पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक से बुरी तरह बौखलाया तालिबान, अफगानिस्तान सीमा पर जंग के हालात, 40 मरे

पाकिस्तान की तरफ से कम से कम तीन हवाई हमले किए गये हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चों सहित 40 से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं।

इस्लामाबाद/काबुल, अप्रैल 19: अफगानिस्तान और पाकिस्तान तेजी से युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं और तालिबान ने साफ कर दिया है, कि अगर पाकिस्तान ने सीमा पार गोलीबारी या फिर एयरस्ट्राइक की, तो वो चुप नहीं बैठेगा और पाकिस्तान पर हमला कर देगा। पिछले साल अगस्त महीने में अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने के बाद पाकिस्तान ने तालिबान सरकार के लिए पूरी दुनिया से समर्थन मांगा था, लेकिन दोनों के बीच संबंध नाटकीय तरीके से इतने खराब हो जाएंगे, ये चौंकाने वाला है।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान में गोलीबारी

पाकिस्तान-अफगानिस्तान में गोलीबारी

एशिया टाइम्स और पाकिस्तानी अखबारों ने दावा किया है कि, 14 अप्रैल को अफगानिस्तान की तालिबान फोर्स ने पाकिस्तान की सीमा रेखा के अंदर 35 बम दागे हैं और चित्राल क्षेत्र में पाकिस्तानी पोस्ट पर अफगानिस्तान बलों ने करीब 6 घंटे तक फायरिंग की है। जिसके बाद पाकिस्तान की तरफ से जवाबी कार्रवाई की गई और पाकिस्तानी जेट विमानों ने शनिवार को तड़के अफगानिस्तान के खोस्त और कुनार प्रांतों में आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और हाफिज गुल बहादर समूहों के ठिकानों को जमकर बमबारी की, जिसके बाद तालिबान आग बबूला हो गया है और तालिबान की तरफ से पाकिस्तान को धमकी दी गई है। वहीं, रिपोर्ट् से मुताबिक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर काफी तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं।

40 से ज्यादा लोगों की मौत

40 से ज्यादा लोगों की मौत

मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है, पाकिस्तान की तरफ से कम से कम तीन हवाई हमले किए गये हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चों सहित 40 से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं। दरअसल, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार का विरोध करता है और पाकिस्तान के अंदर अफगानिस्तान जैसी पूर्ण इस्लामिक सरकार चाहता है और पूरे पाकिस्तान में शरिया कानून लागू करना चाहता है, जिसको लेकर पाकिस्तान ने तहरीक-ए-तालिबान को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। लेकिन, तालिबान की अफगानिस्तान की वापसी के बाद तालिबान ने इस संगठन के गिरफ्तार किए गये आतंकवादियों को रिहा कर दिया और अफगानिस्तान की सीमा में टीटीपी के लिए सुरक्षित ठिकाने बनाए गये, जिन्हें अशरफ गनी की सरकार के दौरान ध्वस्त कर दिए गये थे। वहीं, पिछले हफ्ते इन दोनों आतंकवादी संगठनों ने मिलकर पाकिस्तान के डी आई खान डिवीजन और उत्तरी वजीरिस्तान में सुरक्षा बलों पर सीमा पार से भीषण हमले किए हैं।

तालिबान का साथ देने से इनकार

तालिबान का साथ देने से इनकार

पाकिस्तान ने तालिबान का दिल खोलकर समर्थन किया है और तालिबान की सत्ता में वापसी का पाकिस्तान में जमकर स्वागत किया गया और पूरे देश में मिठाइयां बांटी गई। वहीं, पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने तो यहां तक कहा था, कि तालिबान ने गुलामी की बेड़ियां तोड़ दी हैं और अब अफगानिस्तान आजाद हो गया है, लेकिन यही तालिबान अब पाकिस्तान के लिए भस्मासुर साबित हो रहा है। हांलांकि, तालिबान सरकार इस बात से इनकार करती है, कि वह पाकिस्तानी आतंकवादियों को पनाह दे रही है, लेकिन, तालिबान ने 2700 किलोमीटर लंबी डूरंड लाइन को मानने से इनकार कर दिया और पाकिस्तान की तरफ से लगाए गये बाड़ को उखाड़ फेंका। तालिबान ने साफ कर दिया है, कि वो डूरंड लाइन को नहीं मानता है।

पश्तूनों में पाकिस्तान के खिलाफ भारी गुस्सा

पश्तूनों में पाकिस्तान के खिलाफ भारी गुस्सा

पूर्वी अफगानिस्तान प्रांतों कुनार और खोस्त पर शनिवार को पाकिस्तानी हवाई हमले, जिसमें दर्जनों लोग मारे गए थे, जिसके बाद उत्तरी वज़ीरिस्तान में अफगानिस्तानी फोर्स ने सात पाकिस्तानी सैनिकों को बम से उड़ाकर मार दिया। लेकिन, अफगानिस्तान के पश्तून इलाकों में पाकिस्तान के खिलाफ भीषण गुस्सा फूट पड़ा है और अफगानिस्तान में पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी बड़ी रैलियों का आयोजन किया जा रहा है। वहीं, जनता के गुस्से से डरकर तालिबान की सरकार ने भी पाकिस्तान के खिलाफ काफी कड़ी प्रतिक्रिया दी है, क्योंकि अफगानिस्तान में जोर-शोर से आवाज उठ रहे हैं, कि तालिबान बाहरी हमलों से देश के नागरिकों की सुरक्षा करने में असमर्थ है।

फंस गया है तालिबान!

फंस गया है तालिबान!

तालिबान की सरकार को मान्यता दिलाने के लिए सबसे ज्यादा पैरवी पाकिस्तान ने ही की थी और सीमा पर तनावपूर्ण हालात तालिबान के लिए एक बड़ा झटका है। वहीं, पिछले कुछ महीनों में विश्व समुदाय ने अफगानिस्तान की तरफ देखना ही बंद कर दिया है, जिससे तालिबान काफी ज्यादा निराश है। वहीं, चीन भी तालिबान को भाव देने के मूड में नहीं है और इसी महीने चीन में अफगानिस्तान के मुद्दे पर अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में उस वक्त तालिबान को बड़ा झटका लगा, जब ज्यादातर देशों ने मदद करने से हाथ खड़े कर दिए। वहीं, यूक्रेन संकट की वजह से चीन रूस के पीछे खड़ा है और खुद चीन की स्थिति कोविड ने खराब कर दी है, लिहाजा चीन फूंख-फूंककर अफगानिस्तान में कदम बढ़ा रहा है। जबकि, पाकिस्तान की नई सरकार का रूख तालिबान को लेकर क्या होगा, ये भी अभी तक साफ नहीं हुआ है।

पाकिस्तान के खिलाफ भारी गुस्सा

पाकिस्तान के खिलाफ भारी गुस्सा

हालांकि, पिछले महीने पाकिस्तान के विदेश मंत्री वांग यी ने काबुल का दौरा किया था, लेकिन पाकिस्तान के 'आयरन ब्रदर' पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक कर चीन को भी बड़ा झटका दिया है और बीजिंग की तरफ से पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक को लेकर अभी तक कोई बयान नहीं आया है, क्योंकि तालिबान ने कहा है कि, पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का एक प्रमुख उल्लंघन है।

सीमा पर लगातार हिंसा

सीमा पर लगातार हिंसा

पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर लगातार हिंसक वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है। हालांकि, जब तक इमरान खान प्रधानमंत्री थे, तब तक पाकिस्तानी सेना ने संयम दिखाया था, लेकिन इमरान खान के हटते ही अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक कर जनरल बाजवा ने संकेत साफ कर दिए हैं, कि पाकिस्तानी सेना अमेरिका के साथ है। वहीं, उत्तरी वजीरिस्तान में आतंकियों ने 2 अलग अलग हमलों में पाकिस्तानी सेना के दो जवानों की हत्या कर दी है और पाकिस्तानी सेना ने इसकी पुष्टि भी की है। जिसको लेकर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने तालिबान सरकार के सामने कठोर विरोध दर्ज कराया है, लेकिन रिपोर्ट है कि तालिबान ने तहीरक-ए-तालिबान के खिलाफ एक्शन लेने से इनकार कर दिया है और इन परिस्थितियों में सीमा पर युद्ध होने की आशंका काफी बढ़ गई है।

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