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तालिबानी फरमान के बाद अफगानिस्तान में बंद नहीं हुई अफीम की खेती, खस्ताहाल किसानों ने कही ये बात

नई दिल्ली, 10 मई। अफगानिस्तान (Afghanistan) में अफीम की खेती पर प्रतिबंध (Ban on Poppy cultivation) लगे 3 दशक से अधिक समय बीत चुका है। अब तक यह बैन प्रभावी नहीं हो सका है। तालिबान की सरकार बनने के बाद भी नशीले पदार्थ के व्यापार न करने की कसम खाई गई लेकिन स्थिति नहीं बदली।

Poppy cultivation

तालिबान की ओर से जारी फरमान में कहा गया कि अगर किसानों को अफीम की खेती करते हुए पाया गया तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। उनकी अफीम की फसल को जलाकर नष्ट कर दिया जाएगा। अफीम के अलावा तालिबान ने अन्य मादक पदार्थ के व्यापार को भी प्रतिबंधित कर दिया गया। लेकिन यह फरमान अब तक प्रभावी नहीं पा रहा।

अफगानिस्तान का नशीले पदार्थ वाली खेती का लंबा रिकॉर्ड रहा है। साल 2021 तक वैश्वक स्तर पर अफगानिस्तान अकेला देश रहा जहां 90 प्रतिशत अवैध हेरोइन का उत्पादन किया। लेकिन वहां की सरकार इसको नजअंदाज करती रही। अब तालिबान के शासन में भी अफीम की खेती जारी है।

अफीम अफगानिस्तान में लाखों लोगों के लिए रोजगार प्रमुख स्रोत माना जाता है। यहां अफीम की बड़े पैमाने पर खेती होती है। इस पर लाखों किसान अपने जीवनयापन के लिए निर्भर होते हैं। तालिबान ने कसम खाकर यह कहा था कि अफीम की खेती पर कार्रवाई करने पर वह बाध्य होगा। लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान के इस फरमान का अब तक असर नहीं दिखाई पड़ रहा है।

गत 28 अप्रैल को दिल्ली में अपार्टमेंट से 50 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली हेरोइन, 47 किलोग्राम अन्य संदिग्ध नशीले पदार्थ, 30 लाख रुपये नकद, नकद गिनने की मशीन और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई थी। जब्त की गई हेरोइन की कीमत बाजार में 350 करोड़ रुपए के करीब थी। मामले में मादक पदार्थ की तस्करी से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ था।

इससे पहले भी अफगानिस्ता में अफीम की खेती प्रतिबंधित करने के लिए कानून बनाया गया था। तालिबान ने अफगानिस्तान में 1990 के दशक में भी अफीम की खेती पर बैन लगा दिया था। दो सालों के भीतर पूरे देश में इस पर बैन लागू कर दिया गया। संयुक्त राष्ट्र ने भी अफगानिस्तान के ज्यादातर हिस्सों में अफीम की खेती पूरी तरह से बंद होने पुष्टि की थी। लेकिन, 2001 में अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत खत्म हुई और फिर से यहां बड़े पैमाने पर खेती शुरू हो गई। बीते साल तक दुनिया भर में हो रहे अवैध हेरोइन की उत्पादन का अकेले 91 प्रतिशत अफगानिस्तान में हो रहा था।

दरअसल, उत्तरी अफगानिस्तान में किसान अफीम की खेती लोग अधिक पसंद करते हैं। उन्हें अन्य फसलों की तुलना में उत्पादन से चार गुना अधिक लाभ अफीम से मिलता है। लेकिन अफगानिस्ता में युद्ध के बाद वहां किसानों का बुरा हाल है। उनका कहना है कि तालिबान के फरमान से पहले जिन किसानों ने अफीम की खेती की थी उन्हें अब सरकार की ओर से फसल काटने का मौका दिया गया है। अगली बार से अफीम की खेती पर प्रतिबंध लागू होगा।

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