पाकिस्तान सरकार ने गिनाए योग के फायदे, भड़के लोगों ने शहबाज से कहा, मत बनो मोदी के गुलाम

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की अवधारणा सबसे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में अपने भाषण के दौरान प्रस्तावित की थी।

इस्लामाबाद, जून 22: कट्टरपंथी इस्लामिक देश पाकिस्तान में शहबाज सरकार के लिए इंटरनेशनल योगा डे पर संदेश देना देश के लोगों को पसंद नहीं आ रहा है और पाकिस्तान के लोगों का कहना है कि, पाकिस्तान सरकार को फौरन पाकिस्तान में भारतीय संस्कृति का प्रचार बंद करना चाहिए। वहीं, कई लोगों ने योग दिवस पर संदेश देने के लिए शहबाज सरकार को भारतीय प्रधानमंत्री मोदी का गुलाम तक करार दिया है।

शहबाज सरकार दिए थे संदेश

शहबाज सरकार दिए थे संदेश

21 जून को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। इस अवसर पर लोगों को योग के महत्व के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। इसी लाइन के साथ, पाकिस्तान सरकार ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर एक पोस्ट भी साझा किया था, जिसने देश के कई नेटिज़न्स को नाराज कर दिया है। पाकिस्तान सरकार की तरफ से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर ट्विटर पर संदेश देते हुए लिखा गया, कि 'योग के लाभ तत्काल संतुष्टि और स्थायी परिवर्तन दोनों प्रदान करते हैं। फिटनेस की दुनिया में, दोनों बेहद महत्वपूर्ण हैं। मन और शरीर को लंबे समय तक तैयार करते हुए योग आपकी शारीरिक और मानसिक क्षमता को जल्दी से बदल सकता है'।

सरकार पर भड़के पाकिस्तानी

ज्यादातर मुस्लिम योग को हिंदुओं का प्रतीक समझते हैं और योग का विरोध करते हैं। ऐसा भारत में भी होता है, लिहाजा पाकिस्तान में योग दिवस का विरोध होना कोई आश्चर्य की बात नहीं थी। पाकिस्तान सरकार के ट्वीट को देखकर कई पाकिस्तानी नागरिक सरकार की आलोचना करने लगे। एक पाकिस्तानी ट्विटर यूजर ने कगा कि, 'क्या आप भारतीय प्रधानमंत्री मोदी को फॉलो कर रहे है। हम आपको याद दिलाते हैं, कि आप पाकिस्तान की सरकार हैं, हालांकि, एक आयातित सरकार हैं।' वहीं, एक और ट्विटर यूजर ने शहबाज सरकार से पाकस्तान में भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देना बंद करने को कहा।

लोगों ने की पोस्ट हटाने की मांग

पाकिस्तान सरकार के योग दिवस पर किए गये पोस्ट पर काफी विरोध भरे रिएक्शन आने लगे और कई लोगों ने इसे मुसलमानों के खिलाफ बताकर पोस्ट डिलीट तक करने की मांग की। प्रोफेसर इमरान अल्बस नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि, 'मुझे लगता है कि यह ध्यान की भारतीय शैली है, सरकार को इस दिन (योग दिवस) का पालन नहीं करना चाहिए। मुसलमानों के रूप में, हमारे पास ध्यान करने के अपने तरीके हैं। कृपया इस पोस्ट को हटा दें। सार्वजनिक मंच पर आप भारतीय संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा दे रहे हैं या फिर यह पेड प्रमोशन है? ये बकवास है, पूरी तरह से बेतुका'। वहीं, एक अन्य ट्विटर यूजर आयशा राठौर ने कहा कि, 'गरीबों के लिए भी कुछ सोचें..अगर आपको इन सब से समय मिले तो।"

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का इतिहास

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का इतिहास

आपको बता दें कि, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की अवधारणा सबसे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में अपने भाषण के दौरान प्रस्तावित की थी। 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने घोषणा की थी, कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा और उसके बाद से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस या विश्व योग दिवस हर साल 21 जून को मनाया जाता है।

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