Pakistan Economy: पाकिस्तान का डिफॉल्ट होना लगभग पक्का, न IMF ना वर्ल्ड बैंक से मिलेगा लोन, जानें क्या होगा?
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहराई से नजर रखने वाली ट्विटर अकाउंट 'इकोनॉमी ऑफ पाकिस्तान' के मुताबिक, आईएमफ और पाकिस्तान के बीच बातचीत फेल हो गई है।

वहीं, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहराई से नजर रखने वाली ट्विटर अकाउंट 'इकोनॉमी ऑफ पाकिस्तान' ने 92 न्यूज की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है, कि अगर वाकई पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच की बातचीत फेल हो गई है, तो इसका मतलब ये हुआ, कि पाकिस्तानी मुद्रा का डॉलर के मुकाबले 50 प्रतिशत और पतन हो जाएगा। वहीं, पाकिस्तान में महंगाई में 75 प्रतिशत का इजाफा हो जाएगा।
वर्ल्ड बैंक ने भी दिया झटका
वहीं, द न्यूज ने मंगलवार को बताया है, वर्ल्ड बैंक ने भी पाकिस्तान को कर्ज की अगली किश्त देने से इनकार कर दिया है। वर्ल्ड बैंक से पाकिस्तान को 450 मिलियन डॉलर का लोन मिलने वाला था, लेकिन वर्ल्ड बैंक ने कर्ज की इस किश्त को आईएमएफ कार्यक्रम से जोड़ दिया है।
इसका मतलब ये हुआ, कि अगर आईएमएफ प्रोग्राम की बहाली होती है, तभी पाकिस्तान को वर्ल्ड बैंक से भी लोन मिलेगा, अन्यथा लोन नहीं मिलेगा। ये पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा झटका है और माना जा रहा है, कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अब कभी भी चरमरा सकती है।
मूडी ने कहा- पाकिस्तान हो जाएगा डिफॉल्ट
वहीं, ब्लूमबर्ग ने बताया है, कि मूडीज इन्वेस्टर सर्विस ने चेतावनी दी है, कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) कार्यक्रम के बिना पाकिस्तान डिफ़ॉल्ट हो सकता है, क्योंकि पाकिस्तान को जून महीने में कई तरह के कर्ज का भुगतान करना है, लेकिन पाकिस्तान के पास पैसे नहीं हैं।
सिंगापुर की रेटिंग एजेंसी ग्रेस लिम के सॉवरेन विश्लेषक ने उम्मीद जताते हुए कहा, कि "हम मानते हैं, कि पाकिस्तान इस साल जून में इस वित्तीय वर्ष के लिए अपने बाकी बाहरी भुगतानों का पूरा करेगा।" हालांकि, उन्होंने आगे कहा, कि "लेकिन, पाकिस्तान अपने भुगतान को कैसे पूरा करेगा, इसके विकल्प अनिश्चित हैं। आईएमएफ कार्यक्रम के बिना और पाकिस्तान के कमजोर आर्थिक भंडार को देखते हुए, कहा जा सकता है कि देश डिफॉल्ट कर सकता है।"
जियो न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है, कि पाकिस्तान एक तरफ डिफॉल्ट होने से ठीक एक महीने पीछे खड़ा है, जबकि दूसरी तरफ देश की राजनीति में तनालव काम होने का नाम नहीं ले रहा है। शहबाज शरीफ की सरकार चुनाव नहीं करवाने पर अड़ी है, तो पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान सरकार के खिलाफ पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिखा रहे हैं।
आईएमएफ से लोन मिलने की उम्मीद खत्म!
जियो न्यूज ने कहा है, शहबाज शरीफ की गठबंधन सरकार 6.5 अरब डॉलर के आईएमएफ बेलआउट कार्यक्रम को पुनर्जीवित करने के लिए संघर्ष कर रही है और सरकार आईएमएफ की कुछ शर्तों को पूरा करने में नाकाम रही है, जिसके बाद आईएमएफ प्रोग्राम ठप हो गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ 4.5 अरब डॉलर बचे हैं, जबकि पाकिस्तान करीब एक साल पहले ही विदेशी सामानों की खरीददारी पर रोक लगा चुका है। पाकिस्तान को जून महीने में करीब 6 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज का भुगतान करना है और आईएमएफ प्रोग्राम फेल होने के बाद ये भुगतान करना, पाकिस्तान के लिए करीब करीब असंभव हो गया है।
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वहीं, अगर किसी तरह अगर पाकिस्तान जून के कर्ज का भुगतान कर भी देता है, फिर भी पाकिस्तान की समस्याएं खत्म नहीं होंगी, क्योंकि पाकिस्तान को साल 2026 तक, यानि अगले 3 सालों में 77.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है। पाकिस्तान को अप्रैल 2023 से जून 2026 तक 77.5 अरब अमेरीकी डालर के बाहरी ऋण का पुनर्भुगतान करना है।
वहीं, यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस (यूएसआईपी) की रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2023 से जून 2026 तक पाकिस्तान को 77.5 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज चुकाने की जरूरत है, और जिस पाकिस्तान की कुल अर्थव्यवस्था ही 350 अरब डॉलर की है, उसके लिए ये कर्ज चुकाना नामुमकिन की तरह है।












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