गाजा के हालात पर पीएम मोदी ने मिस्र के राष्ट्रपति को किया टेलीफोन, युद्ध भड़कने की आशंकाओं पर की बात
Modi Egypt President Talk on Gaza: संयुक्त राष्ट्र में गाजा पट्टी को लेकर एक प्रस्ताव पर मतदान में गैर-हाजिर रहने के कुछ घंटे बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इजिप्ट के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी से टेलीफोन पर बातचीत की है। रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी ने इजिप्ट के राष्ट्रपति से इजरायल-हमास संघर्ष के बारे में शनिवार को टेलीफोन पर बातचीत की, क्योंकि इसने फिलिस्तीनी समूह हमास की निंदा नहीं की थी।
मिस्र के राष्ट्रपति के प्रवक्ता के एक बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अल-सिसी ने इजराइल-गाजा के बीच चल रहे संघर्ष के क्षेत्र में फैलने के "खतरे" पर चर्चा की और फिर दोनों नेताओं ने मानवीय संकट को रोकने के लिए युद्धविराम पर जोर दिया।

पीएम मोदी ने की मिस्र के राष्ट्रपति से बात
मिस्र के राष्ट्रपति के प्रवक्ता की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, "राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी को भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से एक फोन कॉल आया, जिसमें दोनों नेताओं के बीच गाजा पट्टी में इजरायली सैन्य अभियानों के लेटेस्ट डेलवपमेंट्स और संघर्ष के दौरान आने वाले खतरे पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।"
बयान में आगे कहा गया, कि "राष्ट्रपति सीसी ने संघर्ष विराम के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के समन्वय के लिए मिस्र के निरंतर प्रयासों पर जोर दिया है।"
इजराइल ने शनिवार को गाजा में जमीनी हमले और तेज कर दिए हैं और संकेत दिया है, कि इजराइली सेना एक व्यापक अभियान शुरू करने की तैयारी कर रही है। इज़राइल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को एक टेलीविज़न संबोधन में कहा, कि "हम पहले ही हजारों आतंकवादियों को मार चुके हैं और यह केवल शुरुआत है।"
शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में, 40 से ज्यादा सदस्य देशों, जिनमें चीन, पाकिस्तान, रूस और दक्षिण अफ्रीका जैसे भारत के सभी साथी ब्रिक्स सदस्य शामिल थे, उन्होंने उस प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया, जिसमें गाजा पट्टी में "निरंतर मानवीय संघर्ष विराम" और लड़ाई को रोकने का आह्वान किया गया था।
वोटिंग के दौरान इस प्रस्ताव के पक्ष में 120, विपक्ष में 14 वोट पड़े, जबकि 45 देश वोटिंग से गैर-हाजिर रहे।
जॉर्डन ने इस प्रस्ताव को पेश किया था, जिसमें वोटिंग के दौरान भारत गैर-हाजिर रहा, जबकि भारत ने कनाडा द्वारा प्रस्तावित एक संशोधन का समर्थन किया, जिसमें हमास और इजरायली नागरिकों के अपहरण की स्पष्ट निंदा की मांग की गई थी।
जॉर्डन के प्रस्ताव में इजराइल पर हमास के हमलों का जिक्र नहीं किया गया था और हमास शब्द नहीं लिखा गया था, जिसपर अमेरिका की तरफ से कड़ी आपत्ति जताई गई।












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