Pakistan Taxila: हिन्दुओं के तक्षशिला विश्विविद्यालय जानबूझकर बर्बाद कर रहा पाकिस्तान, UNESCO ने लगाई फटकार

Pakistan Taxila: आर्थिक संकट, आतंकवाद और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे पाकिस्तान के सामने अब एक और बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस बार मामला उसकी सबसे अनमोल सांस्कृतिक धरोहर तक्षशिला (Taxila) का है। यूनाइटेड नेशन्स की सांस्कृतिक संस्था UNESCO ने पाकिस्तान को फटकार लगाई है। अगर ऐसा नहीं किया तो पाकिस्तान में मौजूद इस विश्व धरोहर दर्जा भी खतरे में पड़ सकता है। दूसरी तरफ पाकिस्तान और भारत दोनों तरफ के हिन्दु समुदायों में भी इसे लेकर भयंकर गुस्सा भरा हुआ है।

किसने खोली पाकिस्तान की धोती

पूरा विवाद मार्च में तब शुरू हुआ, जब तक्षशिला घूमने आए एक पर्यटक ने वहां चल रहे घटिया निर्माण कार्य की तस्वीरें यूनेस्को के पाकिस्तानी प्रतिनिधि को भेजीं। तस्वीरों में साफ दिखाई दिया कि पाकिस्तान के पंजाब पुरातत्व विभाग ने कई जगहों पर सदियों पुरानी दीवारों की जगह नई चिनाई कर दी थी। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि दीवारों में अच्छे कैमिकल की जगह घटिया सीमेंट भर दी गई। मामला सामने आने के बाद जून में यूनेस्को की विशेषज्ञ टीम ने मौके का निरीक्षण किया और स्थिति पर गंभीर चिंता जताई।

Ancient ruins of Taxila under UNESCO review

प्राचीन विरासत पर सीमेंट चलाकर पाकिस्तान ने बढ़ाई मुश्किलें

यूनेस्को की सबसे बड़ी आपत्ति यह है कि मोहरा मोरादू और सिरकप जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर संरक्षण के नाम पर घटिया सीमेंट, काम चलाऊ ईंटों और राजमिस्त्री तकनीक का इस्तेमाल किया गया। विरासत संरक्षण के अंतरराष्ट्रीय नियम कहते हैं कि किसी भी प्राचीन स्मारक की मरम्मत उसकी मूल सामग्री और मूल स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए की जानी चाहिए। लेकिन यूनेस्को का कहना है कि पाकिस्तान की इस कार्रवाई ने तक्षशिला की ऐतिहासिक मौलिकता और प्रामाणिकता को नुकसान पहुंचाया है।

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पाकिस्तान की सफाई, लेकिन UNESCO भड़का

यूनेस्को ने पाकिस्तान सरकार को निर्देश दिया है कि वह इन बदलावों को वापस ले और साइंटिफिक तरीके से संरक्षण करे। दूसरी ओर, पंजाब पुरातत्व विभाग के महानिदेशक मलिक जहीर अब्बास ने दावा किया कि यह "पुनर्निर्माण" नहीं बल्कि "संरक्षण" का काम है, जिसका मकसद इमारतों को मजबूत बनाना था। हालांकि यूनेस्को ने इस दलील को पर्याप्त नहीं माना और साफ कहा कि ऐसे हस्तक्षेप विश्व धरोहर मानकों के खिलाफ हैं।

दर्जा छिना तो पाकिस्तान की वैश्विक साख को बड़ा झटका

अगर तक्षशिला का दर्जा प्रभावित होता है तो यह केवल एक स्मारक का नुकसान नहीं होगा। पाकिस्तान 1997 से अपने 24 अन्य ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की कोशिश कर रहा है। इनमें रानी घाट और भंभोर जैसे स्थल भी शामिल हैं। तक्षशिला पर कार्रवाई होने की स्थिति में इन दावेदारियों पर भी गाज गिर सकती है।

पहले यूनेस्को ले चुका है एक्शन

यूनेस्को ने अब तक केवल तीन विश्व धरोहर स्थलों को सूची से पूरी तरह बाहर किया है। 2007 में ओमान का Arabian Oryx Sanctuary, 2009 में जर्मनी की Dresden Elbe Valley और 2021 में ब्रिटेन का Liverpool Maritime Mercantile City इस सूची से हटाए गए थे। इसलिए तक्षशिला को लेकर दी गई चेतावनी को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

तक्षशिला सिर्फ पाकिस्तान की नहीं, भारतीय सभ्यता की भी धरोहर

आज तक्षशिला पाकिस्तान में है, लेकिन उसका इतिहास भारतीय सभ्यता से गहराई से जुड़ा है। इस प्राचीन नगर की स्थापना लगभग 3,000 साल पहले मानी जाती है। रामायण के मुताबिक इसका नाम भगवान राम के भाई भरत के पुत्र तक्ष के नाम पर पड़ा। बाद में यह गांधार सभ्यता, बौद्ध धर्म और प्राचीन शिक्षा का विश्व प्रसिद्ध केंद्र बना।

चाणक्य, चंद्रगुप्त और विश्व प्रसिद्ध शिक्षा केंद्र

तक्षशिला वही स्थान माना जाता है जहां आचार्य चाणक्य (कौटिल्य) ने अर्थशास्त्र की रचना की। सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के समय यह एक प्रमुख प्रशासनिक और शैक्षणिक केंद्र था। इससे पहले इस क्षेत्र पर फारस के सायरस महान और बाद में सिकंदर का भी प्रभाव रहा। बौद्ध भिक्षुओं और चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपने यात्रा-वृत्तांतों में तक्षशिला की समृद्धि और भव्यता का जिक्र किया है।

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हूणों के हमले के बाद उजड़ा था यह महान शहर

पांचवीं सदी में हूणों के आक्रमण के बाद तक्षशिला धीरे-धीरे उजड़ गया। आज यहां सरायकाला, भीर, सिरकप और सिरसुख जैसे प्राचीन टीले, धर्मराजिका स्तूप, जौलियान मठ और खानपुर गुफाएं मौजूद हैं, जो भारतीय उपमहाद्वीप के पांच सौ सालों से अधिक के शहरी और सांस्कृतिक विकास की कहानी सुनाते हैं। इन्हीं कारणों से यूनेस्को ने 1980 में तक्षशिला को विश्व धरोहर घोषित किया था।

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