Pakistan: पाकिस्तान में निष्पक्ष चुनाव की संभावनाएं समाप्त, अक्टूबर में इलेक्शन से शहबाज ने ऐसा क्या किया है?

Pakistan Election 2023: पाकिस्तानी अखबार डॉन ने दावा किया है, कि पाकिस्तान में शहबाज शरीफ की सरकार ने पिछले कुछ दिनों में जो नियम बनाए हैं, उसके बात ये साफ हो चुका है, कि पाकिस्तान में आगामी चुनाव निष्पक्ष होने से कोसों दूर रहने वाले हैं।

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ की सरकार और उसकी सबसे बड़ी सहयोगी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, इस बात पर सहमत हुए हैं, कि पाकिस्तान में जो केयरटेयर की सरकार बनेगी, उसके प्रधानमंत्री 'तटस्थ' होंगे, क्योंकि अगर किसी ब्यूरोक्रेट को कार्यहावक प्रधानमंत्री बनाया जाता है, तो वो सेना के इशारे पर काम कर सकता है।

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लिहाजा, अब किसी नेता को पाकिस्तान का अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया जाएगा और फिलहाल मौजूदा वित्त मंत्री इशाक डार का नाम अंतरिम प्रधानमंत्री की रेस में सबसे आगे चल रहा है, जिनके कार्यकाल में पाकिस्तान को आईएमएफ से ऋण मिला है।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है, कि उनका गठबंधन एक ऐसे राजनेता की तलाश कर रहा है, जो यह सुनिश्चित कर सके, कि देश में चुनाव तय समय पर हों और वो सरकार चुनाव के दौरान आने वाली बाधाओं को दूर करने के अलावा, चुनाव के बाद आसानी से नई सरकार के हाथों में सत्ता सौंप सके।

निष्पक्ष चुनाव की संभावनाएं खत्म

अंतरिम प्रधान मंत्री के लिए पीएमएल-एन, यानि शहबाज शरीफ की पार्टी के उम्मीदवार के रूप में वित्त मंत्री इशाक डार का नाम सामने किया गया है, लेकिन शहबाज सरकार ने इसके साथ साथ, जो अंतरिम सरकार होगी, उसके हाथों में कई तरह की नई विधायी शक्तियां सौंपने का प्लान तैयार किया गया है।

यानि, इशाक डार के नेतृत्व में जिस अंतरिम सरकार का गठन किया जाएगा, वो शहबाज शरीफ की पार्टी को चुनाव में जीत दिलाने के लिए काम करेगी।

इसके लिए पाकिस्तान में आज ही 'संसद का अपमान अधिनियम' संसद के दोनों सदनों से पारित किया गया है, जिसके तहत अगर कोई नेता, संसद का अपमान करता है, तो उसे जेल की सजा होगी। जाहिर है, विपक्ष का गला दबाने के लिए ही ये कानून संसद के जरिए तैयार किया गया है और इसका इस्तेमाल, इशाक डार विपक्ष का मुंह बंद करने के लिए करेंगे।

डॉन के मुताबित, पीएमएल-एन के अंदरूनी सूत्रों ने कहा है, कि नवाज शरीफ ने "स्पष्ट कर दिया है" कि अंतरिम पीएम सरकार की पसंद का होगा, "चाहे कुछ भी हो"। यह उस प्रतिष्ठान के लिए एक संदेश के समान है, जिसके बारे में अफवाह है, कि वह पीएम की रेस में अपने घोड़े का समर्थन कर रहा है।

लेकिन क्या कोई अंतरिम व्यवस्था जो स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण हो, या तो किसी राजनीतिक समूह या प्रतिष्ठान के पक्ष में, वो निष्पक्ष चुनाव कर सकता है?

जाहिर तौर पर, पीएमएल-एन इससे बेहतर कुछ नहीं चाहेगी, लेकिन ऐसा नहीं लगता, कि पीपीपी भी इस पर उसका समर्थन कर रही है।

सोमवार को, पीपीपी की शेरी रहमान ने स्पष्ट किया, कि उनकी पार्टी इशाक डार को अंतरिम पीएम के लिए उम्मीदवार नहीं मानती है, क्योंकि उनकी उम्मीदवारी पर अभी तक पीपीपी के साथ "चर्चा" नहीं की गई है।

पाकिस्तानी मीडिया में यह रिपोर्ट आने के बाद, कि इशाक डार को इस पद के लिए विचार किया जा रहा है, पीपीपी खेमे में बहुत आक्रोश है, कई लोगों ने यहां तक कहा, कि शरीफ कबीले से किसी की नियुक्ति "अस्वीकार्य" होगी।

यहां यह याद रखना जरूरी है, कि इस साल की शुरुआत में पंजाब और केपी विधानसभा चुनावों में देरी के लिए संविधान का उल्लंघन करने का सरकार का औचित्य इस तर्क पर आधारित था, कि दोनों प्रांतों में निर्वाचित सरकार होने से कुछ महीनों बाद वहां स्वतंत्र और निष्पक्ष आम चुनाव कराना 'असंभव' हो जाएगा।

यानि, शहबाज सरकार राज्य और केन्द्र के लिए डबल गेम खेल रही है।

शहबाज सरकार के लिए अब चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक तटस्थ व्यवस्था की आवश्यकता पर यू-टर्न लेना एक तरह का पाखंड है। कानून में ऐसा कुछ भी नहीं हो सकता है, जो किसी राजनीतिक दल से जुड़े किसी व्यक्ति को अंतरिम व्यवस्था का हिस्सा बनने से रोकता हो, लेकिन पाकिस्तान को अगर अपनी आर्थिक स्थिति सुधारनी है, तो उसे निश्चित तौर पर निष्पक्ष चुनाव में जाने की जरूरत है।

लिहाजा, किसी ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करना, जो इस पक्ष या उस पक्ष का वफादार हो, इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता को बहुत नुकसान पहुंचाएगा। लेकिन, शहबाज शरीफ ने सौ से ज्यादा मुकदमे लादकर पहले ही इमरान खान की पार्टी को ध्वस्त कर दिया है, ऐसे में अब पाकिस्तान में निष्पक्ष चुनाव की सारी संभावनाएं खत्म हो गईं हैं और अगली सरकार शहबाज शरीफ की पार्टी का ही बनना तय हो गया है।

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