अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस का मौका, पीएम मोदी ने चीन को दिया कड़ा संदेश

अमेरिका की स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने चीन को कड़ा संदेश दिया है।

नई दिल्ली, जुलाई 05: कहते हैं कूटनीति की भाषा में कई बार मौन हो जाना भी बहुत बड़ा संदेश माना जाता है, या कुछ नहीं कहने के पीछे भी बहुत बड़ी चाल होती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कूटनीति के बहुत बड़े खिलाड़ी माने जाते हैं और उन्होंने अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर चीन को कड़ा संदेश दिया है।

चीन को कड़ा संदेश

चीन को कड़ा संदेश

दरअसल, 4 जुलाई को अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस था और इस मौके पर विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र अमेरिका को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बधाई संदेश दिया है। पीएम मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन को शुभकामना संदेश देते हुए अमेरिका की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गर्व जताया। लेकिन, अमेरिका की स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी ने धूमधान से 100वीं वर्षगांठ मनाई है, लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन को कोई बधाई संदेश नहीं दिया है और माना जा रहा है, इसके पीछे पीएम मोदी ने चीन को कड़ा संदेश देने की कोशिश की है।

लोकतंत्र के बहाने निशाना

लोकतंत्र के बहाने निशाना

दरअसल, चार जुलाई को अमेरिका के 245वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बधाई संदेश देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ''राष्ट्रपति जो बाइडेन समेत अमेरिका के सभी लोगों को स्वतंत्रता दिवस की 245वीं वर्षगांठ के मौके पर शुभकामनाएं और हार्दिक बधाई। एक जीवंत और विशालकाय लोकतंत्र के तौर पर भारत और अमेरिका स्वतंत्रता और स्वतंत्रता के मूल्यों को साझा करते हैं और इन्ही मूल्यों की वजह से हमारी साझेदारी का वैश्विक महत्व है।

लोकतंत्र से चीन को चिढ़

लोकतंत्र से चीन को चिढ़

4 जुलाई को अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस होता है और एक जुलाई को चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी की स्थापना दिवस की 100वीं वर्षगांठ, लेकिन भारत की तरफ से चीन को एक भी बधाई संदेश नहीं देना भी चीन को बहुत बड़ा संदेश है। दरअसल, जानकारों का मानना है कि चीन की दुखती रग पर अगर हाथ रखना है तो उसे बार बार लोकतंत्र के आईने में उसकी सूरत दिखानी पड़ेगी। चीन सिर्फ एक कम्यूनिस्ट पार्टी की बपौती बनकर रह गई है और एक जुलाई को असल में चीन ने कोई स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाया था, बल्कि कम्यूनिस्ट पार्टी ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने की कोशिश की थी, लेकिन जिन देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था है, उन्होंने चीन को बधाई नहीं दी और लोकतांत्रिक देशों का मानना है कि वो सिर्फ एक पार्टी का उत्सव था, ना कि किसी देश का। जबकि, कम्यूनिस्ट पार्टी ने अपनी पार्टी के उत्सव को देश के उत्सव की तरह दुनिया के सामने रखा था।

सीताराम येचुरी ने चीन को भेजी चिट्ठी

सीताराम येचुरी ने चीन को भेजी चिट्ठी

भारत की तरफ से चीन को सिर्फ मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी यानि सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी की सौवीं वर्षगांठ के मौके पर बधाई संदेश भेजा था। सीताराम येचुरी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को बधाई संदेश देते हुए मार्क्सवाद-लेनिनवाद को एक रचनात्मक विज्ञान बताया और कहा कि शी जिनपिंग की कम्यूनिस्ट पार्टी चीन के विकास के लिए काम कर रही है। आपको बता दें कि चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी दुनिया की सबसे शक्तिशाली राजनीतिक पार्टी है और साल 1949 से ये चीन पर शासन कर रही है और कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ चायना की स्थापना माउत्से तुंग ने की थी। चीन में किसी भी शख्स को दूसरी राजनीतिक पार्टी बनाने का हक नहीं है और अगर कोई लोकतंत्र की बात करता भी है तो उसे रास्ते से हटा दिया जाता है।

''सरकार का मामला नहीं''

''सरकार का मामला नहीं''

भारतीय विदेश मंत्रालय से जब पूछा गया कि आखिर भारत सरकार की तरफ से या प्रधानमंत्री की तरफ से चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी को बधाई संदेश क्यों नहीं भेजा गया तो भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कोई 'सरकारी मामला' नहीं है। वहीं, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी भी हर साल एक अगस्त को पीएलए दिवस के तौर पर स्थापना दिवस मनाती है और लगता नहीं है कि इस बार भारत की तरफ से पीएलए को कोई बधाई संदेश दिया जाएगा। आपको बता दें कि पीएलए, कम्यूनिस्ट पार्टी की सेना और बतौर देश, चीन के पास कोई सेना नहीं है। किसी पार्टी के द्वारा सेना बनाए जाने का कल्चर वामपंथ में ही है, ताकि वो अपने विपक्ष को पनपने ना दें। जहां जहां भी 'लालक्रांति' हुई है, वहां वहां पर सबसे पहले विपक्ष या लोकतांत्रिक विचारधारा वाले नेताओं को मारा गया है।

सीमा पर तनाव जारी

सीमा पर तनाव जारी

इसी बीच खबर है कि भारत सरकार ने चीन की सीमा के पास एक्शन काफी तेज कर दिया है और करीब 2 लाख से ज्यादा जवानों को सीमा पर तैनात रखा है, वहीं भारत सरकार की तरफ से कई विध्वंसक हथियार भी सीमा पर भेजे गये हैं। भारतीय सेना ने सीमा पर जवानों की संख्या में इजाफा चीन के उकसावे की कार्रवाई के बाद की है और पिछले 2 सालों से चीन और भारत के बीच का जनाव काफी ज्यादा बढ़ा हुआ है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक पहले के मुकाबले भारत ने 40 प्रतिशत ज्यादा जवानों की तैनाती सीमा पर कर रखी है।

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