Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में भी लागू होगा UCC? CM सुवेंदु अधिकारी के ऐलान से मचा सियासी बवाल
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि बंगाल में भी समान नागरिक संहिता को लागू किया जाएगा।
दरअसल, 26 जून को कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए एक तय प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इसको लेकर विधानसभा में पूरी रणनीति बताई जाएगी। इसके तहत एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा, जिसकी कमान एक वर्तमान न्यायमूर्ति के हाथों में होगी।
सुवेंदु अधिकारी ने देश के अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह गुजरात, उत्तराखंड और असम में समान नागरिक संहिता को लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई या इसे लागू किया गया, ठीक उसी तर्ज पर बंगाल में भी इस कानून को जमीन पर उतारा जाएगा। भाजपा नेता के इस दावे के बाद बंगाल के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता का ऐलान
बंगाल में भाजपा लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे मुद्दों को उठाती रही है। सुवेंदु अधिकारी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) केंद्र सरकार की इस नीति का कड़ा विरोध कर रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कई मौकों पर कह चुकी हैं कि वे बंगाल में विभाजनकारी नीतियां लागू नहीं होने देंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल विधानसभा में प्रस्ताव लाने से ही बंगाल में यूसीसी लागू करना आसान नहीं होगा। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के पास विधानसभा में पूर्ण बहुमत है। ऐसे में भाजपा के लिए बिना सत्ता में आए इस कानून को राज्य में अमलीजामा पहनाना एक बड़ी चुनौती है। हालांकि, भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर चुनावी विमर्श बदलना चाहती है।
उत्तराखंड और असम के मॉडल को बंगाल में दोहराने की तैयारी
उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य बना जिसने समान नागरिक संहिता विधेयक को विधानसभा से पारित कर कानून का रूप दिया। इसके बाद असम और गुजरात जैसे राज्यों ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। सुवेंदु अधिकारी इसी प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया का संदर्भ दे रहे थे, जहां सेवानिवृत्त या वर्तमान जजों की समिति बनाकर पहले मसौदा तैयार किया जाता है और जनता से सुझाव मांगे जाते हैं।
आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल विधानसभा के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर टकराव बढ़ने के पूरे आसार हैं। सुवेंदु अधिकारी की इस घोषणा ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा आने वाले चुनावों में समान नागरिक संहिता को बंगाल में अपना एक मुख्य चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार इस वैचारिक चुनौती का मुकाबला कैसे करती है।














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