PoK Protest: नरसंहार पर उतरी मुनीर की फौज! क्या है JAAC जिसे कुचलना चाहती शहबाज सरकार? अब तक कितनों की मौत?

PoK Protest: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (POJK) में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच आंदोलन के एक प्रमुख नेता ने पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता शौकत मीर (Shaukat Mir) ने दावा किया है कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ "नरसंहार" शुरू कर दिया है और उन्हें देखते ही गोली मारने (Shoot-at-Sight) के आदेश जारी किए गए हैं।

'प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोली चलाई'

मीडिया को मिले एक मैसेज में शौकत मीर ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों ने रावलाकोट (Rawalakot) में प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलीबारी की। उन्होंने कहा कि सरकार ने आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं के खिलाफ नरसंहार जैसा अभियान छेड़ दिया है। मीर का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, अहिंसक और निहत्था है। उनका दावा है कि वे केवल अपने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान सरकार ने उन्हें आतंकवादी घोषित कर दिया है।

PoK Protest

"अगर हम आतंकवादी हैं तो सरकार ने हमसे बात क्यों की?"

शौकत मीर ने पाकिस्तान सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सरकार उन्हें आतंकवादी मानती है, तो फिर उनके साथ बातचीत क्यों की गई थी। उन्होंने कहा-

"हम शांतिप्रिय लोग हैं। हमने सिर्फ अपने बुनियादी अधिकारों की मांग की है। हमने न तो पाकिस्तान के राजनीतिक ढांचे के खिलाफ कुछ कहा है और न ही पाकिस्तान राज्य के खिलाफ। हम मरने के लिए तैयार हैं। लेकिन हमें इस बात की संतुष्टि रहेगी कि हमने हमेशा शांतिपूर्ण संघर्ष किया और कभी अराजकता पैदा नहीं की।"
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11 लोगों की मौत, कई घायल

यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में जारी कार्रवाई के दौरान कम से कम 11 लोगों की मौत हो चुकी है। रिपोर्टों के मुताबिक मरने वालों में 7 आम नागरिक और 4 पुलिसकर्मी शामिल हैं। इसके अलावा दर्जनों लोग घायल हुए हैं। बढ़ती हिंसा और विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी हैं, जिससे POJK लगभग पूरी तरह दुनिया से कट गया है।

सरकार ने मांगे 14,000 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी

प्रदर्शनों को कंट्रोल करने के लिए POJK प्रशासन ने पाकिस्तान की संघीय सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रशासन ने कार्रवाई को और तेज करने के लिए करीब 14,000 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की मांग की है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार आंदोलन को लेकर काफी गंभीर रुख अपनाए हुए है।

आखिर क्या है JAAC की मुख्य मांग?

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पूरे POJK में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रही है। संगठन की मुख्य मांग क्षेत्र की विधानसभा में आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना है। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के मुख्य हिस्से में जाकर बस गए थे।

क्यों हटाना चाहते हैं 12 आरक्षित सीटें?

JAAC का दावा है कि इन 12 सीटों का इस्तेमाल पाकिस्तान की मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां POJK में सरकार बनाने और राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने के लिए करती हैं। संगठन का कहना है कि इन सीटों को समाप्त करने से क्षेत्र को अधिक राजनीतिक स्वायत्तता (Autonomy) मिलेगी और स्थानीय लोगों की आवाज को ज्यादा महत्व मिलेगा।

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पूरे इलाके को बंद करा रही JAAC

सरकारी कार्रवाई आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। JAAC ने मंगलवार को पूरे क्षेत्र में बंद और हड़ताल का आह्वान किया है। यह हड़ताल ऐसे समय हो रही है जब 27 जुलाई को होने वाले चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो रही है। ऐसे में राजनीतिक माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है।

सरकार ने JAAC को घोषित किया प्रतिबंधित संगठन

कार्रवाई के तहत पाकिस्तान सरकार ने इसी महीने JAAC को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित (Proscribed) संगठन घोषित कर दिया है। सरकार का आरोप है कि संगठन की गतिविधियां कानून-व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं, जबकि JAAC खुद को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन बताता है।

लंबे समय से जारी है टकराव

यह कोई पहली बार नहीं है जब POJK में इस तरह का तनाव देखने को मिला हो। पिछले कई सालों से क्षेत्रीय और केंद्रीय सरकारों की नीतियों को लेकर स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच मतभेद बने हुए हैं। लोग प्रशासनिक ढांचे, राजनीतिक अधिकारों और क्षेत्र के शासन से जुड़े कई बदलावों की मांग करते रहे हैं।

पिछले साल भी हुआ था बड़ा दमन अभियान

पिछले साल भी प्रशासन ने आंदोलनकारियों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया था। रिपोर्टों के मुताबिक, उस कार्रवाई में गिरफ्तार या प्रभावित लोगों की संख्या 200 के पार पहुंच गई थी। अब एक बार फिर बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को तनाव के माहौल में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाता है, इस पर पूरे क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।

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