पाकिस्तान ने बांग्लादेश में किया था खूनी खेल, 30 लाख लोग मारे गये थे
बांग्लादेश नरसंहार की पोल खुलने से पाकिस्तान की इमरान खां सरकार बौखला गयी है। अमेरिका के 'हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन' की वेबसाइट पर पूर्वी पाकिस्तान में 1971 में हुए भयंकर नरसंहार की जानकारी दी गयी। 'हिंदू बंगाली जीनोसाइड' वेबपेज पर पाकिस्तानी सेना की अमानुषिक अत्याचार का पूरा ब्योर दिया गया है। पाकिस्तानी सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में मार्च 1971 से लेकर 16 दिसम्बर तक1971 बर्बर दमनचक्र चलाया था जिसमें 30 लाख लोग मारे गये थे। करीब चार लाख औरतों से बलात्कार किय गया था। पचास साल पुरानी यह भयावह सच्चाई फिर सामने आने से पाकिस्तान तिलमिला गया है। पकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खां ने पहले तो इस अमेरिकी संगठन को वेबपेज हटाने के लिए धमकी दी। जब उसने इंकर कर दिय तो इसे पाकिस्तान में ब्लॉक कर दिया गया।

नरसंहार की घटना की पृष्ठभूमि
7 दिसम्बर 1970 को पाकिस्तान में संसदीय चुनाव हुआ था। कहा जाता है कि यह पाकिस्तान का सबसे निष्पक्ष चुनाव था। नेशनल असेम्बली की 300 सीटों के लिए चुनाव हुआ। पकिस्तान की भौगोलिक और सामाजिक स्थिति बहुत विचित्र थी। पकिसतान के दो हिस्से थे। पूर्वी पकिस्ताव और पश्चिमी पाकिस्तान। दोनों के बीच करीब 1500 किलोमीटर की दूरी थी। बीच में भारत था। पश्चिमी पाकिस्तान और पूर्वी को जोड़ने के लिए जलमार्ग की सबसे सुगम रासता था। पाकिस्तान के इन दो भागों में सिर्फ धर्म की ही समानता था। भाषा, संस्कृति और खानपान में भारी विषमता थी। पश्चिमी पाकिस्तान में उर्दू, पंजाबी और सिंधी बोलने वालों की अधिकता थी तो पूर्वी पाकिस्तान में सिर्फ बंगाली बोलने वाले लोग थे। पश्चिमी पाकिस्तान के मुसलमान खुद को श्रेष्ठ मानते थे। वे बंगाली मुसलमानों को हेय नजर से देखते थे। नेशनल असेम्बली की 300 सीटों में से 162 सीटें पूर्वी पाकिस्तान में थीं। 138 सीटें पश्चिमी पाकिस्तान में थीं। 13 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व थीं। 7 पूर्वी पाकिस्तान में और 6 पश्चिमी पाकिस्तान में। इनका चुनाव सांसदों को करना था।

चुनाव के नतीजे के बाद खराब हुए हालात
7 दिसम्बर 1970 को चुनाव हुआ। पश्चिमी पाकिस्तान में सबसे बड़ी पार्टी थी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी जिसके अध्यक्ष थे जुल्फीकार अली भुट्टो। भुट्टो को मुस्लिम लीग और जमाते इस्लामी जैसे दलों से चुनौती मिल रही थी। लेकिन पूर्वी पाकिस्तान में शेख मुजीबुर रहमान की अवामी लीग का बोलबाला था। उसे किसी दूसरे दल से टक्कर भी नहीं मिल रही थी। चुनाव के बाद जब नतीजे निकले तो अवामी लीग ने चमत्कार कर दिया। उसने 162 सीटें जीत कर पूर्ण बहुमत प्राप्त कर लिया। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को केवल 81 सीटें मिलीं। पाकिस्तान की राजनीति में जैसे जलजला आ गया। अभी तक पाकिस्तान के शासन पर पश्चिमी पाकिस्तान के नेताओं या सैन्य तानाशाहों का कब्जा रहा था। पहली बार पूर्वी पाक्सितान का कोई बंगाली मुसलमान पाक्सितान का प्रधानमंत्री बनने वाला था। पूर्वी पाकिस्तान को कभी सत्ता में उचित हिस्सेदारी नहीं मिली थी। पूर्वी पाकिस्तान के बंगाली मुसलमानों खुशी की लहर दौड़ गयी। ये बात पश्चिमी पाकिस्तान के नेताओं को अखर गयी।

जीत के बाद भी शेख मुजीब को नहीं बनाया पीएम
उस समय पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल यहिया खान थे। यहिया खान और जुल्फिकार अली भुट्टो शेख मुजीबुर रहमान को सत्ता सौंपने के राजी नहीं थे। उन्हें ये बिल्कुल गवारा न था कि कोई बंगाली इस्लामाबाद में बैठ कर उन पर हुकूमत करे। जब शेख मुजीब को प्रधानमंत्री बनाने में रोड़ा अटकाया जाने लगा तो पूर्वी पाकिस्तान में इसका विरोध होने लगा। बंगाली मुसलमान पश्चिमी पाकिस्तान की सत्ता के खिलाफ भड़क गये। गृहयुद्ध की स्थिति पैदा हो गयी। पूर्वी पाकिस्तान की आजादी के नारे गूंजने लगे। 1971 के शुरुआती तीन महीने बहुत उथलपुथल वाले रहे। इस बीच पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल यहिया खान ने पूर्वी पाकिस्तान की स्थिति संभालने के लिए जनरल टिक्का खान को ढाका भेज दिया।

पाकिस्तानी सेना का बांग्लादेश में नरसंहार
जनरल टिक्का खान जब ठाका आये तो उन्होंने अर्ध सैनिक बल के रूप में अलबदल संगठन को खड़ा किया। इसमें उर्दू बोलने वाले युवा थे जो बंगालियों के विरोधी थे। उन्हें पाकिस्तानी सेना ने सैनिक प्रशिक्षण दिया। इसी तरह एक स्वयंसेवकों का संगठन खड़ा किया जिन्हें रजाकर कहा गया। उन्हें सैनिक क्षमता से लैस किया गया। रजाकर और अलबदर के लोग बांग्लादेश में ही रहते थे जो बंगालियों की आजादी के खिलाफ थे। 25 मार्च 1971 को पाकिस्तानी सेना ने अलबदर और रजाकरों के साथ मिल कर पूर्वी पाकिस्तान में पहला नरसंहार किया। निहत्थे बंगालियों पर गोलियों की बोछार कर दी गयी। लोगों को घरों से निकाल कर गोली मारी गयी। रजाकरों ने हिंदू और बंगाली महिलाओं से जगह जगह बलात्कार किये। रजाकर और अलबदर के सदस्य गांव- गांव, शहर-शहर घूम कर यह पता लगाते कि कहां पूर्वी पाकिस्तान की आजादी के लिए गतिविधियां चल रहीं है। इस जानकारी के बाद पाकिस्तानी सेना वहां भयानक रक्तपात करती। पूर्वी पाकिस्तान की आजादी और पाकिस्तानी सेना को जवाब देने के लिए बांग्लादेश के साहसी नौजवानों ने मुक्तिवाहिनी का गठन किया। पूर्वी पाकिस्तान में इस कत्लेआम से लोग भयभीत हो गये। करीब 80 लाख लोगों ने भाग कर भारत में शरण ले ली। शरणार्थियों की बढ़ती समस्या भारत परेशान हो गया। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अप्रैल 1971 में मुक्तिवाहिनी को समर्थन देकर पूर्वी पाकिस्तान को आजाद कराने का फैसला लिया।

भयंकर रक्तपात और अत्याचार
पूर्वी पाकिस्तान की आजादी की लड़ाई 16 दिसम्बर तक चली। 16 दिसम्बर 1971 को जब पाकिस्तानी सेना ने भरातीय फौज के सामने आत्मसमर्पण कर दिया तो पूर्वी पाकिस्तान का नया देश बन गया जिसका नाम पड़ा बांग्लादेश। बांग्लादेश की सरकार के अनुसार मुक्तिसंग्राम में करीब 30 लाख लोग मारे गये थे। 1999 में ढाका की एक मस्जिद के पास विशाल का पता चला था जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को दफनाया गया था। युद्ऱ के दौरान करीब चार लाख औरतों से बलात्कार किया गया था। पाकिस्तान के सैनिक अफसरों और मुल्लाओं ने औरतों को युद्ध में जीती वस्तु करार दिया था और उनके बलात्कार का समर्थन किया था। बांग्लादेश की वार क्राइम फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने 40 साल बाद 2009 में एक रिपोर्ट दी थी जिसमें सिर्फ 1597 महिलाओं के साथ बलात्कार की बात कही गयी थी। ढाका के एक पुनर्वास केन्द्र के डॉक्टर ने 1972 में बताया था कि युद्ध में बलात्कार की शिकार 1 लाख 70 हजार महिलाएं गर्भवती हो गयीं थीं जिनका गर्भपात कराया गया था। बलात्कार पीड़ित 30 हजार महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया था। मौत और बलात्कार का कोई आधिकारिक आंकड़ा तो नहीं है लेकिन अलग-अलग स्रोतों से जानकारियां मिलती हैं उससे तो इतना कहा जा सकता है कि आज से 40 साल पहले बांग्लादेश में भयंकर अत्याचार हुआ था।












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