चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ बगावत, सांसदों ने खुलेआम लिख डाली ये चिट्ठी
नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग साल 2012 में चीन के राष्ट्रपति चुने गए थे और वहां के नियम के मुताबिक उन्हें साल 2023 में पद छोड़ना होगा। लेकिन चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने संविधान से उस धारा को हटाने का प्रस्ताव दिया है जो किसी शख्स को राष्ट्रपति के सिर्फ दो कार्यकाल देती है। अगर यह प्रस्ताव पारित हो गया तो जिनपिंग चीन के स्थायी राष्ट्रपति हो जाएंगे। लेकिन अब चीन में इसके खिलाफ आवाज खड़ी हो रही है। चीन में एक जाने माने राजनीतिक टिप्पणीकार एवं एक प्रसिद्ध महिला कारोबारी ने इस प्रस्ताव के खिलाफ आवाज उठाई है। जानिए क्या कहना है उनका

सांसदों को लिखा ओपन लेटर
न्यूज एजेंसी IANS के अनुसार, टिप्पणीकार ने सांसदों को खुला पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वे चिनफिंग को अनिश्चितकाल तक सत्ता में बने रहने की अनुमति देने वाले प्रस्ताव को खारिज करें। उल्लेखनीय है कि चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के कार्यकाल की समयसीमा खत्म करने के लिए रविवार को एक प्रस्ताव की घोषणा की थी।

अगर ऐसा हुआ तो एक राजशाही शासन की ओर लौटेगा चीन
इस प्रस्ताव के विरोध में लोकप्रिय मैसेजिंग एप वीचैट पर बयान प्रसारित हो रहे हैं। सरकार संचालित ‘चाइना यूथ डेली' के पूर्व संपादक ली दातोंग ने वीचैट पर एक बयान में चीन की संसद के सदस्यों को लिखा कि कार्यकाल की सीमा खत्म करना ‘‘अराजकता के बीज बोने'' जैसा होगा। ली ने स्थानीय समाचार एजेंसी से कहा, ‘‘यदि देश के शीर्ष नेता के कार्यकाल की कोई समयसीमा नहीं होगी तो हम एक राजशाही शासन की ओर लौटेंगे।''

पूरी तरह धोखा और धारा के विपरीत है यह प्रस्ताव
सरकार में सुधारों की वकालत कर चुकी महिला कारोबारी वांग यिंग ने कहा, ‘‘मेरी पीढ़ी ने माओ को देखा है, वह युग खत्म हो गया है। हम इस पर संभावित रूप से वापस कैसे जा सकते हैं?'' उन्होंने वीचैट पर लिखा कि कम्युनिस्ट पार्टी का प्रस्ताव ‘‘पूरी तरह धोखा'' और ‘‘धारा के विपरीत'' है। उन्होंने लिखा, ‘‘मैं जानती हूं कि आप (सरकार) कुछ भी करने का दुस्साहस करेंगे और किसी आम आदमी की आवाज का निश्चित तौर पर कोई फायदा नहीं होगा। लेकिन मैं एक चीनी नागरिक हूं और भागने की मेरी कोई योजना नहीं है। यह मेरी मातृभूमि भी है.'' नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थाई समिति के सूचना विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें खुले पत्र के बारे में जानकारी नहीं है।












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