UNGA में चीन पर हमलावर हुए फिलीपींस के राष्ट्रपति दुर्तेते, पहली ही स्पीच में विस्तारवाद को लेकर उधेड़ी बखिया
मनीला। बुधवार को यूनाइटेड नेशंस जनरल एसेंबली (यूएनजीए) में फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुर्तेते का पहला संबोधन था। महासभा की 75वीं वर्षगांठ पर उन्होंने चीन पर आक्रामक होकर हमला बोला। दुर्तेते ने अपने पहले ही संबोधन में स्पष्ट कर दिया कि उनका देश साउथ चाइना सी पर चीन के दावे को जरा भी नहीं स्वीकारता है। इसके साथ ही उन्होंने साल 2015 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) की तरफ से साउथ चाइना सी पर दिए फैसले का भी जिक्र कर डाला। उन्होंने कहा कि हेग से जो फैसला सुनाया गया था, उसमें चीन को साफ कर दिया गया था वह फिलीपींस के हक में था।

किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने देंगे
राष्ट्रपति दुर्तेते ने यूएनजीए में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि फिलीपींस का साउथ चाइना सी के कई हिस्सों पर अधिकार है और आईसीजे से भी यही फैसला सुनाया गया था। उन्होंने चीन को याद दिलाया कि आईसीजे ने साफ कर दिया था कि साउथ चाइना सी उनके देश के खास इकोनॉमिक जोन के तहत आते हैं। दुर्तेते ने कहा, 'यह पुरस्कार अब अंतरराष्ट्रीय नियम का हिस्सा है, जिस पर समझौता बिल्कुल परे है और कोई भी सरकार इसे न तो मिटा सकती है और न ही छोड़ सकती है।' दुर्तेते ने आगे कहा, 'हम मजबूती के साथ उन कोशिशों को खारिज करते हैं जो इसे कमजोर करने में लगी हुई हैं।' अपने संबोधन के साथ ही दुर्तेते ने लंबे समय से चीन के साथ जारी मैरीटाइम विवाद को फिर से हवा दे दी। वह अब अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों के नेताओं की श्रेणी में आ गए हैं। इन सभी देशों की तरफ से चीन को कई मुद्दों पर घेरा जा रहा है।

साल 2019 से फिलीपींस के साथ तनाव
दुर्तेते को फिलीपींस का राष्ट्रपति चार वर्ष हो चुके हैं। यह पहला मौका था जब उन्हें यूएन में संबोधन के लिए आमंत्रित किया गया था। साउथ चाइना सी पर आया उनका बयान अब तक का सबसे मजबूत बयान माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलीपींस साउथ चाइना सी के सबसे करीब है। चीन के साथ न सिर्फ इसके भौगोलिक और आर्थिक संबंधों के बाद उन्होंने काफी शक्तिशाली होकर अपनी बात रखी है। चीन के बढ़ते प्रभाव की वजह से दुर्तेते को अपने घर में काफी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। कई वर्षों तक चीन के साथ होने वाले टकराव को किनारे रखा गया है। साल 2019 में उस समय चीन के साथ तनाव बढ़ गया था जब चीन की मछली पकड़ने वाली नाव ने फिलीपींस की सीमा में उसकी एक नाव को टक्कर मार दी थी।

डैश लाइनें गैर-कानूनी करार
चीन लगातार इस कृत्रिम द्वीप पर विस्तार को बढ़ाए हुए है और अब वह फिलीपींस के इकोनॉमिक जोन तक आ पहुंचा है। पिछले कुछ वर्षों से चीन, साउथ चाइना सी पर सैन्य जमावड़ा बढ़ा रहा है। वह यहां पर विवादित मूंगे की दिवारों और बाहरी हिस्सों पर अपनी मौजूदगी को बढ़ाता जा रहा है। उसका मकसद ऐसा करके पूरे समंदर पर अपना दावा घोषित करना है। वियतनाम, मलेशिया, ताइवान और इंडोनेशिया का भी साउथ चाइना सी पर दावा है। चीन, साउथ चाइना सी पर स्थित नौ डैश लाइनों के आधार पर अपना दावा ठोंकता है जो साल 1940 से नक्शे में है। साल 2016 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने इसे गैर-कानूनी करार दे डाला था।

क्या कहा था ICJ ने
कोर्ट ने कहा था कि फिलीपींस का 370.4 किलोमीटर तक के हिस्से पर खास अधिकार है। दुर्तेते ने कहा, 'पिछले कुछ समय में कई देश पुरस्कार के समर्थन में आ रहे हैं, यह एक वजह की जीत है, कानून व्यवस्था की जीत है और महत्वाकांक्षा की अधिकता पर जीत है।' हाल के कुछ समय में अमेरिका और भारत समेत कई देशों ने यहां पर अपनी नौसेना के जहाजों को भेजा है। आईसीजे ने अपने फैसले में कहा था कि साउथ चाइना सी पर नौसेनाओं को नेविगेशन की आजादी है। फिलीपींस सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एंटोनिया टी कारपियो ने दुर्तेते के संबोधन का स्वागत किया है।












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