Pakistan PIA Sale: पाक की खस्ता हालत! बिकाऊ PIA के लिए नहीं मिला कोई खरीदार, बोली से पीछे हटीं कंपनियां
Pakistan PIA sale News: पाकिस्तान की घाटे में चल रही राष्ट्रीय एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) के प्राइवेटाइजेशन की प्रक्रिया को एक बार फिर तगड़ा झटका लगा है। लंबे समय से चल रही इस निजीकरण में अब एक अहम मोड़ सामने आया है।
पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर के समर्थन वाली कंपनी ने एयरलाइन को खरीदने की दौड़ से खुद को बाहर कर लिया है। इससे PIA के निजीकरण को लेकर अनिश्चितता और गहरा गई है।

पाक सेना ने भी छोड़ी बोली
डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, फौजी फर्टिलाइजर कंपनी लिमिटेड (FFC) ने PIA के अधिग्रहण की बोली से हटने का फैसला किया है। यह कंपनी फौजी फाउंडेशन के अधीन आती है, जिसकी निगरानी पाकिस्तानी सशस्त्र बल करते हैं। निजीकरण आयोग के चेयरमैन मोहम्मद अली ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि FFC ने बोली प्रक्रिया से औपचारिक रूप से खुद को अलग कर लिया है। FFC के बाहर होने के बाद निजीकरण प्रक्रिया को बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इसे सबसे मजबूत और प्रभावशाली दावेदारों में गिना जा रहा था।
अब दौड़ में बचे सिर्फ तीन दावेदार
FFC के बाहर होने के बाद अब PIA को खरीदने की दौड़ में केवल तीन बोलीदाता बचे हैं। इनमें पहला समूह लकी सीमेंट लिमिटेड, हब पावर होल्डिंग्स लिमिटेड, कोहाट सीमेंट कंपनी लिमिटेड और मेट्रो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड का है।
दूसरा एक कंसोर्टियम है, जिसमें आरिफ हबीब कॉरपोरेशन लिमिटेड, फातिमा फर्टिलाइजर कंपनी लिमिटेड, सिटी स्कूल्स प्राइवेट लिमिटेड और लेक सिटी होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। तीसरा दावेदार एयर ब्लू प्राइवेट लिमिटेड है, जो पहले से पाकिस्तान की निजी एयरलाइन है। सरकार के मुताबिक, PIA की नीलामी 23 दिसंबर को प्रस्तावित है और इसे पाकिस्तान के 7 अरब डॉलर के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) बेलआउट पैकेज की शर्तों के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।
75 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी सरकार
निजीकरण योजना के तहत, जो कंपनी सबसे ऊंची बोली लगाएगी, उसे PIA में 75 फीसदी हिस्सेदारी दी जाएगी। इस 75 फीसदी में से करीब 92.5 फीसदी हिस्सेदारी PIA को मिलेगी, जबकि लगभग 7.5 फीसदी हिस्सा पाकिस्तानी सरकार के पास रहेगा। इसके अलावा सरकार अपने पास 25 फीसदी हिस्सेदारी बनाए रखेगी। हालांकि, सफल बोलीदाता को यह विकल्प भी मिलेगा कि वह भविष्य में सरकार के पास बची 25 फीसदी हिस्सेदारी को खरीद ले या फिर उसे सरकार के पास ही रहने दे।
क्यों मुश्किल हो रहा है PIA को बेचना
पाकिस्तानी सरकार पिछले कई वर्षों से घाटे में चल रही PIA को बेचने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब तक उसे खास सफलता नहीं मिली है। देश का विमानन क्षेत्र भारी कर्ज, खराब प्रबंधन और परिचालन समस्याओं से जूझ रहा है। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में विमानन क्षेत्र का योगदान महज 1.3 फीसदी है, जो दुनिया में सबसे कम में से एक माना जाता है।
पिछले साल भी सरकार ने PIA को बेचने की कोशिश की थी, लेकिन तब सिर्फ एक ही कंपनी ने बोली लगाई थी। वह बोली भी सरकार की तय 30 करोड़ डॉलर की न्यूनतम सीमा से काफी कम थी, जिसके चलते सौदा नहीं हो पाया।
निवेशकों को लुभाने की कोशिशें जारी
निवेशकों की रुचि बढ़ाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें PIA का कर्ज कम करना, नए विमानों की खरीद पर बिक्री कर से छूट देना और कुछ कर एवं कानूनी मामलों में सुरक्षा देने जैसे उपाय शामिल हैं। इसके बावजूद सेना समर्थित कंपनी के बाहर होने से साफ संकेत मिलते हैं कि निवेशक अब भी PIA के भविष्य को लेकर आशंकित हैं।
अब सभी की नजर 23 दिसंबर को होने वाली नीलामी पर टिकी है। यह देखना अहम होगा कि बचे हुए बोलीदाता कितनी गंभीरता से आगे आते हैं और क्या सरकार को अपनी उम्मीद के मुताबिक सौदा मिल पाता है या नहीं।












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