युद्ध के चौथे दिन यूक्रेन ने पलट दिया पासा, खतरे में पड़ी खुद पुतिन की कुर्सी, जानिए कैसे फंस गया है रूस?
यूक्रेन के उप रक्षा मंत्री हन्ना मलयार ने रविवार को दावा करते हुए कहा है कि, यूक्रेन पर आक्रमण के दौरान रूसी सेना ने लगभग 4,300 सैनिकों को खो दिया है।
मॉस्को/कीव, फरवरी 27: पिछले चार दिनों से यूक्रेन युद्ध चल रहा है और अब तक रूस को यूक्रेन में निर्णायक बढ़त नहीं मिली है। इस बीच रूसी राष्ट्रपति की पूरी दुनिया में आलोचना की जा रही है और रूस में भी पुतिन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। जिसके बाद अब रूसी राजनीति के जानकारों का कहना है कि, अगर रूस को यूक्रेन में हार मिलती है, तो फिर व्लादिमीर पुतिन को राष्ट्रपति पद से भी हटाया जा सकता है। लिहाजा अब पुतिन ने किसी भी हाल में लड़ाई जीतने के निर्देश अपने सैनिकों को दिए हैं।

कुर्सी बचाने के लिए जंग
व्लादिमीर पुतिन ने एक नए टेलीविज़न संबोधन में 'अपने सैन्य कर्तव्यों को वीरतापूर्वक निभाने' के लिए रूसी सेना की स्पेशल फोर्स की जमकर तारीफ की है। और ब्रिटेन के एक मंत्री ने दावा किया है कि, रूसी राष्ट्रपति को की कुर्सी अब अपने सैनिकों के ही भरोसे है और अगर पुतिन को यूक्रेन में झटका लगता है, तो फिर व्लादिमीर पुतिन की ही कुर्सी खतरे में पड़ सकता है। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि, डोनबास के लोगों को यूक्रेन की सेना से बचाने के लिए उन्होंने यूक्रेन पर हमला किया है और बताया कि, वो यूक्रेन में रूस समर्थक अलगाववादियों की मदद करने के लिए हस्तक्षेप कर रहे हैं, क्योंकि यूक्रेन की सेना उनका ‘नरसंहार' कर सकती थी।
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यूक्रेन में रूस की स्पेशल फोर्स
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेज के वार्षिक दिवस को चिह्नित करते हुए बताया कि, उनकी विशाल सेना यूक्रेनी प्रतिरोध को कुचलने के लिए अपनी लड़ाई को आगे बढ़ा रही है, हालांकि, रूस को जो नुकसान पहुंचा है, उसे मानने से रूस ने इनकार कर दिया है। रूसी सरकार ने अब तक यूक्रेन में लड़ाई से किसी भी मौत की घोषणा नहीं की है, हालांकि, दागेस्तान क्षेत्रीय सरकार के प्रमुख ने एक पैराट्रूपर के परिवार के प्रति अपनी संवेदना जताई है और माना जा रहा है कि, ये संवेदना शायद रूसी राष्ट्रपति के स्क्रिप्ट के बाहर की बात हो सकती है। क्योंकि, यूक्नेन की तरफ से रूसी जवानों के शवों को रूस पहुंचाने की जिम्मेदारी रेड क्रास एनजीओ को दी गई है और कम से कम तीन हजार रूसी जवानों के मारे जाने का दावा किया है।

पुतिन के उल्टे दिन शुरू?
आज, ब्रिटेन के आर्म्ड फोर्स मंत्री जेम्स हेप्पी ने दावा करते हुए कहा कि, पुतिन के अब ‘गिनती के ही दिन' बचे हैं, अगर यूक्रेन में उनका अभियान फेल हो जाता है। उन्होंने दावा किया कि, राष्ट्रपति पुतिन का यूक्रेन अभियान काफी पीछे चल रहा है और यूक्रेन ने जिस तरह से प्रतिरोध जताया है, उसकी उम्मीद राष्ट्रपति पुतिन ने नहीं की थी और यूक्रेन में रूसी सैनिकों को गंभीर प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। जेम्स हेप्पी, जो ब्रिटिश राइफल्स में मेजर रह चुके हैं, उन्होंने कहा कि, पुतिन की सेना लड़ाई के पहले कुछ दिनों में प्रमुख शहरों पर कब्जा करने में असमर्थ रही हैं और रूसी सैनिकों को यूक्रेन की सेना के सामने ज्यादा सफलता नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि, रूसी आक्रमण बिखड़ने लगा है और अगले कुछ दिनों में रूसी सैनिकों को यूक्रेन में और भी ज्यादा नुकसान हो सकता है।

काफी पीछे है रूसी अभियान
ब्रिटिश अखबार में लिखे एक लेख में पूर्व रक्षा अधिकारी जेम्स हेप्पी ने कहा कि, ‘'राजधानी कीव में रूस का आक्रमण काफी धीमी पड़ गई है और रूस के सैनिक नये क्षेत्रों को अपने नियंत्रण में नहीं ले पा रहे हैं, लिहाजा हर बीतते वक्त के साथ रूस के लिए ये लड़ाई काफी मुश्किल होती जा रही है, क्योंकि अब पुतिन के लिए ज्यादा दिनों तक लड़ाई जारी रखना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने लिखा कि, 'यूक्रेन की सेना काफी अच्छी तरफ से प्रशिक्षित है और उसने रूसी फ्रंटलाइन फोर्स को पीछे छोड़ना शुरू कर दिया है और रूसी सैनिकों के पास अब रसद सामग्री का भी अभाव हो रहा है, लिहाजा उनके लिए राजधानी कीव में डटे रहना काफी मुश्किल हो सकता है और यहां से पुतिन के लिए अपशगुन शुरू होता है''। वहीं, मंत्री ने इस बात का भी जिक्र किया है, कि यूक्रेन में भारी संख्या में युवा सेना में शामिल हो रहे हैं, जिससे सेना का मनोबल, जनता का साथ पाकर काफी बढ़ रहा है।

अगर पुतिन फेल हुए तो क्या होगा....
ब्रिटिश मंत्री ने कहा है कि, यदि राष्ट्रपति पुतिन यूक्रेन में चलाए जा रहे अपने अभियान में फेल हो जाते हैं, तो फिर वो अपनी जनता के बीच क्या मुंह लेकर जाएंगे, तो पहले से ही युद्ध के खिलाफ है। पुतिन के फेल होने से रूसी लोगों को अहसास होगा, कि पुतिन ‘उनकी कितनी कम परवाह करते हैं ... और फिर बतौर राष्ट्रपति पुतिन का देश में भारी विरोध होना तय हो जाएगा और हो सकता है उनके दिन लदने लगे'। उन्होंने आगे लिखा है कि, ‘'यूक्रेन में हारने के बाद व्लादिमीर पुतिन अपनी सत्ता गंवा बैठेंगे और उन्हें अपना उत्तराधिकारि चुनने का भी मौका नहीं मिलेगा''। ब्रिटिश मंत्री का ये बयान उस वक्त आया है, जब ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी एमआई-6 सीक्रेट इंटेलिजेंस के प्रमुख ने कहा कि, राष्ट्रपति पुतिन के लिए यूक्रेन युद्ध ‘अपराजेय' साबित होगा और वो किसी भी कीमत पर जीत हासिल नहीं कर पाएंगे।

4300 रूसी सैनिकों के मारे जाने का दावा
इस बीच यूक्रेन के उप रक्षा मंत्री हन्ना मलयार ने रविवार को दावा करते हुए कहा है कि, यूक्रेन पर आक्रमण के दौरान रूसी सेना ने लगभग 4,300 सैनिकों को खो दिया है। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा है कि, मरने वाले रूसी सैनिकों की संख्या और भी स्पष्ट की जा रही है। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर यह भी कहा कि, रूसी सैनिकों ने लगभग 146 टैंक, 27 विमान और 26 हेलीकॉप्टर खो दिए हैं। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि, ये युद्ध जितना लंबा खिंचेगा, रूसी राष्ट्रपति के लिए अपनी जनता को जवाब देना उतना ही मुश्किल होता जाएगा और रूसी राष्ट्रपति के लिए ये जवाब देना कि उन्हें ‘युद्ध से क्या हासिल हुआ' काफी मुश्किल हो जाएगा।

दुनियाभर से यूक्रेन को मदद
एक वक्त अकेला नजर आ रहे यूक्रेन को अब पूरी दुनिया से समर्थन मिलना शुरू हो गया है और रूस की निंदा पूरी दुनिया में शुरू हो गई है। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय सहयोगियों ने रूस पर भारी दबाव बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में यूक्रेन की मदद के लिए अतिरिक्त सहायता का वादा किया गया है। जर्मनी ने शनिवार शाम को घोषणा की है, कि वह 1,000 टैंक रोधी हथियार और 500 "स्टिंगर" सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल यूक्रेन को "जितनी जल्दी हो सके" भेजेगा। वे हथियार 400 जर्मन-निर्मित एंटी-टैंक हथियारों के अलावा हैं, जिन्हें जर्मनी ने नीदरलैंड से भी भेजने की मंजूरी दी थी, साथ ही एस्टोनिया से 9 डी -30 हॉवित्जर और गोला-बारूद भी यूक्रेन को भेजा जा रहा है।

रूस की अर्थव्यवस्था पर ‘एटम बम’
वहीं, रूस पर अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक स्ट्राइक किया गया है और अमेरिका समेत तमाम यूरोपीय देश रूस को ‘स्विफ्ट' से निकालने के लिए सहमत हो गये हैं। और अगर रूस को स्विफ्ट से बाहर कर दिया जाता है, तो उसे 600 अरब डॉलर के कारोबार से बाहर कर दिया जाएगा, जो उसकी अर्थव्यवस्था पर परमाणु बम गिराने जैसा होगा। लिहाजा, अब रूस के लिए इस संकट से बाहर निकलना नामुमकिन के बराबर होगा और रूस के लिए ये लड़ाई ‘आत्मघाती' साबित हो सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, रूस चीन के भरोसे जरूर है, लेकिन चीन भी अपने दायरे से बाहर जाकर रूस की मदद नहीं कर सकता है और इस लड़ाई का नतीजा ना सिर्फ पुतिन के लिए ‘खतरनाक', बल्कि रूस के लिए भी ‘विनाशकारी' हो सकता है।












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