Pakistan: मौलाना ने अहमदी गर्भवती महिलाओं पर हमला करने का जारी किया आदेश
पत्रिका में लिखते हुए इतालवी समाजशास्त्री मास्सिमो इंट्रोविग्ने ने कहा कि, टीएलपी ईसाई और अहमदियों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपने हमलों के लिए कुख्यात है।
Pakistan Ahmadi Pregnent Women: पाकिस्तान में कट्टरपंथी ताकतें दिनों-दिन हावी हो रही हैं और मजहबी उन्माद में ये मुस्लिम मुल्क पिसता जा रहा है। पाकिस्तान की कट्टरपंथी प्रतिबंधित जमात तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के एक मौलवी ने अपने अनुयायियों से अहमदी गर्भवती महिलाओं पर हमला करने का फतवा जारी किया है ताकि "यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई नया अहमदी पैदा न हो"।

अहमदी महिलाओं पर हमले का आदेश
सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें टीएलपी के मौलवी मुहम्मद नईम चट्ठा कादरी का एक भाषण दिखाया गया है, जिसमें उसने अपने समर्थकों से गर्भवती अहमदी महिलाओं के खिलाफ हमले करने का आह्वान किया है ताकि "यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई नया अहमदी पैदा न हो।" उन्होंने जोर देकर कहा कि, "निन्दा करने वालों के लिए केवल एक ही सजा है, सिर काटना।" धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों पर एक पत्रिका बिटर विंटर की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम उपदेशक ने कहा कि, अगर हमले सफल नहीं होते हैं, तो "जो बच्चे पैदा हो रहे हैं, उन्हें मार दिया जाना चाहिए"।

धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ फरमान
पत्रिका में लिखते हुए इतालवी समाजशास्त्री मास्सिमो इंट्रोविग्ने ने कहा कि, टीएलपी ईसाई और अहमदियों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपने हमलों के लिए कुख्यात है। रिपोर्ट के अनुसार, कादरी ने पुलिस को टीएलपी द्वारा अहमदियों की धार्मिक सफाई में हस्तक्षेप करने के प्रयास के खिलाफ भी चेतावनी दी है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि, "आप में से जो पुलिस से हैं, या अगर कोई डीपीओ (जिला पुलिस अधिकारी) या डीसी (उपायुक्त) या एसएचओ (पुलिस स्टेशन हाउस ऑफिसर) हैं, तो उन्हें समझना चाहिए कि हमें रोका नहीं जा सकता है।" आपको बता दें कि, 12 अगस्त को 3 साल की एक बच्ची के पिता 62 वर्षीय अहमदी पिता नसीर अहमद को अहमदी बहुल शहर रबवाह के मुख्य बस स्टॉप पर एक टीएलपी कार्यकर्ता ने चाकू मार दिया था। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र के अहमदी मुस्लिमों में खौफ पसरा हुआ है और मौलवी के फरमान के बाद इस तरह की घटनाओं में भारी इजाफा होने की आशंका है।

राजनेताओं को दी चेतावनी
टीएलपी ने पाकिस्तानी सुन्नी मुस्लिम राजनेताओं पर भी निशाना साधा है, जिन पर "अहमदियों के प्रति नरम" होने का आरोप लगाया गया है। आपको बता दें कि, पाकिस्तान में अहमदी मुस्लिमों के लिए विशेष कानून है और उन्हें मुसलमान नहीं माना जाता है और पाकिस्तान में उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता है। पाकिस्तान में अहमदी मुसलमानों को वोट देने का भी अधिकार हासिल नहीं है और किसी भी तरह का सरकारी पद भी नहीं दिया जाता है। अहमदी मुसलमानों को अपने धर्म का प्रचार करने और उनका पालन करने के उनके अधिकार से कानूनी रूप से वंचित किया जाता है। अहमदियों पर ईशनिंदा के लिए नियमित रूप से मुकदमा चलाया जाता है, जिसमें मृत्युदंड सहित अत्यंत कठोर सजा दी जाती है। अल अरबिया पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, कई अहमदियों पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया गया और उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया। (सभी तस्वीर प्रतीकात्मक)












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