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China Pakistan Gwadar Port: दोस्ती में आई दरार! ड्रैगन ने ईरान और तालिबान पर दिया अल्टीमेटम

China Pakistan Gwadar Port: चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) और ग्वादर पोर्ट परियोजना में लगातार हो रही देरी को लेकर चीन ने पाकिस्तान पर सख्त रुख अपनाया है। हाल ही में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात कर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। चीन ने स्पष्ट किया कि ये दोनों परियोजनाएं न केवल रणनीतिक बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसमें देरी स्वीकार नहीं है। साथ ही, मुनीर को तालिबान और ईरान संकट को लेकर भी अल्टीमेटम दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने पाकिस्तान से अपने नागरिकों और निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। बलूचिस्तान में सक्रिय बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा लगातार हमलों के कारण कई चीनी इंजीनियरों की जान जा चुकी है, जिससे बीजिंग की चिंता और बढ़ गई है। यही वजह है कि चीन अब इस प्रोजेक्ट की गति तेज करने के लिए इस्लामाबाद पर दबाव बना रहा है।

China Pakistan Gwadar Port

China Pakistan Gwadar Port: ग्वादर पोर्ट पर चीन की बड़ी रणनीति

- ग्वादर पोर्ट को चीन एक बड़े व्यापारिक और ऊर्जा हब के रूप में विकसित करना चाहता है। इसका लक्ष्य इसे दुबई जैसे प्रमुख पोर्ट के विकल्प के रूप में स्थापित करना है।

- इसके अलावा, चीन की योजना ग्वादर को एक संभावित नौसैनिक अड्डे (Naval Base) के रूप में विकसित करने की भी है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी रणनीतिक पकड़ मजबूत हो सके।

- अगर ग्वादर पोर्ट पूरी क्षमता से काम करता, तो पाकिस्तान और चीन दोनों को बड़े आर्थिक लाभ मिल सकते थे। लेकिन सुरक्षा चुनौतियों और राजनीतिक अस्थिरता ने इस परियोजना की प्रगति को धीमा कर दिया है।

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CPEC के भविष्य पर मंडरा रहा खतरा

चीन को अब सीपीईसी (CPEC) प्रोजेक्ट के भविष्य को लेकर भी चिंता सताने लगी है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और तालिबान के साथ संघर्ष ने क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया है। चीन चाहता है कि यह प्रोजेक्ट अफगानिस्तान तक विस्तारित हो, ताकि काबुल को ग्वादर पोर्ट के जरिए वैश्विक व्यापार से जोड़ा जा सके। लेकिन मौजूदा हालात इस दिशा में बड़ी बाधा बन रहे हैं।

CPEC 2.0 पर चीन ने रखी पाकिस्तान के सामने कठोर शर्त

चीन ने साफ कर दिया है कि जब तक मौजूदा CPEC परियोजनाएं पूरी नहीं होतीं, तब तक CPEC 2.0 के तहत कोई नया निवेश शुरू नहीं किया जाएगा। यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वह लंबे समय से दूसरे चरण के निवेश की उम्मीद कर रहा था। विश्लेषकों के अनुसार, ईरान में जारी तनाव और मध्य-पूर्व की अस्थिरता ने भी चीन की चिंता बढ़ा दी है। बीजिंग को डर है कि इन हालात का असर उसके निवेश और नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।

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