Pentagon Report: भारत में 2026 से पहले होगा एक और अटैक? पाकिस्तान के बाद अब चीन तैयार, यहां टिकी ड्रैगन की नजर
Pentagon Report: अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने हाल ही में कांग्रेस को सौंपी गई रिपोर्ट "चीन से जुड़े सैन्य और सुरक्षा विकास - 2025" जारी की है। यह रिपोर्ट बताती है कि चीन किस तरह अपनी रणनीति, सेना और युद्ध की तैयारी को तेज़ी से आधुनिक बना रहा है, खासकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बड़े टकरावों के लिए। यह कोई सामान्य रिपोर्ट नहीं है, बल्कि चीन की लंबी योजना का पूरा खुलासा है।
PLA को राष्ट्रीय शक्ति के हथियार के रूप में ढालना
रिपोर्ट का मुख्य दावा साफ है-चीन PLA को सिर्फ ताइवान संकट के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग इलाकों में दबाव बनाने, डराने और जरूरत पड़ने पर युद्ध करने के लिए तैयार कर रहा है। इसका एक निशाना अमेरिका की तरफ भी है। सेना अब चीन की विदेश नीति का सीधा औजार बन चुकी है।

भारत के लिए रिपोर्ट में क्या खतरा बताया?
भारत के लिए यह रिपोर्ट इसलिए अहम है क्योंकि इसमें चीन की वही रणनीतियां एक साथ दिखाई देती हैं, जिन्हें भारत पहले से महसूस कर रहा है-
• LAC पर सैन्य दबाव
• हिंद महासागर में बढ़ती मौजूदगी
• तेज़ न्यूक्लियर और मिसाइल एक्सपेंशन
• साइबर और इन्फॉर्मेशन वॉर की तैयारी
• पाकिस्तान को रणनीतिक मोहरे की तरह इस्तेमाल करना
भारत के लिए संकेत
रिपोर्ट बताती है कि चीन की लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें अब पश्चिमी प्रशांत में अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए बड़ा खतरा हैं। भारत के लिए इसका मतलब यह नहीं कि ताइवान दूर की बात है, बल्कि यह कि चीन जिन सैन्य क्षमताओं को बना रहा है, वही हिमालय और हिंद महासागर में भी इस्तेमाल हो सकती हैं। मतलब ताइवान को सिर्फ डायवर्जन बनाकर इस्तेमाल कर भारत को टारगेट किया जा सकता है।
शी जिनपिंग का 2027 लक्ष्य और ताइवान फैक्टर
पेंटागन के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने PLA को 2027 तक बड़े सैन्य लक्ष्य हासिल करने का आदेश दिया है। अमेरिकी आकलन इसे सीधे ताइवान संकट से जोड़ता है। यह चीन की उस बड़ी योजना का हिस्सा है, जिससे वह एशिया का शक्ति संतुलन बदलना चाहता है।
एक ही सैन्य टूलबॉक्स, कई मोर्चे
ISR (खुफिया-निगरानी), सटीक हमला, एयर डिफेंस, साइबर, अंतरिक्ष समर्थन और लॉजिस्टिक्स-ये सभी क्षमताएं अलग-अलग थिएटर में इस्तेमाल हो सकती हैं। यानी चीन एक ऐसा मल्टी-यूज़ टूलबॉक्स बना रहा है, जिसमें भारत कई "संवेदनशील कीलों" के पास बैठा है।
LAC पर शांति: राहत या रणनीतिक जाल?
रिपोर्ट बताती है कि अक्टूबर 2024 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत-चीन ने LAC के कुछ तनावपूर्ण बिंदुओं से पीछे हटने का समझौता किया। इसके बाद बातचीत और सामान्य दिखाने की कोशिशें हुईं। जैसे सब कुछ अब ठीक हो रहा हो।
अरुणाचल कैसे है निशाने पर?
रिपोर्ट साफ करती है कि चीन अरुणाचल प्रदेश को बिना युद्ध के दबाव में लेने की कोशिश कर रहा है-
• जगहों के नाम बदलना
• स्टेपल वीज़ा जैसे संकेत या पर्यटकों के अरुणाचल से होने पर उन्हें रोका जाना
• इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करना
यह सब सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि धीमी जबरदस्ती की तैयारी है।
बिना गोली चलाए दबाव बनाने की रणनीति
PLA को अरुणाचल में युद्ध की जरूरत नहीं है। वह गश्त घुसपैठ, अचानक सैन्य अभ्यास, हवाई दावे, सूचना अभियान और बुनियादी ढांचे के जरिए भारत की शासन लागत बढ़ा सकता है।
अरुणाचल को "सीमांत" नहीं, "मूल राज्य" मानना जरूरी
भारत को अरुणाचल में
• निगरानी और ड्रोन-रोधी सुरक्षा
• सड़क, पुल और एयरफील्ड
• विकास + कूटनीति की मजबूत कहानी
पर तेज़ी से काम करना होगा।
पाकिस्तान से J-10C और नया खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 तक चीन ने पाकिस्तान को 20 J-10C फाइटर जेट दिए। यह चीन का अब तक का इकलौता J-10C निर्यात है। ये 2020 से ऑर्डर की गई कुल 36 यूनिट्स का हिस्सा हैं।
मई 2025 भारत-पाक हवाई संघर्ष और चीनी भूमिका
रॉयटर्स के मुताबिक, पाकिस्तान को मई 2025 के हवाई संघर्ष में बढ़त मिली क्योंकि उसने चीनी सेंसर, डेटा लिंक और J-10C का इस्तेमाल किया। यह सिर्फ प्रतीक नहीं, बल्कि वास्तविक सैन्य बढ़त थी।
पाकिस्तान बना चीन का टेस्ट लैब
भारत के लिए साफ संदेश है-पाकिस्तान चीन के हथियारों के लिए
• तकनीकी
• स्ट्रेटजिक
• नैरेटिव
टेस्ट का ग्राउंड बन रहा है।
साइबर और सूचना युद्ध अब मुख्य हथियार
पेंटागन कहता है कि चीन अमेरिकी नेटवर्क के लिए सबसे बड़ा साइबर खतरा है। संकट के समय वह, बिजली, कम्युनिकेशन और लॉजिस्टिक्स को निशाना बना सकता है।
न्यूक्लियर विस्तार: 600 से 1000+ वारहेड्स
रिपोर्ट के अनुसार,
• 2024 में चीन के पास 600 से कम न्यूक्लियर वारहेड थे
• 2030 तक यह संख्या 1000+ हो सकती है
• DF-31B ICBM का परीक्षण
• "Launch on Warning" रणनीति
यह भारत-पाक संकट के समय चीन के आत्मविश्वास को बढ़ा सकता है।
हिंद महासागर: जहाजों की नहीं, लॉजिस्टिक्स की लड़ाई
रिपोर्ट कहती है कि मुकाबला बड़े नौसैनिक युद्ध से ज़्यादा
• पनडुब्बी एंटी युद्ध
• सी- सर्विलांस
• पाकिस्तान की उपस्थिति पर केंद्रित होगा।
चीन की कमजोरियां
रिपोर्ट यह भी मानती है कि PLA में भ्रष्टाचार, युद्ध का कम अनुभव, इंजन और तकनीकी बाधाएं, विदेशों में मिलिट्री बेस अभी पूरी तरह सक्षम नहीं होना उसके लिए बड़ी रणनीतिक कमजोरी है। लेकिन चीन इन कमियों से तेज़ी से सीख रहा है। अगला एक दशक भारत के लिए तैयारियों का दशक होगा। यही तैयारियां आगे की सुरक्षा और युद्ध की तस्वीर को तय करेंगी।
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