PM Modi on US-Iran Deal: अमेरिका-ईरान समझौते का PM मोदी ने किया स्वागत, लेकिन दोनों देशों से कर दी बड़ी अपील

PM Modi Welcomes US Iran Agreement: करीब चार महीने से जारी अमेरिका-ईरान टकराव को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक ब्रेकथ्रू सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने एक शुरुआती समझौते (MoU) पर सहमति बनने की पुष्टि की है। इस समझौते में संघर्ष रोकने, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने, ईरान पर लगे कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, फ्रीज फंड की चरणबद्ध रिलीज और आगे परमाणु वार्ता जारी रखने जैसे अहम बिंदु शामिल हैं।

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पहल का स्वागत किया है। पीएम मोदी ने कहा कि यह समझौता वेस्ट एशिया में शांति, स्थिरता और आर्थिक सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे ग्लोबल ट्रेड, ऊर्जा सप्लाई और समुद्री व्यापार को राहत मिलेगी तथा बाकी मुद्दों पर भी स्थायी समाधान निकल सकेगा।

PM Modi Welcomes US Iran Agreement

पीएम मोदी ने समझौते का किया स्वागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच बनी इस समझ का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से जारी संघर्ष ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर असर डाला और कई देशों में जान-माल का नुकसान हुआ। भारत का मानना है कि बातचीत और डिप्लोमेसी ही ऐसे विवादों का सबसे बेहतर समाधान है। पीएम मोदी ने दोनों देशों से समझौते को पूरी तरह लागू करने और बाकी मुद्दों पर भी बातचीत जारी रखने की अपील की है।

होर्मुज खुलने से भारत समेत दुनिया को राहत

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आने वाले तेल और गैस पर निर्भर करता है। पिछले महीनों में तनाव बढ़ने से शिपिंग कॉस्ट और इंश्योरेंस चार्ज बढ़ गए थे। अगर समझौते के तहत होर्मुज पूरी तरह खुलता है तो तेल सप्लाई सामान्य होगी, फ्रेट कॉस्ट घट सकती है और ग्लोबल सप्लाई चेन को राहत मिलेगी।

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ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ सकता है सकारात्मक असर

अमेरिका-ईरान तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई थी। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी। अब अगर समझौता आगे बढ़ता है तो निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है। एनर्जी मार्केट स्थिर होने से कई देशों की इकोनॉमी को फायदा मिलेगा। भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए भी यह अच्छी खबर मानी जा रही है क्योंकि इससे ऊर्जा खर्च कम हो सकता है।

ईरान को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद

समझौते के तहत ईरान के फ्रीज फंड की चरणबद्ध रिलीज और ऑयल एक्सपोर्ट पर कुछ राहत की चर्चा हो रही है। इससे ईरानी अर्थव्यवस्था को बड़ा सपोर्ट मिल सकता है। लंबे समय से प्रतिबंधों का सामना कर रहे ईरान के लिए विदेशी मुद्रा और व्यापार गतिविधियों में सुधार महत्वपूर्ण होगा। हालांकि सभी आर्थिक राहतें तुरंत लागू नहीं होंगी और कई शर्तों के साथ आगे बढ़ेंगी, लेकिन शुरुआती संकेत ईरान के लिए सकारात्मक माने जा रहे हैं।

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परमाणु मुद्दा अब भी सबसे बड़ी चुनौती

युद्धविराम और तनाव कम करने पर सहमति बनने के बावजूद परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा अभी पूरी तरह हल नहीं हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को समाप्त करे, जबकि ईरान कुछ परमाणु गतिविधियां जारी रखने की बात कर रहा है। अगले 60 दिनों की बातचीत में यही सबसे अहम विषय रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर सहमति बनने से फाइनल पीस डील का रास्ता काफी आसान हो जाएगा।

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