Pakistan Hamas Training: हमास के लड़ाके को ट्रेनिंग दे रहा है पाकिस्तान, पूर्व सीनेटर ने इंटरव्यू में कबूला
Pakistan Hamas Training: पाकिस्तान के सीनेटर मुशाहिद हुसैन के हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि पाकिस्तान के सैन्य संस्थानों में फिलिस्तीनी कैडेट्स को ट्रेनिंग दी जा रही है। यह पहली बार है जब किसी बड़े पाकिस्तानी राजनेता ने इस तरह के संबंधों को खुले मंच पर स्वीकार किया है।
भारत और इजराइल के लिए यह खबर चिंताजनक है, क्योंकि पाकिस्तान और हमास के बीच बढ़ती नजदीकी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए नए खतरे पैदा कर सकती है। यह खुलासा हमास और पाकिस्तान के पुराने मगर छिपे हुए रिश्तों को उजागर करता है।

Palestinian Cadets in Pakistan: सीनेटर का चौंकाने वाला खुलासा
सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने बताया कि उन्होंने नेवी वॉर कॉलेज के दौरे के दौरान वहां फिलिस्तीनी कैडेट्स को ट्रेनिंग लेते देखा। उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान के लगभग हर सैन्य संस्थान में फिलिस्तीनी अधिकारी मौजूद हैं। सबसे बड़ी बात यह रही कि उन्होंने हमास के लड़ाकों और गाजा के विस्थापित छात्रों को पाकिस्तानी संस्थानों में जगह देने और स्कॉलरशिप देने की बात भी कबूल की। यह बयान सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना और हमास के बीच के तकनीकी संबंधों की ओर इशारा करता है।
Hamas Leaders Pakistan Visit: पाकिस्तान और हमास के पुराने रिश्ते
पाकिस्तान वैसे तो आधिकारिक तौर पर हमास को मान्यता नहीं देता, लेकिन पर्दे के पीछे दोनों के संबंध बहुत पुराने हैं। पाकिस्तान हमेशा से फिलिस्तीन के सशस्त्र संघर्ष का समर्थक रहा है। हालांकि वह 'फिलिस्तीन मुक्ति संगठन' (PLO) को असली प्रतिनिधि मानता है, फिर भी हमास के साथ उसके वैचारिक और रणनीतिक संबंध गहरे हैं। पाकिस्तान के कई धार्मिक और राजनीतिक दल हमास की नीतियों को जायज ठहराते आए हैं, जो अब सैन्य सहयोग के रूप में सामने आ रहा है।
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हमास नेताओं के पाकिस्तान दौरे
हमास के बड़े नेताओं का पाकिस्तान आना-जाना कोई नई बात नहीं है। 2006 में चुनाव जीतने के बाद हमास के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान का दौरा किया था और आर्थिक मदद हासिल की थी। इस्माइल हानिया और खालिद मशाल जैसे शीर्ष नेताओं के पाकिस्तानी मौलवियों और नेताओं से लगातार संपर्क रहे हैं। पाकिस्तान की जमात-ए-इस्लामी जैसी पार्टियां हमास के समर्थन में रैलियां करती हैं, जिससे यह साफ होता है कि हमास को वहां न केवल सरकारी बल्कि सामाजिक समर्थन भी प्राप्त है।
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भारत और इजराइल की चिंता
पाकिस्तान द्वारा हमास के लड़ाकों को ट्रेनिंग देना भारत और इजराइल के लिए एक बड़ा सुरक्षा जोखिम है। भारत के लिए चिंता यह है कि जो ट्रेनिंग हमास के लड़ाकों को दी जा रही है, उसका इस्तेमाल कश्मीर में सक्रिय आतंकी गुटों के साथ अनुभव साझा करने में किया जा सकता है। वहीं, इजरायल इसे सीधे तौर पर अपने दुश्मन को दी जा रही मदद के रूप में देख रहा है। पाकिस्तान की यह नीति उसे वैश्विक स्तर पर आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के रूप में फिर से कटघरे में खड़ा कर सकती है।












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