Assam Floods: असम में बाढ़ का तांडव, ब्रह्मपुत्र नदी उफान पर, गुवाहाटी समेत कई जिलों में हाई अलर्ट जारी

Assam Floods News: असम में मानसून की एंट्री के साथ ही बाढ़ के हालात बेहद गंभीर और डरावने हो गए हैं। पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश और राज्य के पहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार मूसलाधार बारिश (Incessant Rainfall) आफत बन कर बरस रही है।

पहाड़ी नदियों का पानी तेजी से असम के मैदानी इलाकों में आ रहा है, जिसके कारण विशाल ब्रह्मपुत्र नदी (Brahmaputra River) और उसकी सहायक नदियां उफान पर हैं।

Flooded residential streets in Guwahati Assam

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 6 जिलों के 221 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है, जिससे 46,000 से ज्यादा लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इस सीजन में बाढ़ के कारण पहली मौत की आधिकारिक पुष्टि भी हो चुकी है, जहां धेमाजी जिले के सिसिबोरगांव में पानी में डूबने से एक महिला की जान चली गई।

गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र का रौद्र रूप, नाव और फेरी सेवाओं पर रोक

राज्य की राजधानी गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर खतरे के निशान (Danger Level) के बेहद करीब पहुंच चुका है।

तटवर्ती इलाकों में अलर्ट: गुवाहाटी के निचले हिस्से और नदी के किनारे बनी बस्तियां पूरी तरह से जलमग्न हो चुकी हैं। नदी की तेज धारा और बढ़ते पानी को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। किसी भी बड़े हादसे को टालने के लिए गुवाहाटी और उसके आस-पास के इलाकों में नाव और नाव-फेरी (Ferry Services) के संचालन को पूरी तरह रोक दिया गया है।

शहर के नजदीकी ग्रामीण और निचले इलाकों के घरों में घुटनों तक पानी भर गया है। लोग अपना कीमती सामान समेटकर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। पीने के साफ पानी और रोजमर्रा के राशन के लिए जनता को भारी संघर्ष करना पड़ रहा है।

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धेमाजी जिला सबसे बदहाल, 3800 हेक्टेयर फसल बर्बाद

आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस बाढ़ का सबसे क्रूर रूप धेमाजी (Dhemaji) जिले में देखने को मिल रहा है। अकेले धेमाजी में 45,841 लोग बाढ़ के पानी के बीच घिरे हुए हैं।

इसके अलावा नलबाड़ी, डिब्रूगढ़, चिरांग, लखीमपुर और बिस्वनाथ जिलों की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है। पूरे राज्य में 3,809 हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य भूमि (खड़ी फसल) पानी में डूबकर पूरी तरह नष्ट हो चुकी है, जिससे किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिर गया है। इंसानों के साथ-साथ करीब 88,000 मवेशी (पशु) भी इस आपदा की चपेट में हैं।

मैदान में उतरी भारतीय सेना, NDRF और SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन

बाढ़ प्रभावित इलाकों में हालात को संभालने और लोगों की जान बचाने के लिए भारतीय सेना (Indian Army) ने कमान संभाल ली है। भारतीय सेना की 'स्पीयर हेड डिवीजन' के जवानों ने धेमाजी के सबसे गंभीर रूप से डूबे 'अरुण चपोरी' इलाके में स्थानीय प्रशासन और NDRF-SDRF के साथ मिलकर एक बड़ा संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।

जवानों ने बेहद खराब मौसम और उफनती लहरों के बीच से 27 फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला और राहत शिविरों तक पहुंचाया। प्रशासन ने राज्यभर में कई राहत शिविर (Relief Camps) और राहत वितरण केंद्र चालू कर दिए हैं, जहां पीड़ितों को भोजन, तिरपाल, ओआरएस और जरूरी दवाएं दी जा रही हैं। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक पूर्वोत्तर में भारी बारिश का दौर जारी रहेगा, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो सकती है।

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