पाकिस्तान का दावा, UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए मिला ऑफर, भारत के लिए ठुकराया
UNSC में सुधारों की प्रक्रिया फरवरी 2009 में यूएन महासभा में पांच प्रमुख क्षेत्रों में शुरू हुई थी, जिसमें सदस्यता की श्रेणियां, वीटो का प्रश्न, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, एक विस्तृत सुरक्षा परिषद का आकार शामिल है।
इस्लामाबाद, जुलाई 17: पाकिस्तान ने दावा किया है कि, कुछ शक्तिशाली पश्चिमी देशों ने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए अपनी उम्मीदवारी पेश करने का ऑफर दिया है, लेकिन भारत की वजह से पाकिस्तान ने इस ऑफर को ठुकरा दिया है। पाकिस्तान ने दावा किया है, कि उसे पश्चिमी देशों की तरफ से ये ऑफर इसलिए दिया गया था, ताकि भारत को फायदा हो, लेकिन पाकिस्तान का कहना है, कि उसने ऑफर को ठुकरा कर भारत की यूएनएससी की स्थाई सदस्यता हासिल करने की कोशिश को फेल कर दिया है।

पाकिस्तान का दावा क्या है?
पाकिस्तान का कहना है कि, उसे शक्तिशाली पश्चिमी देशों की तरफ से यूएनएससी की स्थाई सदस्यता का ऑफर इसलिए दिया गया था, ताकि आने वाले वक्त में यूएनएससी में जो सुधार की जाने वाली है, उसको लेकर हो रहे गतिरोध को खत्म किया जा सके। पाकिस्तान का कहना है, कि उसने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, क्योंकि उसने इस कदम को कुछ देशों द्वारा यूएनएससी में स्थायी सीटों के विस्तार के विरोध में समूह को कमजोर करने की रणनीति के हिस्से के रूप में देखा। पाकिस्तानी अखबार ट्रिब्यून के मुताबिक, पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के एक अधिकारी ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए कहा कि, "कुछ शक्तिशाली देशों ने हमसे संपर्क किया है और कहा है कि पाकिस्तान को UNSC में स्थायी सीट के लिए अपनी बोली शुरू करनी चाहिए।" अधिकारी ने कहा कि, पाकिस्तान ने इस विचार को ठुकरा दिया, क्योंकि वह जानता है, कि यह प्रस्ताव वास्तविक नहीं था, बल्कि इस्लामाबाद को यूनाइटिंग फॉर कंसेस (यूएफसी) समूह को छोड़ने के लिए प्रेरित करने की एक चाल थी, जो यूएनएससी के विस्तार का विरोध करता है।

पाकिस्तान के कहने का मतलब क्या है?
दरअसल, भारत लंबे समय से यूएनएससी के स्थाई सदस्यता और वीटो पावर की मांग कर रहा है और यूएनएससी की स्थाई सदस्यता को लेकर लंबे समय से गतिरोध चल रहा है। भारत की मांग का अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस तो समर्थन करते हैं, लेकिन चीन बार बार भारत के खिलाफ चला जाता है। भारत के साथ ही साथ तीन और देश, ब्राजील, जापान और जर्मनी भी स्थाई सदस्यता का मांग करता है और इन चारों देशों ने एक जी4 का गठन किया है, लेकिन पाकिस्तान समेत 13 देश जी4 का विरोध करते हैं और उन्होंने यूएफसी बना रखा है, जो जी4 की स्थाई सदस्य बनने के अभियान का विरोध करता है और पाकिस्तान का दावा है, कि जी4 को फायदा पहुंचाने और यूएफसी को कमजोर करने के लिए पाकिस्तान को ये ऑफर दिया गया था, जो एक चाल थी। पाकिस्तान जिस यूएफसी का सदस्य है, उसमें कनाडा, दक्षिण कोरिया, अर्जेंटीना, इटली, स्पेन और तुर्की जैसे देश हैं।

क्या भारत के लिए ये एक झटका है?
दरअसल, पाकिस्तान जानता है, कि वो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य नहीं बन पाएगा और उसके पीछे की बाकी वजहों के अलावा एक बड़ी वजह ये भी है, कि स्थाई सदस्य बनने के बाद जितना पैसा खर्च करना पड़ता है, वो पाकिस्तान खर्च नहीं कर पाएगा, जबकि भारत यूएनएससी का स्थाई सदस्य बनने का हकदार है और विश्व की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बनने के कगार पर पहुंच चुका भारत लगातार अपनी दावेदारी पेश कर रहा है, जबकि पाकिस्तान को डर है कि, अगर भारत स्थाई सदस्य बन जाता है, तो कश्मीर पर उसका दावा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा, वहीं कई दूसरे मुद्दों पर भी वो भारत से कभी पंगा नहीं ले पाएगा। वहीं, यूनाइटेड नेशंस ने सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए अंतर-सरकारी वार्ता को अगले सत्र के लिए टाल दिया गया है, जिसे यूएफसी अपनी सफलता के तौर पर देख रहा है और इसीलिए पाकिस्तान दावा कर रहा है, कि उसने भारत को स्थाई सदस्यता लेने के दावे को फेल कर दिया है।

2009 में शुरू हुई थी सुधार की प्रक्रिया
आपको बता दें कि, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की प्रक्रिया फरवरी 2009 में यूएन महासभा में पांच प्रमुख क्षेत्रों में शुरू हुई थी, जिसमें सदस्यता की श्रेणियां, वीटो का प्रश्न, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, एक विस्तृत सुरक्षा परिषद का आकार और परिषद की कार्य पद्धतियां शामिल हैं। यूएनएससी के विस्तार पर आम सहमति के बावजूद, सदस्य देशों ने प्रक्रिया में देरी की बारीकियों पर सहमति नहीं जताई है। आपको बता दें कि, 193 सदस्यों वाले यूएनएससी में किसी भी सुधार के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है, लेकिन किसी भी पक्ष के पास जरूरी संख्या नहीं है।












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