OI Explained: 115 द्वीपों वाला छोटा देश Seychelles, भारत के लिए बेहद जरूरी क्यों? हमें क्या करता है स्पलाई?
PM Modi Seychelles Visit Explain: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स के तीन दिवसीय राजकीय दौरे पर हैं। यह यात्रा कई मायनों में खास है, क्योंकि भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे हो रहे हैं। इसी मौके पर पीएम मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर भी शामिल होंगे। इस दौरे का मकसद सिर्फ रिश्तों का जश्न मनाना नहीं, बल्कि हिंद महासागर में भारत की सबसे मजबूत रणनीतिक साझेदारियों को और मजबूत बनाना भी है। खास बात यह है कि पीएम मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री भी बनेंगे।
छोटा देश भारत के लिए बेहद अहम क्यों?
सेशेल्स भले ही आबादी और क्षेत्रफल के हिसाब से छोटा देश हो, लेकिन रणनीतिक रूप से इसकी अहमियत बहुत बड़ी है। हिंद महासागर में फैले इसके 115 द्वीप दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक रास्तों के बीच स्थित हैं। इन्हीं रास्तों से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल, गैस और दूसरे सामानों की सप्लाई होती है।

सेशेल्स के पास करीब 13 लाख वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) है। इसलिए इस समुद्री इलाके की सुरक्षा सिर्फ सेशेल्स ही नहीं, बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है। यही वजह है कि भारत यहां अपनी मौजूदगी और सहयोग लगातार बढ़ा रहा है।
चीन की बढ़ती मौजूदगी के बीच भारत का मजबूत साथी
पिछले कुछ सालों में हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की नौसैनिक गतिविधियां और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश तेजी से बढ़ा है। ऐसे में भारत ने सेशेल्स के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत किया है। भारत खुद को यहां एक भरोसेमंद विकास साझेदार के रूप में पेश करता है, जो स्थानीय क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर देता है।
'सागर' से 'महासागर' तक पहुंची भारत की नीति
साल 2015 में सेशेल्स दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने SAGAR (Security and Growth for All in the Region) यानी "क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास" का विजन पेश किया था। अब इसे आगे बढ़ाते हुए MAHASAGAR विजन पर काम किया जा रहा है, जिसमें सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक विकास, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल सहयोग को भी बराबर महत्व दिया गया है। भारत ने सेशेल्स को तटीय निगरानी रडार प्रणाली (CSRS), डोर्नियर समुद्री टोही विमान, इंटरसेप्टर बोट और फास्ट पेट्रोल वेसल भी दिए हैं। इनकी मदद से समुद्री तस्करी, अवैध मछली पकड़ने और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में काफी मदद मिली है।
डिजिटल इंडिया की तकनीक अब पहुंचेगी सेशेल्स
भारत ने हाल ही में सेशेल्स के लिए 175 मिलियन डॉलर (17.5 करोड़ डॉलर) का स्पेशल इकोनॉमिक पैकेज का ऐलान किया है। इसमें 125 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट और 50 मिलियन डॉलर का अनुदान शामिल है। इस पैकेज का बड़ा हिस्सा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के विकास पर खर्च होगा। भारत की UPI और आधार जैसी तकनीकों की मदद से सेशेल्स में डिजिटल पेमेंट और ई-गवर्नेंस सिस्टम को आधुनिक बनाया जाएगा। साथ ही अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के तहत रिन्युएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स को भी बढ़ावा मिलेगा।
व्यापार भी लगातार बढ़ रहा है
भारत और सेशेल्स के बीच व्यापार का आकार अभी छोटा है, लेकिन इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 के बीच दोनों देशों के व्यापार में करीब 15% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। भारत से सेशेल्स के लिए किया जाने वाला एक्सपोर्ट 68.64 मिलियन डॉलर है, जबक सेशेल्स से भारत को आयात: 8.69 मिलियन डॉलर है। इस तरह से कुल द्विपक्षीय व्यापार 72.92 मिलियन डॉलर का होता है।
भारत सेशेल्स को चावल, दवाइयां, सीमेंट, कपड़े, प्रोसेस्ड फूड और वाहन निर्यात करता है। वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा 1978 से वहां काम कर रहा है। भारती एयरटेल, टाटा मोटर्स और अशोक लेलैंड जैसी भारतीय कंपनियां भी सेशेल्स में सक्रिय हैं।
250 साल पुराना है दोनों देशों का रिश्ता
भारत और सेशेल्स का रिश्ता सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है। इसका इतिहास करीब 250 साल पुराना है। साल 1770 में पहले पांच भारतीय सेशेल्स पहुंचे थे। आज वहां करीब 15 हजार भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो व्यापार, चिकित्सा, शिक्षा और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि यह यात्रा हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगी, साथ ही दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार, डिजिटल टेक्नोलॉजी और सांस्कृतिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगी।
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