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पाकिस्तान में मारे गये खालिस्तानी आतंकी के बेटों को नहीं मिला वीजा, लावारिश की तरह दफनाया जाएगा भारत का गद्दार

परमजीत सिंह पंजवार हत्याकांड ने दुनिया के सामने पाकिस्तान को बेनकाब कर दिया है, कि किस तरह से पाकिस्तान भारत के वांटेड अपराधियों को पनाह देता है।

Paramjit Singh Panjwar

Pakistan Khalistani Leader Killed: आज से 12 साल पहले, मार्च 2011 में, भारत ने द्विपक्षीय गृह सचिव स्तरीय वार्ता के दौरान भारत के भगोड़े 50 अपराधियों की एक लिस्ट पाकिस्तान को सौंपी थी और कहा था, कि ये सभी भारत से भागकर पाकिस्तान चले गये हैं, जहां सरकार की तरफ से इन्हें संरक्षण किया जा रहा है।

भारत ने जिन 50 लोगों की लिस्ट पाकिस्तान को सौंपी थी, उनमें से एक नाम था परमजीत सिंह पंजवार, जो खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) का प्रमुख था। पाकिस्तान ने भारत से कहा, कि परमजीत सिंह पंजवार उसके देश में नहीं है। लेकिन, कल (शनिवार) परमजीत सिंह पंजवार की पाकिस्तान में गोली मारकर हत्या कर दी गई और पाकिस्तान की मीडिया में ये हत्याकांड हेडलाइंस बन गया।

पाकिस्तान के झूठ की खुली पोल

परमजीत सिंह पंजवार हत्याकांड ने दुनिया के सामने पाकिस्तान को बेनकाब कर दिया है, कि किस तरह से पाकिस्तान भारत के वांटेड अपराधियों को ना सिर्फ पनाह दे रहा है, बल्कि खालिस्तान समर्थकों के साथ भी पाकिस्तान के डीप स्टेट के गहरे ताल्लुकात हैं।

शनिवार सुबह 6 बजे 63 साल से खूंखार आतंकवादी परमजीत सिंह पंजवार की हत्या को पाकिस्तान के प्रमुख मीडिया चैनलों और अखबारों में सरदार सिंह मलिक नामक एक पाकिस्तानी सिख की नियमित हत्या के रूप में चित्रित किया गया था।

पंजवार को 30 कैलिबर की पिस्तौल से उस वक्त गोली मारी गई, जब वो अपने सुरक्षाकर्मी के साथ लाहौर के जौहर टाउन में किसी काम से बाहर निकला था। पाकिस्तानी मीडिया में घायल बंदूकधारी का कोई जिक्र नहीं है, क्योंकि इससे ये भी पता चल जाता, कि वो एक खालिस्तानी आतंकी को सुरक्षा गार्ड देकर रखे हुआ है।

लेकिन, अब इस खालिस्तानी आतंकी, जिसे पाकिस्तानी मीडिया ने सरदार सिंह मलिक नाम दिया है, उसके बेटों ने पाकिस्तान से वीजा मांगा है। जिसने पाकिस्तान की पोल खोल दी है, कि जिसे वो सरदार सिंह मलिक बता रहा है, असल में वो परमजीत सिंह पंजवार है, जो भारत का मोस्ट वांटेड है।

भारत में धार्मिक समारोह क्यों?

जर्मनी में रहने वाले परमजीत सिंह पंजवार के बेटों को पाकिस्तान वीजा देने के लिए तैयार नहीं हो रहा है।

वहीं, हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट है, कि इस खालिस्तानी आतंकवादी की मौत के मौके पर संगरूर के सांसद सिमरनजीत सिंह मान के कहने पर पंजाब के तरनतारन में उसके पंजवार गांव में धार्मिक समारोह आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

लाहौर में खालिस्तानी आतंकी पंजवार की हत्या ने पाकिस्तान के झूठ को एक बार फिर से ध्वस्त कर दिया है, क्योंकि उसने 1993 के मुंबई नरसंहार के मुख्य आरोपी दाऊद इब्राहिम और उसके गुर्गों के भी अपने देश में होने से इनकार कर चुका है। जबकि, तमाम सबूत हैं कि दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में रहता है।

पंजवार को 1 जुलाई 2020 को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा यूएपीए के तहत एक आतंकवादी नामित किया गया था, और उस पर नशीली दवाओं की तस्करी, नकली भारतीय मुद्रा का कारोबर करने और थापर इंजीनियरिंग कॉलेज, पटियाला के 18 छात्रों की हत्या सहित पांच नृशंस अपराधों को अंजाम देने का आरोप उसपर लगाया गया था।

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    पाकिस्तान में रहकर पंजवार, खालिस्तान आंदोलन के लिए धन जुटाने का काम करता था, जिसका मकसद भारत में अशांति फैलाना था। इसके साथ ही धन जुटाने के लिए पंजवार, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और कनाडा में अफगान हेरोइन की तस्करी के लिए भी जिम्मेदार था।

    वहीं, इस बात की पूरी संभावना है, कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, इस खालिस्तानी आतंकी को लाहौर के किसी गुमनाम कब्र में दफना देगी और उसके नामोनिशान को मिटा दिया जाएगा। इसके बेटों को अपने बाप को आखिरी बार देखने तक नहीं दिया जाएगा। कुल मिलाकर, देश से गद्दारी करने वाले खालिस्तानी आतंकी पंजवार को अनाथों जैसा दफना दिया जाएगा और उसके कब्र के पास उसके बेटों को फटकने भी नहीं दिया जाएगा।

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