भारत के खिलाफ जहर उगलने वाला पाकिस्तान है 12 आतंकी संगठनों का घर, यूएस रिपोर्ट में इमरान को आईना

अमेरिकी कांग्रेस की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में इस वक्त 12 आतंकी संगठन चल रहे हैं और पाकिस्तान इनके लिए सुरक्षित घर बना हुआ है।

वॉशिंगटन/इस्लामाबाद, सितंबर 29: बात-बात पर भारत के खिलाफ जहर उगलने वाला पाकिस्तान 12 आतंकवादी संगठनों का घर है। बात बात पर बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा पर तंज कसने वाले इमरान खान खुद दर्जन भर आतंकी संगठनों की सेवा कर रहे हैं और पाकिस्तान की जनता को इतना कट्टरपंथी बना रहे हैं कि इन आतंकी संगठनों के खिलाफ देश की जनता भी चुप रहती है। इन आतंकी संगठनों में हर संगठन का मकसद अलग अलग है, लेकिन उनका गोल एक ही है, विश्व की शांति बर्बाद करना।

12 आतंकी संगठनों का घर

12 आतंकी संगठनों का घर

अमेरिकी संसद कांग्रेस की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि, पाकिस्तान में कम से कम 12 चिन्हित विदेशी आतंकवादी संगठन काम कर रहे हैं। ये 12 वो आतंकी संगठन हैं, जिन्हें अमेरिका ने चिन्हित कर प्रतिबंधित कर रखा है, इसके अलावा भी दर्जनों आतंकी संगठन पाकिस्तान में चल रहे हैं। इन 12 आतंकवादी संगठनों में पांच आतंकी संगठनों के पास भारत में शांति भंग करने की जिम्मेदारी है। अमेरिकी संसद की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान से चलने वाले अमेरिका द्वारा चिन्हित इन आतंकवादी संगठनों को उनके उद्येश्य के हिसाब से अलग अलग वर्गों में बांटा गया है। जिनसे पता चला है कि कुछ आतंकी संगठन की जिम्मेदारी दुनिया में इस्लाम के नाम पर आतंकी घटनाओं को अंजाम देना है, तो कुछ संगठनों के पास अफगानिस्तान की जिम्मादेरी है और कुछ आतंकी संगठनों के पास भारत का 'विभाग' है तो कुछ आतंकी संगठनों का काम शिया मुसलमानों को मारना है।

आंतकी संगठनो में सांठगांठ

आंतकी संगठनो में सांठगांठ

अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है इन आतंकवादी संगठनों के बीच आपसी रिश्ते हैं और ये एक दूसरे की मदद करने के अलावा एक दूसरे को अलग अलग सलाह देते रहते हैं। इसके साथ ही 'कांग्रेशनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस)' ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका ने पाकिस्तान की पहचान एक ऐसे देश के तौर पर की है, जो आतंकवादियों के लिए सबसे सुरक्षित घर हो, जहां आतंकियों को ट्रेनिंग के साथ साथ आतंकी हमले करने के बारे में बताया जाता है और जहां से ये आतंकवादी, आतंकवादी घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि, इनमें से कुछ आतंकवादी संगठन 1980 के दशक से अस्तित्व में हैं।

एफएटीएफ की ग्रे-लिस्ट में है पाकिस्तान

एफएटीएफ की ग्रे-लिस्ट में है पाकिस्तान

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने 2018 में पाकिस्तान को "ग्रे लिस्ट" में डाल दिया था, क्योंकि देश में मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग का मुकाबला करने में "रणनीतिक कमियां" पाई गई थी। पाकिस्तान को 27 बिंदुओं का एक टास्क दिया गया था और उन्हें पूरा करने के बाद ही ग्रे लिस्ट से निकालने की बात कही गई थी। पाकिस्तान दावा करता है कि उसने 27 में से 26 बिंदुओं को पूरा कर लिया है, लेकिन एफएटीएफ ने पाकिस्तान की बात नहीं मानी और उसे ग्रे लिस्ट में ही रखा हुआ है। इसके पीछे वजह ये है कि संयुक्त राष्ट्र ने भी जिन आतंकी संगठनों और जिन आतंकियों को मोस्ट वांटेड करार दिया हुआ है, उनके खिलाफ पाकिस्तान में कोई कार्रवाई नहीं होती है।

तालिबान को पहुंचाई मदद

तालिबान को पहुंचाई मदद

पाकिस्तान पर पिछले महीने अफगानिस्तान में सत्ता वापस लेने वाले तालिबान को सहायता देने का आरोप लगाया गया है। 2002 में अमेरिका ने तालिबान को ग्लोबल आतंकवादी संगठन के तौर पर नामित किया था, लेकिन फिर भी पाकिस्तान लगातार तालिबान की मदद करता रहा। अफगानिस्तान में अमेरिकी कब्जे के दो दशकों के दौरान, अफगान तालिबान का नेतृत्व मुख्य रूप से पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा से संचालित होता था, साथ ही कराची और पेशावर में भी तालिबान का ऑफिस रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया था, तो पाकिस्तान ने ही अलकायदा के आतंकियों को छिपने के लिए अपने देश में जगह दे दी थी।

पाकिस्तान में अलकायदा

पाकिस्तान में अलकायदा

रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान से भागकर अलकायदा के आतंकी मुख्य रूप से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और कराची में शिफ्ट हो गये। 2011 से अल कायदा का नेतृत्व अयमान अल-जवाहिरी कर रहा है और कथित तौर पर कई अन्य आतंकवादी समूहों के साथ भी इसका संबंध है। और ये पाकिस्तानी नागरिक है, जो अभी भी पाकिस्तान में ही रहता है। वहीं, भारतीय उपमहाद्वीप में अल कायदा की स्थिति पर अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया में अलकायदा के अनुमानित कई सौ सदस्यों मौजूद हैं, जिन्होंने पाकिस्तान के अंदर रहते हुए सैकड़ों आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया है।

पाकिस्तान में 12 एक्टिव आतंकी संगठन

पाकिस्तान में 12 एक्टिव आतंकी संगठन

इस्लामिक स्टेट-खोरासन प्रांत, इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया और उनके कई क्षेत्रीय सहयोगी आतंकी संगठन पाकिस्तान में मौजूद हैं, जिनके करीब 1,500-2,200 लड़ाके और शीर्ष आतंकियों को पाकिस्तान में सुरक्षित रखा गया है। वहीं, ज्यादातर आतंकी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के पूर्व सदस्य हैं। आईएसआईएल-के काबुल हवाई अड्डे के बाहर हाल ही में हुए आत्मघाती बम विस्फोट के लिए जिम्मेदार था, जिसमें करीब दो सौ लोगों की जान चली गई थी। पाकिस्तान में इसके अलावा हक्कानी नेटवर्क भी 1980 के दशक के अंत में स्थापित है। हक्कानी नेटवर्क को 2012 में एक विदेशी आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया गया था। समूह के संस्थापक जलालुद्दीन हक्कानी के बेटे सिराजुद्दीन अब अफगानिस्तान के कार्यवाहक आंतरिक मंत्री बन गया है। बताया जा रहा है कि इस आतंकी संगठन में करीब तीन हजार से पांच हजार आतंकवादी पूरी तरह से एक्टिव हैं। हक्कानी नेटवर्क के बारे में कहा जाता है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ इलके संबंध हैं।

भारत के खिलाफ पांच आतंकी संगठन

भारत के खिलाफ पांच आतंकी संगठन

  • लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी)- पाकिस्तान में 1980 के दशक के अंत में गठित, आतंकवादी समूह मुंबई में 26/11 के हमलों सहित विभिन्न हाई-प्रोफाइल हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है। लश्कर-ए-तैयबा को 2001 में एक एफटीओ के रूप में नामित किया गया था। यह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर दोनों में स्थित है।
  • जैश-ए-मोहम्मद - आतंकी संगठन की स्थापना मसूद अजहर ने 2000 में की थी और इसे 2001 में FTO के रूप में नामित किया गया था। LeT के साथ JeM भारतीय संसद पर हमले के लिए जिम्मेदार था। पाकिस्तान के पंजाब और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर दोनों में स्थित, JeM के कई सौ सशस्त्र समर्थक भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में काम करते हैं, और कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाने की मांग करते हैं। जैश-ए-मोहम्मद ने तो खुले तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ युद्ध लड़ने की घोषणा कर रखी है।
हिज्ब-उल मुजाहिदीन और टीटीपी

हिज्ब-उल मुजाहिदीन और टीटीपी

  • हिज़्ब-उल मुजाहिदीन- 1989 में इस आतंकी संगठन की स्थापना की गई थी। पाकिस्तान के सबसे बड़े इस्लामी राजनीतिक दल के आतंकवादी विंग को 2017 में एफटीओ के रूप में नामित किया गया था। यह कश्मीर में सक्रिय सबसे बड़े और सबसे पुराने आतंकवादी समूहों में से एक है। हालांकि कश्मीर स्थित, हिज़्ब-उल मुजाहिदीन के पास भी पाकिस्तान से ही पैसा आता है, जिसके ज्यादातर कमांडर्स को अब इंडियन आर्मी मार चुकी है।
  • तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) - पाकिस्तान ने 2007 में गठित इस आतंकवादी संगठन पर प्रतिबंध लगा रखा है, क्योंकि ये पाकिस्तान में शरीया कानून लागू करना चाहता है। बड़े पैमाने पर जातीय पश्तून आतंकवादियों से बना टीटीपी नेतृत्व 2014 में पाकिस्तानी सैन्य अभियानों के जवाब में पूर्वी अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में भाग गया था। अल कायदा से संदिग्ध संबंध, टीटीपी सदस्य पाकिस्तान की सरकार को हराने और खैबर पख्तूनख्वा में शरिया कानून स्थापित करना चाहते हैं।

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