अमेरिका-चीन में से पाकिस्तान का पक्का दोस्त कौन, पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर के US दौरे का क्या असर?
'हम उम्माह के साथ खड़े हैं। अमेरिका के साथ बैठे हैं और चीन के साथ के सोते हैं।'' पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर का यह वीडियो 25 जून 2025 से वायरल हो रहा है। इसके बाद तो मुनीर जुलाई में चीन व अगस्त में अमेरिका का दौरा भी करके आ चुके हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान का अमेरिका-चीन के लिए प्रेम कुछ ज्यादा ही उमड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अमेरिका-चीन में से पाकिस्तान का पक्का दोस्त कौन है?

चीन से दूरी नहीं बनाना चाहता पाकिस्तान
बीते माह जब असीम मुनीर चीन की यात्रा पर गए तो चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मिले। वांग यी ने पाकिस्तान को 'लोहे जैसे दोस्त' बताया। चीन से पाकिस्तान को ज़ेड-10 एमई अटैक हेलिकॉप्टर भी मिले हैं। पाकिस्तान की रक्षा और आर्थिक जरूरतें अमेरिका की तुलना में चीन बेहतर तरीके से पूरी करता है। इस पर पूर्व पाकिस्तान राजदूत मलीहा लोधी कहते हैं कि 'अमेरिका पाकिस्तान में चीन जैसी निवेश क्षमता नहीं रखता।' इस बयान के मायने ये हैं कि पाकिस्तान भले ही अमेरिका से नजदीकियां बढ़ाने में लगा हो, मगर इसके बावजूद वह चीन से दूरी नहीं बनाना चाहता।
अमेरिका के साथ दोस्ती कितने दिन टिकेगी?
फील्ड मार्शल बनने के बाद असीम मुनीर बीते दो माह में दो बार अमेरिका का दौरा कर चुके हैं। हाल ही मुनीर अमेरिका में मिडिल ईस्ट कमांडर जनरल माइकल कुरिल्ला की रिटायरमेंट सेरेमनी में शिरकत करके आए हैं। मीडिया से बातचीत में पूर्व पाकिस्तान राजदूत मलीहा लोधी का कहना है कि ''पाकिस्तान-अमेरिका के रिश्तों में इन दिनों गर्मजोशी तो देखी जा रही है। हालांकि, यह दोस्ती कितनी लंबी चलेगी, इस पर सवाल उठने लगे हैं। यूएस राष्ट्रपति ट्रंप की तारीफ करो, वो तुम्हारी तारीफ करेगा। लेकिन अमेरिका के साथ स्थायी दोस्ती आसान नहीं।''
भारत के पूर्व राजनयिक विकास स्वरूप क्या बोले?
अमेरिका और चीन से पाकिस्तान की बढ़ती 'दोस्ती' पर भारत की भी नजर है। मीडिया से बातचीत में भारत के पूर्व राजनयिक विकास स्वरूप ने तंज कसा है। बोले कि ''अमेरिका की ओर से रणनीतिक गलती है कि वह पाकिस्तान का पक्के दोस्त बनने जा रहा है, लेकिन पाकिस्तान के तो पहले से ही चीन के साथ करीबी रिश्ते हैं। चीन और अमेरिका एक दूसरे के प्रतिस्पर्धी भी हैं।''
डोनाल्ड ट्रंप को चाहिए नोबेल शांति पुरस्कार
इसमें कोई शक नहीं कि डोनाल्ड ट्रंप को शांति का नोबल पुरस्कार चाहिए। इसीलिए तो ट्रंप पहले भारत-पाकिस्तान के बीच 7 मई 2025 (ऑपरेशन सिंदूर) से चार दिन चले युद्ध को रुकवाने का श्रेय लेते दिखे और अब रूस-यूक्रेन युद्ध विराम के लिए ट्रंप अलास्का में रूसी राष्ट्रपति के साथ 15 अगस्त 2025 को बैठक कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान ने तो साल 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ट्रंप के नाम की सिफ़ारिश तक कर दी है।
ट्रंप, पाकिस्तान और आर्थिक सौदे
विशेषज्ञों की मानें तो अमेरिका किसी भी देश के साथ 'दोस्ती या दुश्मनी' करने में सबसे पहले अपने आर्थिक हित देखता है। ट्रंप का पाक प्रेम भी वित्तीय लाभ पर आधारित है। इसलिए ये संबंध लंबे समय तक शायद ही चले। ट्रंप और उनके अरबपति कारोबारी पार्टनर स्टीव विटकॉफ के परिवार ने पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया है। वहीं, असीम मुनीर के साथ लंच मीटिंग में ट्रंप ने पाकिस्तान के खनिज व तेल क्षेत्र में बड़े निवेश सौदों का वादा तक किया है।












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