Taliban vs Pakistan Army: तालिबान के मुजाहिदीन के आगे पस्त हुआ पाकिस्तान! अब शुरू किया 'ऑपरेशन गजब'
Taliban vs Pakistan Army: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के खिलाफ 'ऑपरेशन गजब लिल हक' शुरू कर दिया है। यह कार्रवाई सीमा पर तालिबान द्वारा किए गए कथित हमलों के जवाब में की गई है।
पाकिस्तान का दावा है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए यह कदम उठा रहा है, जबकि इन हमलों में सैन्य ठिकानों के साथ-साथ रिहायशी इलाकों और शैक्षणिक संस्थानों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें हैं। दोनों देशों के बीच डूरंड लाइन और आतंकवाद को लेकर पुराना विवाद अब युद्ध की शक्ल ले चुका है।

ऑपरेशन गजब लिल हक की शुरुआत
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने अफगानिस्तान की सीमा चौकियों पर बड़े हवाई हमले किए हैं। इस सैन्य अभियान का नाम 'ऑपरेशन गजब लिल हक' रखा गया है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान ने बिना किसी उकसावे के उनकी चौकियों पर हमला किया था, जिसमें कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। जवाब में पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के चमन और लघमान जैसे इलाकों में तालिबान के वाहनों और हथियारों के डिपो को तबाह कर दिया है। सेना का कहना है कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक उनके लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते।
आम नागरिकों और संस्थानों पर हमले
हालांकि पाकिस्तान का दावा है कि उसने केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ अलग नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस गोलाबारी में आम अफगान नागरिकों के घरों और कॉलेजों को भी नुकसान पहुंचा है। कुनार प्रांत के असदाबाद शहर में स्थित कुनार यूनिवर्सिटी पर भी हमले की खबर है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है क्योंकि युद्ध के दौरान शैक्षणिक संस्थानों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाना मानवाधिकारों का उल्लंघन माना जाता है।
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तालिबान और पाकिस्तान के बिगड़ते रिश्ते
एक समय था जब पाकिस्तान को तालिबान का सबसे करीबी मददगार माना जाता था, लेकिन 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के कब्जे के बाद से रिश्ते लगातार बिगड़ते गए। मुख्य विवाद टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) को लेकर है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान टीटीपी के आतंकियों को शरण देता है, जो पाकिस्तान में हमले करते हैं। वहीं, तालिबान इन आरोपों को नकारता रहा है। आज स्थिति यह है कि दोनों देश एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गए हैं।
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डूरंड लाइन और सीमा विवाद
दोनों देशों के बीच जंग की एक बड़ी वजह 'डूरंड लाइन' है। पाकिस्तान इसे अपनी आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है और वहां तारबंदी कर रहा है। इसके उलट, अफगानिस्तान की कोई भी सरकार, चाहे वह तालिबान हो या पहले की लोकतांत्रिक सरकार, इस लाइन को सीमा के रूप में स्वीकार नहीं करती। तालिबान का मानना है कि यह रेखा उनके लोगों को दो हिस्सों में बांटती है। सीमा पर बाड़ लगाने को लेकर अक्सर दोनों सेनाओं के बीच खूनी झड़पें होती रहती हैं, जिसने अब बड़े युद्ध का रूप ले लिया है।












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