तालिबान के 'विदेश मंत्री' बने इमरान खान, चीन के साथ मिलकर बनाया 'द ग्रेट अफगानिस्तान प्लान'
पाकिस्तान और चीन ने साफ कर दिया है कि उसे तालिबान को मान्यता देने में कोई ऐतराज नहीं है और अब दोनों देश मिलकर तालिबान के लिए अलग अलग देशों से बात करेंगे।
इस्लामाबाद, अगस्त 18: काबुल पर तालिबान का कब्जा होने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान ने गुलामी की बेड़ियां तोड़ दी है और ऐसा लग रहा है कि इमरान खान तालिबान के विदेश मंत्री बन गये हैं और तालिबान को मान्यता दिलाने के लिए चीन के साथ मिलकर प्लान बना रहे हैं। तालिबान को मान्यता देने का फैसला पाकिस्तान और चीन कर चुका है, लेकिन इमरान खान और शी जिनपिंग की कोशिश है कि कुछ और देशों को भी अपनी टीम में शामिल कर लिया जाए। इसके लिए पाकिस्तान ने चीन, तुर्की, ईरान और ताजकिस्तान से संपर्क करना शुरू कर दिया है।

तालिबान के साथ पाकिस्तान सरकार
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से तालिबान को मान्यता दिलाने को लेकर बात की है। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, पाकिस्तान और चीन के विदेश मंत्रियों ने तय किया है कि तालिबान को मान्यता दिलाने के लिए वो दूसरे देशों से बात करेंगे। वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि तालिबान को मान्यता दिलाने के लिए वो अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों से बातचीत करेंगे। पाकिस्तानी विदेश मंत्राालय ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि अफगानिस्तान के मुद्दे को लेकर शाह महमूद कुरैशी और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ फोन पर बात हुई है, जिसमें दोनों देशों के विदेश मंत्री तालिबान को लेकर अलग अलग देशों का दौरा करने और चीन-पाकिस्तान के साझा हितों को लेकर सहमत हुए हैं।

तालिबान को मान्यता दिलाने की तैयारी
दरअसल, काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद चीन की तरफ से आई प्रतिक्रिया में साफ कर दिया गया कि वो तालिबान के साथ दोस्ताना संबंध बनाने का पक्षधर है और तालिबान को समर्थन देने में उसे कोई ऐतराज नहीं है। चीनी सरकार के एक प्रवक्ता ने सोमवार को कहा था कि, "तालिबान ने बार-बार चीन के साथ अच्छे संबंध विकसित करने की आशा व्यक्त की है, और वे अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और विकास में चीन की भागीदारी के लिए तत्पर हैं।" वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने खुलकर तालिबान का पक्ष ले लिया। जबकि, पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया है कि पाकिस्तान सरकार तालिबान को मान्यता देने की तैयारी में है। वहीं, इमरान खान की पार्टी के कई सांसदों ने तालिबान का स्वागत किया है।

इस्लामी सरकार की स्थापना में सहयोग
चीन की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि ''तालिबान देश में सत्ता अपने हाथों में ले और एक खुली और समावेशी इस्लामी सरकार का निर्माण अफगानिस्तान में करे, उससे चीन को कोई एतराज नहीं है, बस तालिबान विदेशी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अपना वादा पूरा करे''। वहीं, पाकिस्तानी विदेश मंत्री कुरैशी ने हाल ही में हुई राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक को लेकर कहा कि अफगानिस्तान के मुद्दे पर पाकिस्तान का राय साफ है कि क्षेत्रीय शक्तियों के बीच तालिबान को लेकर एक राय कायम की जाए।

अंतर्राष्ट्रीय मदद की मांग
पाकिस्तान ने इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भी अफगानिस्तान के मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। दरअसल, पाकिस्तान का इरादा तालिबान को एक उदारवादी संगठन साबित करते हुए उसे मान्यता दिलाने की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि ''पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र के लिए एक शांतिपूर्ण और स्थिर अफगानिस्तान बेहद महत्वपूर्ण है और वो अफगानिस्तान में बनने वाली समावेशी सरकार का समर्थन करेगा''। इसके लिए पाकिस्तान ने अब अलग अलग देशों से बातचीत कर रहा है। खासकर पाकिस्तान की कोशिश है कि पड़ोसी देश, जैसे ईरान, चीन और तुर्की, जल्द से जल्द तालिबान को कबूल कर लें, और फिर बाकी देशों को मनाने की कोशिश की जाएगी।

तालिबान की 'आर्थिक मदद'
इसके साथ ही शाह महमूद कुरैशी ने अफगानिस्तान के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से सहायता देने की मांग करते हुए आर्थिक सहायता देने की मांग की है''। विदेश मामलों के जानकारों का कहना है कि अफगानिस्तान में सरकार चलाने के लिए तालिबान को काफी ज्यादा पैसों की जरूरत होनी है और पाकिस्तान खुद कंगाली के दौर से गुजर रहा है और चीन ने आर्थिक मदद देने से मना कर दिया है, लिहाजा पाकिस्तान ने तालिबान की पैरवी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से करनी शुरू कर दी है और अफगानिस्तान के लिए पैसे मांगना, पाकिस्तान के उसी ग्रेट प्लान का एक हिस्सा है। पाकिस्तानी अखबार के मुताबिक, कुरैशी और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच फोन कॉल अफगानिस्तान की स्थिति पर एक क्षेत्रीय सहमति बनाने की पाकिस्तान की कोशिश है। दरअसल, पाकिस्तान की कोशिश है कि वो अकेले नहीं, बल्कि कई देशों के साथ मिलकर तालिबान को मान्यता, ताकि सिर्फ उसपर ऊंगली ना उठे।

तालिबान पर चीन के मन में क्या है?
चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी की मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने चीन के लोगों को कहा है कि तालिबान एक असलियत और उसे स्वीकार करने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि ''चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी को इस्लामिक चरमपंथी संगठन को मान्यता देने में हिचकिचाना नहीं चाहिए''। चीन की सरकारी मीडिया ने पिछले दिनों एक के बाद एक कई आर्टिकिल अफगानिस्तान को लेकर प्रकाशित की है, जिसमें कहा गया है कि तालिबान को मान्यता नहीं देना चीन की विदेश नीति के लिए अच्छा नहीं होगा। इसके साथ ही ग्लोबल टाइम्स में चीन के विदेश मंत्री वांग यी को तालिबान के साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़ा दिखाया गया था।
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