Balochistan News: बलूचिस्तान में रूह कंपा देने वाला ट्रेंड, पुरुषों के बाद गर्भवती महिलाओं-बच्चियों का अपहरण
Balochistan Enforced Disappearances: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकारों का संकट अब एक बेहद खौफनाक मोड़ ले चुका है। बलूच यकजहती कमेटी (BYC) की नेता महरंग बलोच ने हाल ही में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य की दमनकारी नीतियां अब केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि महिलाओं, नाबालिग लड़कियों और यहां तक कि गर्भवती महिलाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है।
जबरन गुमशुदगी (Enforced Disappearances) की यह रणनीति बलूच समाज में डर पैदा करने और उनके प्रतिरोध को कुचलने का एक संगठित हथियार बन गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल है।

Human rights violations in Pakistan: लैंगिक हिंसा का नया हथियार
महरंग बलोच के अनुसार, बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी अब एक 'जेंडर-बेस्ड' रणनीति बन चुकी है। पहले सुरक्षा बल मुख्य रूप से पुरुषों को उठाते थे, लेकिन अब महिलाओं और छात्राओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। इनमें ऐसी महिलाएं भी शामिल हैं जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। आरोप है कि यह कदम बलूच परिवारों के भीतर मनोवैज्ञानिक दबाव पैदा करने और उन्हें सामाजिक रूप से तोड़ने के लिए उठाया जा रहा है, जो कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
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गर्भवती महिलाओं और नाबालिगों पर प्रहार
सबसे विचलित करने वाला पहलू नाबालिग लड़कियों और गर्भवती महिलाओं का गायब होना है। महरंग ने स्पष्ट किया कि इन पीड़ितों में दिव्यांग व्यक्ति भी शामिल हैं। जब ये महिलाएं अपने लापता परिजनों के लिए न्याय मांगने सड़कों पर उतरीं या अदालतों का दरवाजा खटखटाया, तो उन्हें ही दमन का शिकार बना लिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों द्वारा इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य बलूच समुदाय की आने वाली पीढ़ी और परिवार की नींव को सीधे तौर पर निशाना बनाना है।
प्रतिरोध की सामाजिक नींव को खतरा
बलूच नेतृत्व का मानना है कि महिलाओं को निशाना बनाना एक सोची-समझी नीति है ताकि 'प्रतिरोध' की सामाजिक जड़ों को कमजोर किया जा सके। राज्य संस्थाएं चाहती हैं कि डर के कारण लोग सवाल पूछना बंद कर दें। हालांकि, महरंग बलोच का तर्क है कि इस तरह की पहचान-आधारित हिंसा से चुप्पी नहीं, बल्कि सामूहिक एकजुटता पैदा हो रही है। लोग अब इस व्यवस्थित दमन के खिलाफ अधिक राजनीतिक रूप से जागरूक हो रहे हैं और अपनी पहचान की रक्षा के लिए लामबंद हैं।
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बढ़ते मामले और मानवाधिकारों की स्थिति
हालिया आंकड़ों के अनुसार, केवल जनवरी के अंत में ही डेरा बुगती जैसे क्षेत्रों से कई नागरिकों को सुरक्षा बलों द्वारा उठाए जाने की खबरें हैं। मानवाधिकार संगठन 'पांक' ने पुष्टि की है कि पाकिस्तानी फ्रंटियर कोर (FC) द्वारा आम नागरिकों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में लिया जा रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि बलूचिस्तान में संवैधानिक अधिकारों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है और वहां केवल 'डर और बल प्रयोग' की नीति ही शासन का मुख्य आधार बन गई है।












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