डॉलर के सामने बुरी तरह से टूटा पाकिस्तानी रुपया, धूल फांकने पर मजबूर अर्थव्यवस्था, बेबस हुए शहबाज
पाकिस्तान लंबे समय से अमेरिका की टुकड़ियों पर पलता रहा है। अमेरिकी पैसों पर भारत के खिलाफ आंतक को हवा देता रहा है।
इस्लामाबाद, जुलाई 19: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हुए उपचुनाव में इमरान खान की पार्टी की बंपर जीत से पाकिस्तानी बाजार बुरी तरह से घबरा गया है और सोमवार को अमेरिकी डॉलर के सामने पाकिस्तानी रुपया धूल फांकता नजर आया। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की जीत के बाद इमरान खान के फिर से सत्ता में वापस आने की आहट मिलने लगी है और इसी बात के डर से पाकिस्तान बाजार औंधे मुंह गिरा है और रुपया अब तक के सबसे नीचले स्तर पर पहुंच गया है। इमरान खान की पार्टी की जीत ना सिर्फ शरीफ परिवार के लिए, बल्कि पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था के लिए भी बुरी खबर बनकर आई है।

धूल फांक रहा है पाकिस्तानी रुपया
रिपोर्ट के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपये का बुरा हाल हो गया है और एक डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपये का वैल्यू 215 हो गया है। वहीं, इमरान खान की पार्टी को मिली जीत के बाद पाकिस्तानी स्टॉक एक्सचेंज भी घबराया नजर आया और कराची स्टॉक एक्सचेंज शेयर बाजार 700 अंकों तक गिर गया। सभी वित्तीय विश्लेषकों ने कहा कि राजनीतिक अनिश्चितता के कारण विदेशी मुद्रा और स्टॉक एक्सचेंज ट्रेडिंग में गिरावट आई है। अंतरबैंक व्यापार में दोपहर तक पाकिस्तानी रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4.3 रुपये की गिरावट के साथ टूट गया। पिछले हफ्ते 210.95 पर बंद होने के बाद डॉलर 215.25 रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर कारोबार कर रहा था। टॉपलाइन सिक्योरिटीज के एक वित्तीय विश्लेषक फैसल नवाज ने कहा कि, एक दिन पहले पंजाब उपचुनाव के नतीजों से उत्पन्न राजनीतिक अनिश्चितता ने बाजार में भी अनिश्चित स्थिति पैदा कर दी है। उन्होंने कहा, "व्यापार प्रभावित हो रहा है क्योंकि कोई भी निश्चित नहीं है कि अब क्या होगा और केंद्र सरकार कब तक चलेगी।"

नवाज शरीफ का IMF पर निशाना
वहीं, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से समझौता करने के लिए सरकार ने जो 'मुश्किल फैसले' किए हैं उसी के कारण सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) पंजाब विधानसभा उप चुनाव में हारी है। मीडिया में सोमवार को जारी एक खबर में यह जानकारी दी गयी। आपको बता दें कि, पंजाब की 20 में से 18 सीटों पर इमरान की पार्टी ने चुनाव जीते हैं। इससे पहले साल 2018 में पाकिस्तान में आम चुनाव हुए थे। इस चुनाव में भी इमरान खान की पार्टी को इतनी सीटें हासिल नहीं हुई थीं, जितनी इस बार पीटीआई ने वहां जीत ली है। इमरान खान को अप्रैल में अपदस्थ किये जाने के बाद से उनकी पार्टी 'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ' (पीटीआई) और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पार्टी 'पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज' (पीएमएल-एन) के बीच यह पहला प्रमुख चुनावी मुकाबला था। चुनाव के ये नतीजे शहबाज के बेटे मुख्यमंत्री हमजा शहबाज के लिए खतरे की घंटी है। वह पंजाब प्रांत के सीएम का अपना पद खोने वाले हैं।

इमरान खान से क्यों डरा बाजार?
पाकिस्तान लंबे समय से अमेरिका की टुकड़ियों पर पलता रहा है। अमेरिकी पैसों पर भारत के खिलाफ आंतक को हवा देता रहा है। लेकिन जब से भारत से अमेरिका के संबंध बेहतर हुए हैं, पाकिस्तान की फंडिंग पर लगाम लगा है। हालांकि आईएमएफ जरूर पाकिस्तान को उबारने का प्रयास कर रहा है मगर इमरान जब सत्ता में थे तब उन्होंने आईएमएफ की शर्त न मानकर कई ऐसे लोकलुभावन फैसले लिए जिसने पाकिस्तान को और गर्त में ढकेल दिया। अमेरिकी मदद भी पाकिस्तान को तभी मिल सकेगी जब इमरान सत्ता से दूर होंगे। वहीं, प्रधानमंत्री रहते हुए इमरान खान ने पाकिस्तान के अमेरिका के साथ संबंध काफी खराब कर दिए थे और बाजार को डर है, कि अगर इमरान खान फिर से सत्ता में लौटते हैं, तो आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान को कई बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है।

आईएमएफ की शर्तों का उल्लंघन
इमरान के सत्ता में लौटते ही अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष फिर से पाकिस्तानी लोन पर रोक लगा सकता है, क्योंकि इमरान खान ने प्रधानमंत्री रहते हुए ना सिर्फ आईएमएफ की शर्तों तो तोड़ दिया था, बल्कि आईएमएफ की काफी आलोचना भी की थी। वहीं, जब शहबाज शरीफ ने जब सत्ता संभाली, तो उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए जिनकी वजह से उन्हें जमकर आलोचना का सामना करना पड़ा। शरीफ ने ऊर्जा की कीमतों को बढ़ा दिया और साथ ही कई टैक्सों में भी इजाफा किया। ये सब कुछ शरीफ IMF से 1.2 बिलियन डॉलर का लोन लेने के लिए कर रहे थे। पिछले दिनों पाक सरकार और IMF के बीच हुए एक समझौते ने पाक की कर्ज मिलने की उम्मीदों को बढ़ा दिया था। वहीं, पाकिस्तान के पास अब सिर्फ 8 अरब डॉलर का ही मुद्रा भंडार बचा है, लिहाजा देश के भीषण आर्थिक संकट में फंसने की आशंका है और इसलिए बाजार नहीं चाहता है, कि इमरान खान फिर से सत्ता में लौटें।

मुश्किल स्थिति में फंसा है पाकिस्तान
आपको बता दें कि, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस वक्त काफी तेजी से बिगड़ रही है और पाकिस्तान को अगर फौरन मदद नहीं मिली, को देश के हालात अगले कुछ महीनों में श्रीलंका जैसे ही हो जाएंगे। कुछ अनुमानों में इस वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान का चालू खाता घाटा लगभग 17 अरब डॉलर या उसकी जीडीपी से 4.5% से ज्यादा हो गया है। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने इस महीने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा है कि, फरवरी के अंत में पाकिस्तान के पास 16.3 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था, जिसमें 8 अरब डॉलर और खत्म हो चुके हैं और पाकिस्तान के पास अब सिर्फ करीब 8 अरब डॉलर का ही विदेशी मुद्रा भंडार बचा है। वहीं, पाकिस्तान की फाइनेंस टीम कतर की राजधानी दोहा में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ बातचीत कर रही है।












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