बिलावल भुट्टो को प्रधानमंत्री बनाने की कोशिश में सेना, इमरान खान का भाग्य डूबा.. चीनी मीडिया का बड़ा दावा
बिलावल भुट्टो अपने एंटी-इंडिया स्टैेंड के लिए पाकिस्तान में जाने जाते हैं, जो उन्हें सेना का पसंदीदा उम्मीदवार बनाती है। वहीं, इमरान खान का राजनीतिक सूरज अब डूब चुका है।

Bilawal Bhutto Zardari News: चीन के अखबार, साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट ने दावा किया है, कि पाकिस्तान की सेना मौजूदा विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी को देश का अगला प्रधानमंत्री बनाने की कोशिश कर रही है।
साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का राजनीतिक भाग्य सैन्य नेतृत्व वाली कार्रवाई के बाद डूब गया है और विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी, कथित तौर पर जनरलों के सामने अपनी "शक्ति" साबित करने के बाद प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में उभर सकते हैं।
बिलावल को लेकर दावा क्या है?
साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है, कि इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के जिन नेताओं ने राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर पार्टी से इस्तीफा दिया है, वो बहुत जल्द बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को ज्वाइन कर सकते हैं।
चीनी मीडिया ने लिखा है, कि पाकिस्तान की सर्व शक्तिशाली सेना के दवाब में इमरान खान की पार्टी से इस्तीफा देने वाले नेता, बिलावल भुट्टो की पार्टी के साथ जुड़कर उनकी पार्टी के लिए काम करेंगे और देश में बिलावल की राजनीतिक पार्टी, पीपीपी को मजबूत करेंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि 9 मई को इमरान खान के समर्थकों ने जिस तरह से सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है, उसने इमरान खान के राजनीतिक भाग्य के सूरज को बुझा दिया है।
आपको बता दें, कि इमरान खान और चीन के संबंध अच्छे नहीं रहे थे। चीन ने इमरान खान की सरकार को इसलिए पसंद नहीं किया, क्योंकि उन्होंने चायना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के काम को बंद करवा दिया था। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया, कि इमरान खान को सत्ता से बाहर हटाने के पीछे असल में अमेरिका नहीं, बल्कि चीन है। लेकिन, इमरान खान अमेरिका पर इसलिए इल्जाम लगाते रहे, ताकि वो पाकिस्तानी जनता के एंटी-अमेरिका इमोशन का फायदा उठा सकें।

और अब चीनी मीडिया का ये दावा, कि इमरान खान के भाग्य का अस्त हो गया है, ये साफ बताता है, कि अब इमरान खान कभी भी पाकिस्तान में प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे। पिछले महीने इमरान खान की गिरफ्तारी से पहले पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने चीन का दौरा भी किया था और कहा जा रहा है, कि इमरान खान के खिलाफ स्क्रिप्ट बीजिंग में ही लिखी गई, क्योंकि बीजिंग जानता है, कि अगर चुनाव हुए, तो इमरान खान को जीतने से कोई नहीं रोक सकता है।
बिलावल को लेकर प्लान क्या है?
साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट ने विश्लेषकों के हवाले से कहा है, कि इमरान खान के बड़े नेता, जनका अपने निर्वाचन क्षेत्र में गहरा प्रभाव है, उन दलबदलुओं की मदद से, बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के जनाधार में इजाफा किया जाएगा।
बिलावल की पार्टी पीपीपी का मुख्य जनाधार सिंध प्रांत में है, लेकिन पाकिस्तान में सरकार बनाने के लिए सबसे बड़े प्रांत पंजाब में पार्टी को सफलता मिलना जरूरी है, लिहाजा इमरान खान की पार्टी को छोड़ने वाले नेता, पंजाब प्रांत में बिलावल भुट्टो को मजबूत करने के लिए काम करेंगे।
पाकिस्तान की संसद में 262 सीटें हैं और उनमें से आधे से ज्यादा सीट सिर्फ पंजाब प्रांत में ही है, लिहाजा सेना ने पंजाब प्रांत में बिलावल भुट्टो के लिए फिल्डिंग शुरू कर दी है।
अखबार ने आगे दावा किया है, कि पाकिस्तान की सेना की कोशिश ये है, कि वो सिंध और बलूचिस्तान प्रांत में पीपीपी और उसकी सहयोगी पार्टियों का एक ब्लॉक तैयार करे, जिससे अक्टूबर में होने वाले चुनाव के बाद सत्ता का संतुलन भी बनाए रख सके।
यानि, सेना ऐसा भी नहीं चाहती है, कि पूर्ण बहुमत से बिलावल भुट्टो की ही सरकार बन जाए, बल्कि सेना की कोशिश ये है, कि पाकिस्तान में एक त्रिशंकु संसद बने, और फिल बिलावल भुट्टो को प्रधानमंत्री बनाकर सेना उनके ऊपर नियंत्रण रख सके।

सेना ही पाकिस्तान में सर्व शक्तिशाली
इस्लामाबाद स्थित राजनीतिक विश्लेषक और राज्य प्रसारक रेडियो पाकिस्तान के पूर्व महानिदेशक मुर्तजा सोलंगी ने कहा, कि पीपीपी अध्यक्ष भुट्टो जरदारी की राजनीतिक रणनीति "एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है जिसका वह अनुसरण कर सकते हैं"।
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान में बिलावल भुट्टो की अगुवाई में एक कमजोर गठबंधन सरकार के निर्माण से मैं इनकार नहीं कर सकता हूं।" माना जा रहा है, कि बिलावल भुट्टो को लेकर पाकिस्तान की सेना में फिलहाल पॉजिटिव रिस्पांस है, लिहाजा बिलावल भुट्टो के लिए पाकिस्तानी सेना ने पिच तैयार करना शुरू कर दिया है और इसमें इमरान खान की पार्टी के ही नेता सेना का साथ देंगे।
वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक विल्सन सेंटर में दक्षिण एशिया संस्थान के निदेशक माइकल कुगेलमैन का भी मानना है, कि बिलावल भुट्टो को अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। उन्होंने कहा, कि "बिलावल पहली बार साल 2018 में सांसद चुने गये और फिर 2022 में शहबाज शरीफ की सरकार में विदेश मंत्री जैसे बड़े और अहम पद पर पहुंचे और ये बिना सेना के आशीर्वाद के संभव नहीं है।"
उन्होंने कहा, कि "तथ्य यह है, कि वह एक ऐसी पार्टी के नेता हैं, जो सेना की अच्छी पकड़ में दिखाई देती है, साथ ही सेना ने बिलावल की पार्टी को कुछ मदद भी पहुंचाई है।"
सेना को क्यों पसंद हैं बिलावल भुट्टो?
इस्लामाबाद स्थित विश्लेषक सोलंगी ने इस बात पर सहमति जताई, कि विदेश मंत्री बनने के बाद से बिलावल भुट्टो जरदारी के राजनीतिक प्रदर्शन ने "घरेलू वार्ताकारों और दुनिया में बड़े पैमाने पर घरेलू वार्ताकारों के साथ अपनी अहमियत साबित की है"।
इसके अलावा बिलावल भुट्टो जरदारी अपने भारत विरोधी रूख के लिए भी पाकिस्तान की सेना के पसंद हो सकते हैं, जबकि शहबाज शरीफ और उनका परिवार भारत के साथ अच्छे संबंधों का हिमायती माना जाता रहा है।
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नवाज शरीफ, जो प्रधानमंत्री मोदी के आमंत्रण पर भारत आ चुके हैं और जिनके आमंत्रण पर पीएम मोदी पाकिस्तान जा चुके हैं, उनको और उनके भाई शहबाज शरीफ को लेकर पाकिस्तान की सेना सहज नहीं है। वहीं, शहबाज शरीफ अभी प्रधानमंत्री हैं और देश के ऊपर इस महीने दिवालिया होने का संकट मंडरा रहा है, लिहाजा शहबाज शरीफ की लोकप्रियता काफी गिर गई है, जिसको लेकर भी सेना, बिलावल को एक विकल्प के तौर पर देख रही है।
शहबाज शरीफ प्रधानमंत्री बनने के बाद कम से कम चार बार भारत के साथ बातचीत करने की दिशा में आगे बढ़ने का इशारा दे चुके हैं, जो सेना को पसंद नहीं आई और हर बार पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने शहबाज शरीफ के बयान को लेकर सफाई दी है, लिहाजा बिलावल भुट्टो में पाकिस्तानी सेना एक मजबूत विकल्प देख रही है, लिहाजा उन्हें पाकिस्तान का अगला प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है।












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