Pakistan Crisis: तेल की किल्लत के चलते कराची में मंगाई इलेक्ट्रिक बसें, चार्जिंग स्टेशनों से ही गुल हुई बत्ती
Pakistan Crisis: ईरान युद्ध ने पाकिस्तान की कमर तोड़ कर रख दी है। गैस, पेट्रोल, डीजल के अलावा कई सारी चीजों की या तो किल्लत है या फिर उनके दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। सिर्फ इतना ही नहीं कई इलाकों में तो 20-20 घंटे की बिजली कटौती हो रही है। लोग एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए अब संसाधनों की कमी झेल रहे हैं। इसी बीच कराची प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया लेकिन अब उसका मजाक बनता दिख रहा है।
चार्जिंग स्टेशन की ही बत्ती हो गई गुल
दरअसल कराची में जारी बिजली संकट अब केवल घरों और कारोबारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर शहर की पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर भी दिखाई देने लगा है। पाकिस्तानी अखबार द डॉन में छपी खबर के मुताबिक शहर के कई रूटों पर चलने वाली तकरीबन 30 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसों को सड़कों से इसलिए हटाना पड़ा क्योंकि उनके चार्जिंग स्टेशनों पर कई दिनों से बिजली नहीं थी। बिजली न होने की वजह से बसों को चार्ज नहीं किया जा सका और वे ठप खड़ी रह गईं थी।

तीन दिन से चार्जिंग स्टेशनों की बत्ती गुल
अधिकारियों ने बताया कि कई चार्जिंग स्टेशनों पर लगातार तीन दिनों से बिजली आपूर्ति ठप थी। इस दौरान संबंधित विभाग की ओर से बिजली कंपनी को कई बार शिकायतें भेजी गईं, लेकिन अधिकारियों ने न तो समस्या का समाधान किया और न ही बिजली आपूर्ति बहाल कर सके। इसके चलते हालात लगातार खराब होते गए।
EV-1, EV-3 और पिंक बस सेवा हुई ठप
अधिकारी ने बताया कि जिन रूटों को निलंबित किया गया उनमें EV-1, EV-3 और केवल महिलाओं के लिए संचालित होने वाली R-1 पिंक बस सेवा शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मेहरान डिपो में मौजूद दो चार्जिंग स्टेशन तीन दिनों तक बिजली न मिलने के कारण बसों को चार्ज नहीं कर पा रहे थे। इसी वजह से इन रूटों पर बस संचालन रोकना पड़ा।
कई रूट पर सेवाएं ठप
एक अधिकारी के इमिग्रेशन, आखिरकार सिंध सरकार की पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवा का संचालन करने वाले नेशनल रेडियो एंड टेलीकम्युनिकेशन कॉर्पोरेशन (NRTC) को रविवार देर रात बड़ा फैसला लेना पड़ा। कर्मचारियों और अन्य संचार माध्यमों के जरिए यात्रियों को सूचित किया गया कि सोमवार से 30 से अधिक बसों वाले तीन प्रमुख इलेक्ट्रिक बस रूट अस्थायी रूप से बंद रहेंगे।
शनिवार से बिगड़ने लगी थी स्थिति
अधिकारियों के मुताबिक, समस्या की शुरुआत शनिवार शाम से ही होने लगी थी। वहीं रविवार शाम तक स्थिति और ज्यादा खराब हो गई। बसों की बैटरियां लगातार खत्म हो रही थीं और उन्हें चार्ज करने का कोई विकल्प नहीं था। ऐसे में विभाग के पास तीनों रूटों पर सेवा निलंबित करने की घोषणा करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। वहीं इन रूट पर यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों के सामने अब संकट खड़ा हो गया है
शिकायतों के बावजूद नहीं मिले जवाब
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने बिजली कंपनी को कई बार शिकायतें भेजीं, लेकिन उन्हें बहुत कम जवाब मिल रहे हैं मजबूरी में कई परिवारों को जनरेटर और बैटरी बैकअप जैसे महंगे विकल्पों का सहारा लेना पड़ा।
क्या है आगे की चुनौती?
फिलहाल बिजली आपूर्ति बहाल होने के बाद बस सेवा को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि यदि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर ही बिजली संकट का शिकार हो जाए, तो इलेक्ट्रिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट को लंबे समय तक चलाना मुश्किल हो जाएगा।
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