अफगानिस्तान की स्थिरता खत्म करना चाहता है पाकिस्तान, राष्ट्रपति अशरफ गनी ने पीएम मोदी से कहा
पीएम नरेन्द्र मोदी से मीटिंग के दौरान अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने पाकिस्तान पर देश की स्थिरता खराब करने का आरोप लगाया है।
नई दिल्ली/काबुल: अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने पाकिस्तान पर देश की स्थिरता खराब करने का आरोप लगाया है। अफगानिस्तान के राष्ट्पति ने कहा है कि कुछ देश नहीं चाहते हैं कि अफगानिस्तान में शांति की स्थापना हो लिहाजा वो अफगानिस्तान की धरती पर आतंकी तत्वों को लगातार बढ़ावा दे रहे हैं ऐसे में वैश्विक समुदाय को आगे आकर उन देशों को रोकना चाहिए जो आतंकवादियों को अपनी जमीन पर पालते हैं। हालांकि, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने अपने बयान में पाकिस्तान का नाम नहीं लिया है, लेकिन अफगानिस्तानी मीडिया ने दावा किया है, कि राष्ट्रपति का इशारा पाकिस्तान की तरफ था।

'अफगानिस्तान को अस्थिर करता है पाकिस्तान'
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने मंगलवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ वर्चुअल मीटिंग की थी। जिसमें उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर उसपर निशाना साधा है। राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा कि अगर वर्तमान में अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया नाकाम हो जाती है तो फिर एक बार फिर से अफगानिस्तान अनिश्चितता की तरफ बढ़ जाएगा। और कुछ मुल्क ऐसा चाहते हैं कि अफगानिस्तान में शांति की स्थापना नहीं हो सके। राष्ट्रपति अशरफ गनी ने मीटिंग के दौरान कहा कि अगर अफगानिस्तान की शांति खराब होती है तो यह क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए बेहद खतरनाक होगा।
अफगानिस्तानी मीडिया टोलो न्यूज ने राष्ट्रपति अशरफ गनी के बयान के बाद लिखा है कि 'राष्ट्रपति अशरफ गनी ने अप्रत्यक्ष तौर पर पाकिस्तान को अफगानिस्तान में शांति बिगाड़ने के लिए उत्तरदायी ठहराया है। राष्ट्रपति ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वो उन देशों को रोके जो शांति खराब करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे देशों को अफगानिस्तान की राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए और आतंकवाद को पनाह नहीं देना चाहिए। राष्ट्रपति गनी ने ये भी कहा कि अफगानिस्तान के अंदरूनी मामलों में ऐसे देशों को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए'
'आतंकरिक मामलों में दखलअंदाजी हो बंद'
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने पीएम मोदी के साथ वर्चुअल बैठक में कहा कि 'अंतर्राष्ट्रीय समुदाय उन देशों से कहे कि शांति प्रक्रिया में शामिल होने का मतलब ये नहीं है कि वो आंतरिक मामलों में दखलअंदाजी करें और हमारी संप्रुभता का उल्लंघन करें। खुदा ना करे कि अफगानिस्तान एक बार फिर से अनिश्चितता की तरफ बढ़े'
आपको बता दें कि अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया में शामिल देशों में अमेरिका के अलावा पाकिस्तान शामिल है। पाकिस्तान पर लंबे वक्त से तालिबान को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं। पिछले महीने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने अफगानिस्तान का दौरा किया था और दोनों देशों के बीच सरहद पर काफी तनाव भी रहता है।

तालिबान का साथी पाकिस्तान
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति जानते हैं कि पाकिस्तान की शह के बिना तालिबान फल-फूल नहीं सकता है। दरअसल, पाकिस्तान कभी नहीं चाहता है कि अफगानिस्तान में शांति की स्थापना हो। पाकिस्तान की इस मंशा के पीछे दो बड़ी वजहे हैं। पहली वजह अफगानिस्तान की चुनी हुई सरकार लोकतांत्रिक और मजहबी स्वतंत्रता का सम्मान करती है और दूसरी वजह ये है कि जबतक तालिबान जिंदा रहेगा तभी तक पाकिस्तान को अमेरिका से खैरात मिलता रहेगा।
एक तरह से कहें तो तालिबान पाकिस्तान के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी है। लिहाजा जैसे ही अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की बात की, ठीक वैसे ही पाकिस्तान खुश हो गया। पाकिस्तान इसलिए खुश हुआ, क्योंकि अमेरिकी सैनिकों के निकलते ही तालिबान फिर से सिर उठा लेगा और तालिबान का मकसद अफगानिस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म कर 'कबीला राज' की स्थापना करना है।
क्या था डोनाल्ड ट्रंप का 'तालिबान प्लान'
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने तालिबानी नेताओं के साथ पिछले साल फरवरी में कतर की राजधानी दोहा में एक शांति समझौते पर दस्तखत किया था। जिसके मुताबिक अमेरिका ने तालिबानी नेताओं को आश्वासन दिया था कि धीरे धीरे अफगानिस्तान की जमीन से अमेरिका अपनी सेना को हटा लिया। इसके बदले में तालिबानी नेताओं ने किसी तरह की हिंसक वारदातों को रोकने का डील किया था। इस डील के तहत डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी फौज को अफगानिस्तान से बुलाना शुरू कर दिया।
पिछले 14 महीनों में अफगानिस्तान से 12 हजार जवानों को अमेरिका बुलाया जा चुका है। अब अफगानिस्तान में सिर्फ 2500 अमेरिकी जवान ही बचे हैं। अब जो बाइडेन प्रशासन ने कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान को लेकर जो फैसला लिया था वो पूरी तरह से सही था और अमेरिका उसी फैसले के तहत आगे बढ़ेगा। अमेरिकी NSA ने कहा कि हम अफगानिस्तान सरकार और तालिबानी नेताओं के बीच मध्यस्तता कराने को पूरी तरह से तैयार हैं, जो US-तालिबान एग्रीमेंट का अहम भाग है।
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