Pakistan: पाकिस्तान में लोगों का जीना हुआ हराम, महंगाई में श्रीलंका भी छूटा पीछे, भुखमरी के बने हालात
पाकिस्तान एक तरह आर्थिक, तो दूसरी तरफ राजनीतिक संकट में फंसा हुआ है। अगर मई महीने में पाकिस्तान को आईएमएफ से लोन नहीं मिलता है, तो वो जून में डिफॉल्ट कर जाएगा।

Pakistan inflation: पाकिस्तान में खाना-पानी, उठना-बैठना, सांस लेना.. यहां तक की जीना ही महंगा हो गया है और पाकिस्तान ने एशिया में सबसे ज्यादा महंगाई के मामले में श्रीलंका को पीछे छोड़ कर नया ताज हासिल कर लिया है।
पाकिस्तान में खाद्य पदार्थ, ऊर्जा लागत में अप्रैल महीने में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है।
सांख्यिकी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल अप्रैल के मुकाबले इस साल अप्रैल में उपभोक्ता कीमतों में 36.4 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जो 1964 के बाद सबसे ज्यादा है। वहीं, ब्लूमबर्ग के सर्वे में कहा गया है, कि पिछले साल अप्रैल के मुकाबले इस साल अप्रैल में पाकिस्तान में उपभोक्ता कीमतों 37.2 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है और पिछले महीने के मुकाबले इस महीने महंगाई दर में 35.4% वृद्धि दर्ज की गई है।
पाकिस्तान ने श्रीलंका को छोड़ा पीछे
पाकिस्तान सरकार के सांख्यिकी विभाग के आंकड़ों से पता चलता है, पाकिस्तान की मुद्रास्फीति यानि महंगाई दर ने आर्थिक संकट में फंसे श्रीलंका को पीछे छोड़ दिया है। श्रीलंका में अप्रैल महीने में महंगाई दर में 35.3% तक की कमी आई है, जो श्रीलंका के हालात सुधरने का संकेत दे रहा है।
वहीं, पाकिस्तानी रुपया 2023 में पूरी दुनिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गई है, जो अप्रैल महीने में डॉलर के मुकाबले 20 प्रतिशत और गिर गया है। पाकिस्तान रुपये की वैल्यू 283 रुपये को पार कर गई है।
आंकड़ों से पता चलता है, कि अप्रैल में पाकिस्तान में ट्रांसपोर्ट की कीमतें 56.8 प्रतिशत बढ़ गई हैं। यानि, अब सफर करने के लिए लोगों को मार्च महीने के मुकाबले अप्रैल महीने में 56 प्रतिशत ज्यादा किराया देना पड़ रहा है। वहीं, देश में खाद्य मुद्रास्फीति में 48.1% की तेजी आई है। कपड़े और जूते की कीमतों में 21.6% की वृद्धि हुई है. वहीं, आवास, पानी और बिजली की लागत में 16.9% की वृद्धि हुई है।
वहीं, अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से लोन हासिल करने के लिए पाकिस्तान छटपटा रहा है और उसके लिए उसे आईएमएफ की सभी शर्तों को मानना होगा। लिहाजा, माना जा रहा है, कि मई महीने में पाकिस्तान में महंगाई में और भी ज्यादा बढ़ोतरी होगी। पाकिस्तान की सरकार मई महीने में तेल और बिजली की कीमत में भारी इजाफा कर सकती है।
पाकिस्तान आईएमएफ से 1.1 अरब डॉलर की किश्त के लिए संघर्ष कर रहा है। पाकिस्तान को हर हाल में आईएमएफ से बेलऑउट पैकेज चाहिए और बेलआउट फंड पाकिस्तान को खाद्य और ईंधन जैसे आवश्यक सामानों के आयात का भुगतान करने और आने वाले महीनों में डिफ़ॉल्ट से बचने में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, आईएमएफ, सहायता फिर से शुरू करने से पहले वित्तीय आश्वासन मांग रहा है।
वहीं, महंगाई पर लगाम लगाने के लिए पाकिस्तान स्टेट बैंक ने पिछले महीने ब्याज दर में 21 प्रतिशत का इजाफा किया था और ये इजाफा 1956 के बाद से सबसे ज्यादा है। लिहाजा, बढ़ती मुद्रास्फीति दक्षिण एशियाई राष्ट्र के लिए उधार लेने की लागत को बढ़ा सकती है, यानि पाकिस्तान के लिए विदेशों से सामान खरीदना और भी ज्यादा महंगा होगा।
पाकिस्तान में अगली मौद्रिक नीति समीक्षा 12 जून को होने वाली है। अटलांटिक काउंसिल के साउथ एशिया सेंटर के निदेशक, उज़ैर यूनुस के अनुसार, पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने पिछले महीने कहा था, कि देश में मुद्रास्फीति स्थिर है, लेकिन हाल के आंकड़ों से पता चलता है, कि बैंक ने गलत कहा है।
Recommended Video

उज़ैर यूनुस ने कहा, कि हाल के आंकड़ों से पता चलता है, कि पाकिस्तानी सेन्ट्रल बैंक अभी भी महंगाई दर को काबू करने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा, कि "सबसे अधिक चिंता की बात यह है, कि खाद्य कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। करीब 40 लाख और लोग गरीबी रेखा से नीचे आ गए हैं और बढ़ती खाद्य कीमतें अनगिनत परिवारों के लिए भयावह हालात बना सकते हैं।"
इन सबके बीच पाकिस्तान में राजनीतिक झगड़ा भी चरम पर है। चुनाव करवाने की मांग को लेकर शहबाज शरीफ और इमरान खान आमने-सामने हैं। और माना जा रहा है, कि ये झगड़ा फिलहाल खत्म नहीं होने वाला है और इन सबके बीच अर्थव्यवस्था के हालात और भी बदतर होने की आशंका है।












Click it and Unblock the Notifications