Pakistan F-16 Crash Taliban: कितना खतरनाक है पाकिस्तानी फाइटर जेट F-16, तालिबान के हाथों कैसे हुआ ढेर?
Pakistan F-16 crash Taliban: डूरंड लाइन पर बढ़ते तनाव और पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच छिड़ी जंग ने दक्षिण एशिया में हड़कंप मचा दिया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, तालिबान के 'ऑपरेशन गजब लिल-हक' के दौरान पाकिस्तान का सबसे भरोसेमंद और घातक माना जाने वाला अमेरिकी लड़ाकू विमान F-16 अफगानिस्तान की सीमा में ढेर हो गया है। कभी अमेरिका की शान रहा यह विमान, जो मैक 2 की रफ्तार से उड़ता है और अपनी मारक क्षमता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, तालिबान के जमीनी हमले के सामने टिक नहीं सका।
यह घटना न केवल पाकिस्तान की वायुशक्ति पर एक बड़ा सवालिया निशान है, बल्कि यह भी दिखाती है कि 19% क्रैश रेट वाला यह फाइटर जेट अब पुराने पड़ते खतरों के सामने संघर्ष कर रहा है। आइए जानते हैं आखिर पाकिस्तान का यह 'सिकंदर' कैसे और क्यों मिट्टी में मिल गया।

F-16 की ताकत: क्यों माना जाता है इसे 'खतरनाक'?
F-16 फाइटिंग फाल्कन को दुनिया का सबसे सफल मल्टीरोल फाइटर माना जाता है। यह इंजन वाला छोटा विमान है, लेकिन इसकी मारक क्षमता बेजोड़ है। इसकी मैक 2 से अधिक की रफ्तार और 9-जी प्रेशर सहने की ताकत इसे हवा में पैंतरेबाजी (maneuverability) का उस्ताद बनाती है। 'फ्लाई-बाय-वायर' सिस्टम और फ्रेमलेस कैनोपी के कारण पायलट को चारों तरफ का साफ नजारा मिलता है। यह अपने साथ 6 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें ले जा सकता है, जो किसी भी दुश्मन के लिए यमराज साबित होती हैं।
पाकिस्तान का गुरूर और F-16 का इतिहास
पाकिस्तान की वायुसेना लंबे समय से F-16 के दम पर भारत और अपने पड़ोसियों को आंखें दिखाता रहा है। लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित यह विमान पाकिस्तान की रक्षा पंक्ति की रीढ़ है। हालांकि, अमेरिका ने इसे दूसरे देशों को निर्यात करने के लिए बनाना जारी रखा है, लेकिन अब अमेरिकी वायुसेना खुद इसे नहीं खरीदती। पाकिस्तान के पास मौजूद ये विमान पुराने वर्जन के हैं, जिनका इस्तेमाल अब आतंकवाद विरोधी अभियानों में किया जा रहा है, लेकिन अफगानिस्तान की दुर्गम पहाड़ियों में इनकी तकनीक नाकाम साबित हो रही है।
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F-16 crash rate vs performance: 19% विमान हो चुके हैं तबाह
F-16 की साख जितनी बड़ी है, इसका दुर्घटनाओं का इतिहास उतना ही डरावना है। 1978 से अब तक 4,600 से अधिक विमान बने हैं, जिनमें से 750 से ज्यादा दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। यानी कुल उत्पादन का लगभग 19 प्रतिशत हिस्सा हादसों में नष्ट हो चुका है। हाल के महीनों में ताइवान, पोलैंड और यूक्रेन में भी F-16 के गिरने की खबरें आई हैं। अनुभवहीन पायलट और जटिल ड्रोन रोधी अभियानों के कारण यह 'सुपर फाइटर' अक्सर अपना संतुलन खो देता है और मिट्टी में मिल जाता है।
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तालिबान का प्रहार और पाकिस्तानी वायुसेना को झटका
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन पर चल रहे खूनी संघर्ष में तालिबान ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक तकनीक को हौसले और सही रणनीति से हराया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान ने रॉकेट या एंटी-एयरक्राफ्ट गन के जरिए पाकिस्तानी F-16 को मार गिराया। भारत पहले ही दो बार इन विमानों को धूल चटा चुका है, लेकिन तालिबान जैसे जमीनी गुट द्वारा इसे गिराया जाना पाकिस्तान के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। यह घटना साबित करती है कि युद्ध के मैदान में केवल विमान की कीमत मायने नहीं रखती।












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