TTP, डूरंड लाइन और ड्रोन वॉर, क्यों बार-बार भिड़ रहे पाकिस्तान-अफगानिस्तान? कलह की पूरी इनसाइड स्टोरी

Pak Afghanistan War: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर चल रहा तनाव अब खुली सैन्य भिड़ंत का रूप ले चुका है। कई महीनों से जारी झड़पें अब सिर्फ बॉर्डर तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे की सीमा और हवाई क्षेत्र में कार्रवाई कर रही हैं। ड्रोन, मिसाइल और एयर स्ट्राइक के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए कई रक्षा विशेषज्ञ इसे दोनों देशों के बीच एक नए सैन्य संघर्ष की शुरुआत मान रहे हैं।

पाक के अंदर तक हुए तालिबान के हमले

हालिया तनाव तब और बढ़ गया जब पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने अपनी सीमा में घुसे चार अफगान ड्रोन मार गिराए हैं। वहीं अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने आधिकारिक तौर पर कहा कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तान की सीमा के अंदर हवाई हमले किए हैं। इस बयान के बाद दोनों देशों के रिश्ते और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।

Aerial view of military border tension at Durand Line

ड्रोन हमले और एयर स्ट्राइक से दहला बॉर्डर इलाका

पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, बलूचिस्तान के सरानन इलाके में एक सरकारी स्कूल के पास अफगान ड्रोन देखा गया था। उसे मार गिराने की कार्रवाई के दौरान दो नागरिक घायल हो गए। दूसरी ओर, अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में मौजूद इस्लामिक स्टेट (ISIS) के संदिग्ध ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। अफगानिस्तान का दावा है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल आतंकी हमलों की योजना बनाने और ट्रेनिंग के लिए किया जा रहा था।

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कराची आतंकी हमले के बाद और बढ़ा तनाव

तनाव उस समय और बढ़ गया जब 27 जून को कराची स्थित सिंध रेंजर्स मुख्यालय पर आतंकी हमला हुआ, जिसमें तीन पाकिस्तानी जवान मारे गए। पाकिस्तान ने इस हमले के लिए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के धड़े जमात-उल-अहरार को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि इसकी साजिश अफगानिस्तान की धरती पर रची गई थी।

पाकिस्तान के जवाबी हमले में कितना नुकसान?

कराची हमले के बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पकतिया, पकतिका और कुनार प्रांतों में हवाई हमले किए। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के मुताबिक इन हमलों में 25 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए और बड़ी मात्रा में हथियार नष्ट कर दिए गए। इसके अलावा बाजौर जिले में चलाए गए अभियान में टीटीपी कमांडर खान फेरोश उर्फ जाबुल को भी मार गिराने का दावा किया गया।

नागरिकों की मौत से बढ़ा मानवीय संकट

इन सैन्य कार्रवाइयों में आम लोग भी बड़ी संख्या में प्रभावित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) के मुताबिक पाकिस्तान के हवाई हमलों में कम से कम 28 मासूम लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। वहीं अफगानिस्तान के प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने दावा किया कि पकतिया में हुए हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत 38 नागरिक मारे गए।

तालिबान की चेतावनी और पुराने विवाद

नागरिकों की मौत के बाद तालिबान के उप सूचना मंत्री मुहाजिर फराही ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि इस हमले का जवाब दिया जाएगा। दोनों देशों के रिश्ते पहले से ही खराब थे। पाकिस्तान लगातार तालिबान पर TTP आतंकियों को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है। हालांकि कतर की मध्यस्थता से एक बार युद्धविराम हुआ था, लेकिन वह ज्यादा समय तक नहीं चल सका।

तनाव की सबसे बड़ी वजह TTP और डूरंड लाइन

इस पूरे विवाद के पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और दूसरा डूरंड लाइन सीमा विवाद। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP के लड़ाके अफगानिस्तान से आकर पाकिस्तान में हमले करते हैं। पाकिस्तान के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक साल 2025 में TTP के हमलों में करीब 660 सुरक्षाकर्मी और 580 से ज्यादा नागरिक मारे जा चुके हैं। दूसरी ओर 1893 में बनाई गई करीब 2,600 किलोमीटर लंबी डूरंड लाइन को पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, जबकि अफगानिस्तान की कोई भी सरकार, यहां तक कि तालिबान भी इसे स्वीकार नहीं करता। इसी वजह से सीमा पर अक्सर हिंसक झड़पें होती रहती हैं।

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भारत ने भी जताई चिंता

पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान में की गई सैन्य कार्रवाई पर भारत ने भी चिंता जताई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए और एकतरफा सैन्य कार्रवाई पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है। भारत ने यह भी कहा कि सीमा पर तनाव बढ़ने से पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

क्या दोनों देशों के बीच पूरी जंग होगी?

हालांकि ड्रोन हमलों और एयर स्ट्राइक की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच एक फुल स्केल वॉर होने की संभावना कम है। पाकिस्तान आर्थिक संकट और भारी कर्ज से जूझ रहा है, जबकि तालिबान के पास आधुनिक लड़ाकू विमान और बड़े सैन्य संसाधनों की कमी है। इसलिए माना जा रहा है कि आने वाले समय में जंग ड्रोन हमलों, एयर स्ट्राइक और सीमा पर गोलीबारी तक ही सीमित रह सकता है। वहीं रूस, चीन और दूसरे देश दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जब तक TTP और डूरंड लाइन जैसे विवादों का स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक इस सीमा पर तनाव खत्म होने की संभावना कम दिखाई देती है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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