकाला है। सबसे दिलचस्प ये है कि, भारत का दौरा करने वाले राष्ट्रपति पुतिन ने चीन का दौरा भी टाल दिया है।

    सिर्फ दूसरी बार निकले बाहर

    सिर्फ दूसरी बार निकले बाहर

    पिछले साल मार्च 2020 के बाद ये दूसरा मौका था, जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन देश से बाहर निकले थे। इससे पहले वो इसी साल जिनेवा के दौरे पर गये थे, जहां उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात की थी। जिसका जिक्र खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुतिन के सामने किया और कहा कि, ''राष्ट्रपति पुतिन का ये दौरा बताता है कि, उनका भारत के प्रति कैसा लगाव है, क्योंकि उन्होंने पिछले 2 सालों में सिर्फ दूसरी बार विदेश यात्रा की है।'' पीएम मोदी ने कहा कि, ''राष्ट्रपति पुतिन ने भारत के साथ रूस के संबंध को कितना महत्वपूर्ण करार दिया है, उनके दिल्ली दौरे से ये बात साबित होता है''।

    6 लाख करोड़ का आर्थिक करार

    6 लाख करोड़ का आर्थिक करार

    दुनिया के दो महाशक्तिशाली देशों के नेता जब मिले, तो दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को उड़ान देने के लिए 6 लाख करोड़ रुपये यानि करीब 80 अरब डॉलर के समझौते किए गये। जिसके तहत साल 2015 तक दोनों देश 50 अरब डॉलर का दोतरफा निवेश को बढ़ाएंगे और दोनों देशों के बीच व्यापार को 30 अरब डॉलर से ज्यादा बढ़ाया जाएगा। राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 278 समझौतों पर दस्तखत हुए हैं। आपको बता दें कि, भारत और रूस के बीच 2020-21 में आपसी व्यापार 8.1 अरब डॉलर का रहा है। जिसमें भारतीय एक्सपोर्ट 2.6 अरब डॉलर का था, तो रूसी एक्सपोर्ट 5.48 अरब डॉलर का था। अब दोनों देशों ने दो तरफा निवेश को 50 अरब डॉलर तक बढ़ाने का नया टार्गेट सेट किया है।

    पीएम मोदी-राष्ट्रपति पुतिन की दोस्ती

    पीएम मोदी-राष्ट्रपति पुतिन की दोस्ती

    आपको बता दें कि, मोदी सरकार पर आरोप लगते रहे हैं कि, इस शासन के दौरान रूस के साथ दोस्ती में कमी आई है, लेकिन आंकड़े इसके उलट हैं। पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की इससे पहले आखिरी मुलाकात 2 साल पहले ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी और फिर दुनियाभर में फैली कोरोना महामारी के बीच दोनों नेताओं के बीच 6 बार टेलीफोन पर बातचीत हुई है। जबकि, दोनों नेताओं ने 3 बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान भी मुलाकात की है, जिसे भारतीय प्रधानमंत्री ने दोस्ती का भरोसेमंद मॉडल नाम दिया है। पीएम मोदी ने रूसी दोस्ती को अहमियत देते हुए एस-400 डिफेंस मिसाइल सिस्टम खरीदा और अमेरिकी धमकियों को पूरी तरह से नजर अंदाज कर दिया, जिसे रूस ने भी सराहा है और रूसी राष्ट्रपति ने इसी वजह से भारत को 'महान शक्ति' करार दिया है। उन्होंने नई दिल्ली में कहा कि, 'हम भारत को महान शक्ति और ऐसा दोस्त मानते हैं, जो वक्त की कसौटी पर खरा उतरा'।

    रूस के लिए अहम है भारत

    रूस के लिए अहम है भारत

    दुनिया में अमेरिका और चीन के बीच बनते नये गुट के बीच राष्ट्रपति पुतिन अपने सबसे पुराने दोस्त भारत के साथ संबंध को किसी भी हाल में कम नहीं करना चाहते हैं। राष्ट्रपति पुतिन ये बात भली भांति जानते हैं, कि पिछले दो दशकों में भारत भले ही अमेरिका की तरफ झुका हो, लेकिन आम भारतीय अभी भी रूस को ही सच्चा दोस्त मानते हैं और अगर किसी देश की जनता के दिल में आपका स्थान हो, तो फिर ये सबसे बड़ी जीत होती है। इस बात जिक्र पिछली मुलाकात में खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कर चुके हैं। इसके साथ ही, अमेरिका भी जानता है, कि भारत से दोस्ती सबसे लिए जरूरी है, लिहाजा एस-400 मिसाइल सिस्टम पर अमेरिका ने पूरी तरह से चुप्पी बनाए रखी। अमेरिका और रूस, दोनों ही इस बात को बहुत अच्छे से जानते हैं, कि भारत दुनिया के चंद उन देशों में शामिल है, जिसका विदेश नीति स्वतंत्र है और भारत किसी भी देश के दबाव में झुक नहीं सकता है। लिहाजा, पुतिन का ये दौरा भले ही पांच घंटे का रहा हो, मगर डिप्लोमेटिक नजरिए से ये दौरा ऐतिहासिक था।

    अमेरिका-रूस के बीच भारत का बैलेंस

    अमेरिका-रूस के बीच भारत का बैलेंस

    भारत ने आजादी के बाद से ही अपनी विदेश नीति को पूरी तरह से स्वतंत्र रखी है, जो अब तक जारी है। भारत ने रूस की आपत्ति के बाद भी क्वाड का हिस्सा बनना मंजूर किया और अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर इंडो-पैसिफिक में नये ग्रुप का निर्माण किया। रूस के ऐतरात पर भारत साफ कर चुका है कि, क्वाड के चार देशों के बीच मुद्दों के आधार पर सहयोग है और भारत की विदेश नीति पूरी तरह से स्वतंत्र है। वहीं, भारत ने रूस को 2+2 बातचीत वाले देशों की सूचि में शामिल कर ये साबित कर दिया, कि उसकी विदेश नीति पर अमेरिका का रत्ती भर भी प्रभाव नहीं है। और अमेरिकी प्रतिबंध की चेतावनी के बाद भी भारत ने ना सिर्फ रूस के साथ एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम का सौदा किया, बल्कि रूस अब मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी भी शुरू कर चुका है। वहीं, जो अमेरिका एस-400 मिसाइल खरीदने के लिए तुर्की पर प्रतिबंध लगा चुका है, वो भारतीय सौदे पर पूरी तरह चुप है। लिहाजा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, राष्ट्रपति पुतिन भारत को अपने साथ रखना चाहते हैं, जिसकी विदेश नीति किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकती है।

    दिल्ली से चीन को पुतिन का संदेश

    दिल्ली से चीन को पुतिन का संदेश

    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत का दौरा ऐसे वक्त में किया है, जब चीन के साछ भारत का तनाव चरम पर है और दोनों देशों के 50-50 हजार सैनिक सीमा पर तैनात हैं। लिहाजा, पुतिन का भारत दौरा चीन के लिए भी साफ संदेश माना जा रहा है। हालांकि, रूस और चीन ने पिछले साल अरबों डॉलर का करार किया है, लेकिन राष्ट्रपति पुतिन चीन की महत्वाकांझा को बहुत अच्छे से जानके हैं। रूस और चीन के बीच लड़ाई भी हो चुकी है और पुतिन जानते हैं कि, चीन विश्व में महाशक्ति बनकर उसके खिलाफ भी हो सकता है और चीन एक ऐसा देश है, जिसपर किसी भी हाल में विश्वास नहीं किया जा सकता है। लिहाजा, पुतिन भारत के दौरे से चीन को भी संदेश देना चाहते हैं, कि रूस चीन का जूनियर पार्टनर नहीं, बल्कि बराबरी का रिश्ता रखना चाहते हैं।

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